—Advertisement—

शीतकालीन सत्र के समापन पर पीएम मोदी की Tea Party में शामिल हुए विपक्षी नेता

Author Picture
Published On: 19 December 2025
PM Modi Tea Party
— टी मीटिंग में नए संसद भवन के लिए समर्पित हॉल की मांग उठी

—Advertisement—

शीतकालीन सत्र के समापन पर पीएम मोदी की Tea Party में शामिल हुए विपक्षी नेता, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी की बातचीत

भोपाल/नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र अब अपने समापन की ओर बढ़ चुका है। इस सत्र की शुरुआत से ही दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में हंगामेदार दृश्य देखने को मिले। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच कई बार बहसें इतनी गर्मा गईं कि सदन की कार्यवाही कई बार अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी। लेकिन जैसे ही सत्र समाप्त हुआ, परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Tea Party आयोजित की गई, जिसमें इस बार न सिर्फ सत्तापक्ष के बल्कि विपक्ष के कई बड़े नेता भी मौजूद रहे।

इस Tea Party में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले समेत तमाम विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से आयोजित यह Tea मीटिंग हर साल की तरह इस बार भी सत्र की तल्खी से हटकर सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। पार्टी में मौजूद नेताओं और सूत्रों के अनुसार, इस दौरान कई विषयों पर विचार-विमर्श हुआ, जिसमें संसद के कामकाज, नए सांसदों की भूमिका और नए संसद भवन में आवश्यकताओं पर चर्चा शामिल थी।

Tea मीटिंग में विपक्षी नेताओं की उपस्थिति और बातचीत

प्रधानमंत्री मोदी की इस चाय पार्टी में विपक्ष के नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि संसद के भीतर और बाहर सौहार्दपूर्ण संवाद की कोशिशें जारी हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रियंका गांधी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच व्यक्तिगत बातचीत भी हुई। इस दौरान कांग्रेस महासचिव ने अपने निर्वाचन क्षेत्र केरल के वायनाड को लेकर मुद्दे उठाए और प्रधानमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना। इस बातचीत को सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रही तल्खी से अलग, सकारात्मक और सहकारी बताया जा रहा है।

सत्र में विपक्ष के लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण विधेयकों पर चर्चा में बाधा आई थी। टी मीटिंग के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में इस पर भी बातचीत हुई। प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज नहीं कर रहे थे, बल्कि सत्र को व्यवस्थित रूप से चलाना उनकी प्राथमिकता थी। इस दौरान विपक्ष के सदस्यों जैसे एनके प्रेमचंद्रन की तैयारी और योगदान की सराहना भी की गई।

नए संसद भवन और समर्पित हॉल की मांग

Tea Party में सांसदों ने प्रधानमंत्री के समक्ष नए संसद भवन में एक समर्पित हॉल की मांग भी रखी। यह हॉल विशेष रूप से सदस्यों के आराम और कार्यकुशलता के लिए बनाया जा सकता है। एक वरिष्ठ मंत्री ने इस संदर्भ में बताया कि पुराने संसद भवन में ऐसी व्यवस्था पहले मौजूद थी, लेकिन उसका उपयोग अपेक्षाकृत कम हुआ करता था। सांसदों ने कहा कि नए भवन में ऐसी सुविधा से उन्हें बैठकों और समिति कार्यों में अधिक सुविधा मिलेगी।

सांसदों ने यह भी बताया कि सत्र का आयोजन सार्थक और उपयोगी रहा, लेकिन इसे और बढ़ाने की संभावना थी। कई सांसदों, विशेषकर विपक्ष के नेताओं ने सत्र के समय को कम मानक बताया और कहा कि देर रात तक विधेयक पारित करना आदर्श स्थिति नहीं मानी जाती। इस टी मीटिंग में यह मुद्दा सौहार्दपूर्ण तरीके से उठाया गया और प्रधानमंत्री ने इसे गंभीरता से सुना।

सत्र के दौरान हंगामेदार घटनाक्रम और हल्की-फुल्की बातचीत

सत्र के दौरान विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच कई बार बहसें तीखी हुईं। प्रस्तावित विधेयकों पर चर्चा, विभिन्न समितियों की रिपोर्ट और सदन में हंगामा—यह सब शीतकालीन सत्र की विशेषता रही। लेकिन चाय पार्टी में यह सारी तल्खी पीछे छूट गई। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और विपक्षी नेताओं के बीच हल्की-फुल्की बातचीत भी हुई।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर मजाकिया अंदाज में कहा कि सत्र अपेक्षाकृत छोटा रहा, क्योंकि विपक्ष ने लगातार विरोध प्रदर्शन किया। इसके साथ ही उन्होंने कुछ विपक्षी नेताओं की तैयारी और उनके योगदान की भी सराहना की। यह दिखाता है कि सत्र के भीतर और बाहर दोनों ही जगह संवाद और समझौता संभव है।

Tea मीटिंग का महत्व और संदेश

इस Tea Party का एक बड़ा संदेश यह रहा कि संसद में चल रही आलोचनाओं और विरोध प्रदर्शन के बावजूद नेता व्यक्तिगत और सौहार्दपूर्ण स्तर पर बातचीत कर सकते हैं। सांसदों ने बताया कि इस तरह के मिलनसार अवसर से सत्र की कठोरता के बावजूद सहयोग की भावना बनी रहती है।

टी मीटिंग में यह भी चर्चा हुई कि सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर प्रधानमंत्री से सीधे संवाद कर सकते हैं। प्रियंका गांधी, सुप्रिया सुले और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी अपनी बात रखी, और प्रधानमंत्री ने उन्हें ध्यानपूर्वक सुना। इस प्रकार यह बैठक सदन में जारी बहसों और आरोप-प्रत्यारोप से हटकर, सहयोग और पारस्परिक समझ का प्रतीक बनी।

सत्र के समाप्त होने के बाद आयोजित यह चाय पार्टी केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह दिखाता है कि भारतीय संसद में सौहार्दपूर्ण संवाद और समन्वय के लिए अवसर बनाए जा सकते हैं। इसके माध्यम से सांसदों को एक-दूसरे की दृष्टि और विचारों को समझने का मौका मिला।

निष्कर्ष

शीतकालीन सत्र के समापन पर आयोजित प्रधानमंत्री मोदी की चाय पार्टी ने एक बार फिर दिखा दिया कि सांसदों के बीच व्यक्तिगत और सौहार्दपूर्ण संवाद कितना महत्वपूर्ण है। चाहे सदन में हंगामा हो, चाहे विपक्ष के नेता किसी विधेयक का विरोध कर रहे हों, इस बैठक ने यह संदेश दिया कि सहयोग और संवाद से समाधान संभव है।

प्रियंका गांधी और प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत, नए संसद भवन में समर्पित हॉल की मांग, और सत्र की समीक्षा—इन सभी बिंदुओं ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच सौहार्दपूर्ण संवाद को महत्व दिया जाता है। सांसदों और प्रधानमंत्री के बीच यह संवाद सत्र के दौरान बनी तल्खी को कम करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूती देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

इस तरह की टी मीटिंग्स से यह स्पष्ट होता है कि लोकतंत्र केवल बहस और विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, समझौता और सहयोग के माध्यम से भी इसे सुदृढ़ बनाया जा सकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp