1. भूमिका: पुण्य उदय का दुर्लभ अवसर
कहा जाता है कि जब जीवन में अनेक जन्मों का पुण्य उदय होता है, तभी दिगंबर जैन संतों का सान्निध्य प्राप्त होता है। आचार्य वर्धमान सागर महाराज नगर प्रवेश निवाई इसी पुण्य क्षण का जीवंत उदाहरण बना, जिसने पूरे नगर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
2. निवाई में आचार्य वर्धमान सागर महाराज नगर प्रवेश निवाई
रविवार दोपहर लगभग 1 बजे शीतकालीन प्रवास के लिए आचार्य वर्धमान सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। तीन वर्षों बाद निवाई आगमन को लेकर जैन समाज में अपार उत्साह और भावनात्मक उल्लास देखने को मिला।

3. सीमा पर भव्य अगवानी और श्रद्धालुओं का उत्साह
सुबह 8 बजे से ही टोंक जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से श्रावक निवाई की सीमा पर एकत्र होने लगे। जैन समाज की कमेटी द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों से आचार्य श्री की अगवानी की गई। जयकारों और भजनों के साथ श्रद्धालु श्री शांतिनाथ अग्रवाल मंदिर की ओर बढ़े।
4. अग्रवाल मंदिर में भावुक मिलन का दृश्य
श्री शांतिनाथ अग्रवाल मंदिर में आचार्य श्री के 26 शिष्यों ने अपने गुरु का भावभीना स्वागत किया। 28 दिनों बाद गुरु-शिष्य मिलन का दृश्य देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मंच पर विधिवत पाद प्रक्षालन किया गया, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

5. शाही शोभायात्रा का अद्भुत वर्णन
आचार्य वर्धमान सागर महाराज नगर प्रवेश निवाई को ऐतिहासिक बनाने के लिए विशाल शोभायात्रा निकाली गई:
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घोड़ों पर सवार युवक जैन ध्वज के साथ
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तीन ऐरावत हाथियों पर विशिष्ट श्रद्धालु
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जिनवाणी, आचार्य शांति सागर महाराज का चित्र
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डीजे और बैंड की मधुर भजन धुनें
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महिला मंडल और युवाओं का भक्ति नृत्य
ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वर्ग धरती पर उतर आया हो।
6. पाद प्रक्षालन और धार्मिक अनुष्ठान
पाटनी कॉम्प्लेक्स के बाहर बने मंच पर चांदी की थालियों और रजत कलशों से पाद प्रक्षालन किया गया। इस पावन क्षण को देखने जैन और जैनेतर समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
7. नगर में उमड़ा जनसैलाब
शोभायात्रा भगवान महावीर मार्ग, अहिंसा सर्किल, बड़ा बाजार होते हुए जैन नसियां स्थित संत निवास पहुंची। पूरे नगर में “आचार्य वर्धमान सागर महाराज की जय” के उद्घोष गूंजते रहे।
8. आचार्य श्री का प्रेरक संदेश
आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने कहा—
“जब नगर में दिगंबर संत आते हैं तो नगर सोना हो जाता है और जब जाते हैं तो सूना हो जाता है।”
यह संदेश श्रद्धालुओं के हृदय में गहरे उतर गया।
9. आयोजन में प्रमुख उपस्थिति
नगर पालिका अध्यक्ष दिलीप इसरानी सहित कई जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया। आयोजन को सफल बनाने में जैन समाज निवाई की सराहनीय भूमिका रही।
10. निष्कर्ष
आचार्य वर्धमान सागर महाराज नगर प्रवेश निवाई न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक एकता और श्रद्धा का महापर्व बन गया। यह दिन निवाई के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा।
✍️ प्रस्तुति:
पारस जैन “पार्श्वमणि”
पत्रकार, कोटा (राजस्थान)


