सिडनी के बॉन्डी बीच हमले का मामला: नवीद अकरम और कट्टरपंथी कनेक्शन
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बॉन्डी बीच पर हुए घातक हमले ने देश और दुनिया में आतंकवाद के बढ़ते खतरे को फिर से उजागर किया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने इस हमले को इस्लामिक स्टेट ISIS की विचारधारा से प्रेरित बताया। जांच में यह सामने आया कि इस हमले का आरोपी नवीद अकरम पहले स्थानीय कट्टरपंथी संगठनों जैसे स्ट्रीट दावाह मूवमेंट और अल-मदीना दावाह सेंटर से जुड़ा हुआ था।
नवीद अकरम की गतिविधियों और उसके पुराने संपर्क इस हमले के पीछे की साजिश को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऑस्ट्रेलियाई जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नवीद अकरम ने 2019 में बैंक्सटाउन में स्ट्रीट दावाह मूवमेंट के माध्यम से कुरान और पैम्फलेट्स वितरित किए थे।
कट्टरपंथी प्रचारक विस्सम हद्दाद के संपर्क में नवीद
जांच में यह भी सामने आया कि नवीद अकरम का संपर्क कट्टरपंथी प्रचारक विस्सम हद्दाद से था। हद्दाद पर नस्लवादी और यहूदी विरोधी संदेश फैलाने के आरोप हैं। हद्दाद ने बैंक्सटाउन स्थित अल-मदीना दावाह सेंटर का नेतृत्व किया, जहां युवाओं को कट्टर विचारों की ओर प्रेरित किया जाता था। नवीद अकरम कई बार हद्दाद के साथ दिखाई दिया, और सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो में उनके साथ की तस्वीरें उपलब्ध हैं।
हद्दाद का यह कहना था कि “युवा मुसलमानों को सही मार्ग पर लाना हमारा उद्देश्य है।” हालांकि इस उद्देश्य को देखकर अधिकारियों को शक था कि वह युवाओं को चरमपंथ और जिहादी गतिविधियों की ओर ले जा रहे हैं।
ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी गतिविधियां
जांच से यह भी पता चला कि स्ट्रीट दावाह मूवमेंट और अल-मदीना दावाह सेंटर ने ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री साझा की। 2019 में इस संगठन द्वारा पोस्ट किए गए कई वीडियो में ईसा मसीह और बुद्ध की मूर्तियों को तोड़ते हुए दिखाया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नवीद अकरम भी इन गतिविधियों में शामिल था।
इसके अलावा, हद्दाद ने युवाओं को आकर्षित करने के लिए मुफ्त पिज्जा वितरण जैसी रणनीति अपनाई। इससे युवाओं को सेंटर में लाया जाता और कट्टर विचारों के प्रति उनका झुकाव बढ़ाया जाता।
इस्लामिक स्टेट ISIS के साथ संबंध
ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसी ASIO के एक पूर्व अंडरकवर एजेंट ‘मार्कस’ ने बताया कि हद्दाद और नवीद अकरम वैश्विक आतंकी नेताओं के संपर्क में थे। उनका उद्देश्य ऑस्ट्रेलियाई युवाओं को जिहाद और कट्टरपंथी गतिविधियों की ओर प्रेरित करना था। जांच में यह भी पता चला कि नवीद अकरम ISIS की विचारधारा से प्रभावित था और उसने अपने भाषणों और पोस्टों में इस्लामिक स्टेट का समर्थन किया।
नवीद ने यूट्यूब वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में यहूदियों और अन्य धार्मिक समूहों के खिलाफ अपमानजनक और घृणित शब्दों का प्रयोग किया। इस प्रकार उसके कट्टरपंथी विचार युवाओं के लिए खतरनाक प्रेरणा बने।
अल-मदीना दावाह सेंटर का बयान
बॉन्डी बीच हमले के बाद अल-मदीना दावाह सेंटर ने बयान जारी किया। संगठन ने कहा कि हद्दाद अब सेंटर में किसी भूमिका में नहीं हैं। सेंटर अब नए प्रबंधन के तहत संचालित हो रहा है। संगठन ने मीडिया पर आरोप लगाया कि उन्हें और उनके नेतृत्व को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, पुराने वीडियो और पोस्ट अभी भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिनमें नवीद अकरम और हद्दाद कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देते नजर आते हैं।
भारत से नवीद और अन्य आरोपी का संबंध
जांच में यह भी सामने आया कि हमले में शामिल दूसरा आरोपी साजिद अकरम भारतीय मूल का था। साजिद अकरम हैदराबाद से ऑस्ट्रेलिया गया था। साजिद की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई, जबकि नवीद अकरम गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।
साजिद अकरम इस दौरान भारत के विभिन्न राज्यों में छह बार आया। उनके पास भारत का पासपोर्ट था। वहीं नवीद ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है और ऑस्ट्रेलिया में पैदा हुआ।
इससे पता चलता है कि ऑस्ट्रेलियाई आतंकवादियों और भारतीय मूल के कुछ लोगों के बीच भी संपर्क मौजूद था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कट्टरपंथ और जिहादी नेटवर्क सक्रिय है।
स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय जांच
ऑस्ट्रेलियाई पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगातार इस घटना की जांच कर रही हैं। उनका लक्ष्य न केवल हमलावरों को गिरफ्तार करना है, बल्कि इस तरह के आतंकवादी नेटवर्क और उनके ऑनलाइन प्रचार को भी बेनकाब करना है।
जांच में डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और फोटो का भी उपयोग किया जा रहा है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल रही है कि कैसे नवीद अकरम और अन्य कट्टरपंथी युवाओं को अपने प्रभाव में लाते थे और जिहादी गतिविधियों में शामिल करते थे।
निष्कर्ष
बॉन्डी बीच हमला यह दर्शाता है कि कैसे स्थानीय कट्टरपंथी संगठन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म युवाओं को चरमपंथ की ओर ले जा सकते हैं। नवीद अकरम का केस ऑस्ट्रेलिया में बढ़ते आतंकी खतरे, कट्टरपंथ और अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क के बारे में चेतावनी देता है।
सरकार और खुफिया एजेंसियों के अनुसार, ऐसे हमलों से निपटने के लिए सतत निगरानी, इंटरनेट और सोशल मीडिया की निगरानी, और समुदाय आधारित चेतना जरूरी है।
बॉन्डी बीच हमले के मामले में नवीद अकरम और साजिद अकरम जैसे आरोपी यह स्पष्ट करते हैं कि कट्टरपंथी विचार और आतंकवादी नेटवर्क कितनी आसानी से युवाओं को प्रभावित कर सकते हैं, और वैश्विक स्तर पर यह खतरा लगातार बढ़ रहा है।
