MP विधानसभा विशेष सत्र: Vijayvargiya ने मुख्यमंत्री के सूट-बूट पर चुटकी ली, कांग्रेस ने कहा – ‘दिल की बात जुबां पर आई’
Indore/Bhopal: MP विधानसभा के 69 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया। यह विशेष सत्र राज्य की राजनीति, प्रशासन और विकास योजनाओं पर चर्चा के लिए बुलाया गया था। हालांकि सत्र में गंभीर मुद्दों पर बहस हुई, लेकिन हंसी-ठिठोली और हल्के फुल्के विवाद ने भी सुर्खियां बटोरीं। इस सत्र की सबसे चर्चित घटना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सूट-बूट पहनने और उनके कैबिनेट मंत्री Kailash Vijayvargiya की उस पर टिप्पणी रही।
सत्र की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने सरकार की उपलब्धियों, विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और भविष्य की विकास योजनाओं का विस्तृत विवरण पेश किया। इस दौरान वरिष्ठ मंत्री Kailash Vijayvargiya ने हंसी मजाक के अंदाज में कहा:
“मुख्यमंत्री जी आज सूट-बूट में आए हैं, जबकि हम मंत्री और विधायक लोग गरीबों जैसी वेश-भूषा में बैठे हैं।”
Vijayvargiya की यह टिप्पणी सदन में हंसी का कारण बनी और कई विधायकों ने ठहाके लगाए। यह हल्का-फुल्का मजाक सत्ता पक्ष के भीतर के आंतरिक समीकरणों और मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच के संवाद को भी उजागर करता प्रतीत हुआ।

कांग्रेस का जवाब:
विपक्ष ने इस टिप्पणी को तुरंत भुनाया। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने इसे भाजपा के आंतरिक समीकरणों से जोड़ते हुए कहा, “मंत्री के दिल की बात आज जुबां पर आ गई है।” उन्होंने आगे कहा कि यह बयान कहीं न कहीं यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों और विधायकों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। परमार ने कहा कि आज Kailash Vijayvargiya ने इसे सदन में स्वीकार कर लिया।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का हमला:

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विशेष सत्र में सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नीयत भी साफ होनी चाहिए।
“नेता भी है, नीति भी है, बस नीयत होनी चाहिए। हमें 2047 के सपने मत दिखाइए, 2026 तक की गारंटी दीजिए।”
सिंघार ने कहा कि सरकार को केवल घोषणाएं करने के बजाय उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की ठोस गारंटी देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की घोषणाएं और योजनाएं अक्सर औपचारिक दिखावे तक सीमित रह जाती हैं और उनका असली लाभ जनता तक नहीं पहुंचता।
मनरेगा योजना और सदन का हंगामा:
विशेष सत्र की शुरुआत से पहले ही कांग्रेस विधायकों ने मनरेगा योजना का नाम बदलने की कथित कोशिशों के विरोध में जमकर नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री गांधी जी के चरखे की बात करने वाले लोग खुद महात्मा गांधी के नाम पर चल रही योजना के महत्व को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार को गांधी के नाम और उनके योगदान से डर लगता है।
सदन में इस मुद्दे पर लंबी बहस हुई। कांग्रेस ने कहा कि मनरेगा जैसे ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी कार्यक्रम का नाम बदलकर असली मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के कदम ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार सुरक्षा पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं।
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विशेष सत्र का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलू:
विशेष सत्र के अवसर पर राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने विधानसभा परिसर में ‘विधानसभा की सात दशक की यात्रा’ विषय पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश विधानसभा के ऐतिहासिक सफर, महत्वपूर्ण संसदीय कार्य, विकासशील योजनाओं और 16वीं विधानसभा तक की उपलब्धियों को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया। यह प्रदर्शनी न केवल विधायकों और अधिकारियों के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी जानकारीपूर्ण थी।
सदन में हल्की-फुल्की टिप्पणियों के राजनीतिक अर्थ:
Kailash Vijayvargiya की टिप्पणी और कांग्रेस का उस पर तंज राज्य की राजनीतिक हलचल को दर्शाता है। यह घटना सत्ता पक्ष के आंतरिक संवाद, राजनीतिक समीकरण और विपक्ष के आक्रोश को साफ दिखाती है। इसके साथ ही यह दिखाता है कि विधानसभा केवल गंभीर नीतिगत चर्चा का मंच नहीं, बल्कि राजनीतिक खेल और हास्य-व्यंग्य का भी स्थान है।
विधानसभा के सत्र में उठे अन्य मुद्दे:
सत्र के दौरान विभिन्न विकास योजनाओं, बजट आवंटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में सरकार की नीतियों पर भी चर्चा हुई। विपक्ष ने कई ऐसे मुद्दों पर सवाल उठाए, जिन पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना पड़ा। खासकर ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण और गरीब वर्ग के कल्याण को लेकर विपक्ष ने सख्त रवैया अपनाया।
MP विधानसभा के विशेष सत्र पर विस्तृत जानकारी – https://www.aajtak.in/madhya-pradesh/story/special-session-of-mp-assembly-on-dec-17-lcln-dskc-2413374-2025-12-15
सत्र की प्रमुख विशेषताएं:
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मुख्यमंत्री का सूट-बूट पहनना और उस पर मंत्री की टिप्पणी।
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कांग्रेस के विरोध और विरोध प्रदर्शनों का आयोजन।
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मनरेगा योजना का नाम बदलने पर विवाद।
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राज्यपाल द्वारा सात दशकों की विधानसभा यात्रा प्रदर्शनी का उद्घाटन।
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विपक्ष द्वारा सरकार की नीतियों और घोषणाओं पर लगातार सवाल।
निष्कर्ष:
MP विधानसभा का यह विशेष सत्र न केवल राज्य की राजनीतिक गतिविधियों और नीतिगत चर्चा का परिचायक रहा, बल्कि राजनीतिक हलकों, हास्य-व्यंग्य और विरोध प्रदर्शन का भी प्रतीक बना। मुख्यमंत्री के पहनावे पर मंत्री की टिप्पणी और कांग्रेस का उस पर तंज दर्शाता है कि राजनीतिक संवाद केवल नीतिगत नहीं बल्कि व्यक्तिगत और सामूहिक बयानबाजी से भी प्रभावित होता है।
सत्र ने यह भी दिखाया कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं पर राजनीतिक दलों की नज़र बनी हुई है। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वह ग्रामीण विकास, रोजगार और गरीब वर्ग के कल्याण से जुड़ी नीतियों पर हमेशा सतर्क रहेगा। साथ ही विधानसभा की ऐतिहासिक प्रदर्शनी ने सदन के महत्व और उसकी 69 वर्षों की यात्रा को उजागर किया।
