11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण की भविष्य योजना साझा की। 2026 में नौरादेही अभयारण्य में चीते, साथ ही जंगली गैंडे और जिराफ बसाने की तैयारी।
- 11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला: भव्य आयोजन
- मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान: चीते, गैंडे और जिराफ
- नौरादेही अभयारण्य में 2026 की तैयारी
- आयुर्वेद और वन संरक्षण पर सरकार का फोकस
- लघु वनोपज संग्राहकों के लिए राहत
- 350+ आयुर्वेदिक स्टॉल बने आकर्षण
- संरक्षण और जागरूकता का प्रभावशाली मंच
11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला: मध्यप्रदेश की नई पहचान
11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला मध्यप्रदेश को वन, वन्यजीव संरक्षण और आयुर्वेद के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित इस मेले के उद्घाटन अवसर पर वन्यजीव संरक्षण की दूरदर्शी योजना साझा की।
यह 11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला 17 से 23 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है और इसकी थीम है — “समृद्ध वन, खुशहाल जन”।
मुख्यमंत्री का ऐतिहासिक ऐलान: चीते के बाद गैंडे और जिराफ
11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा और सकारात्मक ऐलान करते हुए कहा कि वर्ष 2026 में रानी दुर्गावती के नाम पर विकसित नौरादेही अभयारण्य में चीतों को पुनर्स्थापित किया जाएगा।
इतना ही नहीं, उन्होंने बताया कि भविष्य में मध्यप्रदेश में जंगली गैंडे और जिराफ लाने की योजना पर भी गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। यह योजना भारत में वन्यजीव विविधता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

नौरादेही अभयारण्य: वन्यजीव संरक्षण का नया केंद्र
11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नौरादेही अभयारण्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर का वन्यजीव केंद्र बनाया जा रहा है। यहां प्राकृतिक वातावरण, सुरक्षा व्यवस्था और वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ वन्यजीवों को सुरक्षित आवास मिलेगा।
आयुर्वेद और वन संपदा पर सरकार का विशेष फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला के दौरान भगवान धनवंतरि की पूजा-अर्चना की और विंध्या हर्बल सहित विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारत की अनमोल धरोहर है और कोरोनाकाल में आयुर्वेदिक काढ़ा पूरी दुनिया के लिए जीवनदायिनी साबित हुआ।
लघु वनोपज संग्राहकों को बड़ा लाभ
11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला में बताया गया कि—
- ट्राईफेड के माध्यम से 32 लघु वनोपजों के MSP में 25% वृद्धि
- तेंदूपत्ता समेत अन्य वनोपजों पर बोनस
- आदिवासी और वनवासी परिवारों को आर्थिक सशक्तिकरण
350+ आयुर्वेदिक स्टॉल बने मेले का आकर्षण
इस 11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला में—
-
350 से अधिक आयुर्वेदिक स्टॉल
-
80 आयुर्वेदिक डॉक्टर
-
100 से अधिक वैद्य
-
आम जनता को निःशुल्क परामर्श
आयुर्वेदिक औषधियां, वनोपज उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
मुख्यमंत्री को कार्यक्रम के दौरान रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया गया। साथ ही—
-
‘लघु वनोपज हमारी शान’ गीत का विमोचन
-
विंध्या हर्बल का नया लोगो
-
वेलनेस किट लॉन्च
निष्कर्ष
11वां अंतरराष्ट्रीय वन मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश को वन संरक्षण, वन्यजीव विविधता और आयुर्वेद के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में मजबूत कदम है। चीते के बाद गैंडे और जिराफ बसाने की योजना राज्य को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूत करेगी।
