श्री माँ माही माताजी मेला झकनावदा का भव्य शुभारंभ फीता काटकर, आतिशबाजी और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। जानिए मेले की पूरी जानकारी, अतिथियों की उपस्थिति और आयोजन की विशेषताएँ।
- श्री माँ माही माताजी मेला झकनावदा का परिचय
- धार्मिक विधि-विधान से हुआ शुभारंभ
- श्रृंगेश्वर महादेव धाम में फीता काटकर उद्घाटन
- अतिथियों का सम्मान और स्वागत
- जनप्रतिनिधियों का संदेश
- शिक्षक हेमेन्द्र जोशी का विशेष सम्मान
- मेले का निरीक्षण और व्यवस्थाएं
- आयोजन समिति का योगदान
- मेले का सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व
- निष्कर्ष
श्री माँ माही माताजी मेला झकनावदा का भव्य शुभारंभ
श्री माँ माही माताजी मेला झकनावदा का शुभारंभ 18 दिसंबर को पूरे श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान, चल समारोह, फीता काटने की रस्म और भव्य आतिशबाजी ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

धार्मिक विधि-विधान से हुआ मेले का शुभारंभ
मेले के शुभारंभ से पूर्व स्थानीय शनि मंदिर में श्री हनुमान जी महाराज, श्री शनिदेव, श्री आकाश भैरव, भगवान महादेव एवं टनट्या मामा की प्रतिमाओं पर विधिवत पूजन एवं माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य चल समारोह निकाला गया, जो पूरे नगर में श्रद्धा और आस्था का संदेश देता हुआ मेला मैदान पहुँचा।
श्रृंगेश्वर महादेव धाम के गादीपति ने किया उद्घाटन
मेला मैदान पहुँचने पर श्रृंगेश्वर महादेव धाम के गादीपति श्री रामेश्वर गिरिजी महाराज ने विधिवत फीता काटकर श्री माँ माही माताजी मेला झकनावदा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजक समिति द्वारा भव्य आतिशबाजी की गई, जिसने उद्घाटन समारोह को यादगार बना दिया।
अतिथियों का हुआ भव्य सम्मान
आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, क्षेत्रीय सरपंचों और जनप्रतिनिधियों का साफ़ा बाँधकर, पुष्पमाला और दुपट्टा पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। माँ शारदा की तस्वीर पर पूजन कर मेले का श्रीगणेश किया गया।

महंत श्री रामेश्वर गिरिजी महाराज
- जनपद पंचायत पेटलावद अध्यक्ष रमेश सोलंकी
- जिला उपाध्यक्ष हेमंत भट्ट
- जनपद उपाध्यक्ष देवकुंवर पड़ियार
- अजजा मोर्चा जिला अध्यक्ष अजमेर सिंह भूरिया
- जिला पंचायत उपाध्यक्ष अकमाल सिंह (मालू) डामोर
- वरिष्ठ भाजपा नेता प्रदीप पालरेचा
- मेला आयोजक मनोहर सिंह सेमलिया
- श्रेणिक कोठारी, लक्ष्मण मालीवाड़, पृथ्वीराज सिंह राठौर सहित अनेक जनप्रतिनिधि
जनप्रतिनिधियों का संदेश
अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्री माँ माही माताजी मेला झकनावदा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बने, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। मेला शांति, सौहार्द और अनुशासन के साथ संपन्न हो, इस पर विशेष जोर दिया गया।
शिक्षक हेमेन्द्र जोशी का विशेष सम्मान
निश्वार्थ सेवा भाव के लिए प्रसिद्ध शिक्षक हेमेन्द्र कुमार जोशी का अतिथियों द्वारा पुष्पमाला, दुपट्टा एवं साफ़ा पहनाकर विशेष सम्मान किया गया। यह सम्मान सामाजिक सेवा के प्रति प्रेरणा का प्रतीक बना।
मेले का निरीक्षण और व्यवस्थाएं
उद्घाटन के पश्चात अतिथियों ने मेले का निरीक्षण किया और दुकानदारों, झूले एवं चकरी व्यापारियों से भेंट कर शुभकामनाएं दीं। आयोजन को सफल बनाने में राजेंद्र मिस्त्री, नारायण सोलंकी, गजेंद्रपाल सिंह राठौर सहित पूरी टीम का सराहनीय योगदान रहा।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
श्री माँ माही माताजी मेला झकनावदा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह स्थानीय व्यापार, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को भी मजबूती प्रदान करता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, श्री माँ माही माताजी मेला झकनावदा का यह पहला आयोजन ऐतिहासिक, प्रेरणादायक और अत्यंत सफल रहा। जनप्रतिनिधियों, आयोजन समिति और ग्रामीणजनों के सहयोग से यह मेला आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पहचान बने—यही सभी की शुभकामना है।
