श्रृंगेश्वर घाट निर्माण के लिए 628.21 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने से झाबुआ में धार्मिक-पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया के प्रयासों से बड़ी सौगात।
भूमिका
श्रृंगेश्वर घाट निर्माण को लेकर झाबुआ जिले को एक ऐतिहासिक उपलब्धि मिली है। जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में यह निर्णय मील का पत्थर माना जा रहा है। 628.21 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति के साथ यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देगी, बल्कि झाबुआ को धार्मिक-पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान भी दिलाएगी।

श्रृंगेश्वर घाट निर्माण स्वीकृति का महत्व
झाबुआ जिले के श्रृंगेश्वर धाम क्षेत्र में लंबे समय से घाट निर्माण और सौंदर्यीकरण की मांग उठ रही थी। श्रृंगेश्वर घाट निर्माण को मिली स्वीकृति से यह प्रतीक्षा अब समाप्त हो गई है। क्षेत्रीय जनता का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी और धार्मिक आयोजनों को सुव्यवस्थित स्वरूप मिलेगा।
628.21 लाख की योजना में क्या-क्या होगा
श्रृंगेश्वर घाट निर्माण परियोजना के अंतर्गत—
-
मजबूत घाट और सीढ़ियों का निर्माण
-
पाथवे और बैठने की सुव्यवस्था
-
आधुनिक प्रकाश व्यवस्था
-
स्वच्छता एवं पेयजल सुविधाएं
-
हरित क्षेत्र का विकास
-
सौंदर्यीकरण से जुड़े अन्य कार्य
इन सभी कार्यों से श्रृंगेश्वर धाम एक आदर्श धार्मिक स्थल के रूप में विकसित होगा।

धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती
श्रृंगेश्वर धाम सदियों से आस्था का केंद्र रहा है। श्रृंगेश्वर घाट निर्माण से इस पवित्र स्थल की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। धार्मिक अनुष्ठानों, मेलों और पर्वों के आयोजन को नया आयाम मिलेगा।
स्थानीय रोजगार और आर्थिक प्रभाव
घाट निर्माण और पर्यटन विकास से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। होटल, दुकान, परिवहन और अन्य सेवाओं में वृद्धि होगी। श्रृंगेश्वर घाट निर्माण झाबुआ के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायक सिद्ध होगा।
जनप्रतिनिधियों और संत समाज की प्रतिक्रिया
श्रृंगेश्वर धाम के गादीपति महंत श्री रामेश्वरगिरी जी महाराज ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि श्रृंगेश्वर घाट निर्माण से भक्तों की संख्या बढ़ेगी और यह धाम राष्ट्रीय पहचान प्राप्त करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विकासपरक सोच और कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया के अथक प्रयासों से यह परियोजना संभव हो सकी। क्षेत्रीय जनता ने माना कि यदि यह नेतृत्व न होता तो श्रृंगेश्वर घाट निर्माण जैसी बड़ी योजना धरातल पर नहीं उतर पाती।

श्रृंगेश्वर धाम का पौराणिक महत्व
मान्यता है कि श्रृंगी ऋषि के श्राप-मोचन से जुड़ा यह स्थल सदियों से पूजनीय रहा है। माही और मधुकन्या नदियों के संगम पर स्थित यह धाम धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र रहा है। श्रृंगेश्वर घाट निर्माण इस ऐतिहासिक परंपरा को और सुदृढ़ करेगा।
क्षेत्र में उत्सव और जनभावना
झकनावदा में भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेंद्र राठौड़ सहित कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर खुशी मनाई। “निर्मला भूरिया जिंदाबाद” के नारों के साथ श्रृंगेश्वर घाट निर्माण की सौगात का स्वागत किया गया।

भविष्य की संभावनाएं
परियोजना पूर्ण होने के बाद श्रृंगेश्वर धाम झाबुआ का प्रमुख पर्यटन केंद्र बनेगा। राज्य-स्तर के धार्मिक सर्किट में इसका समावेश संभव होगा। इससे जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर उभरेगी।
निष्कर्ष
श्रृंगेश्वर घाट निर्माण केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि झाबुआ की आस्था, संस्कृति और विकास का प्रतीक है। यह योजना आने वाले वर्षों में जिले को धार्मिक-पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाएगी।
