भूमिका: समाज में शांति, एकता एवं विश्वास में मीडिया की भूमिका
समाज में शांति, एकता एवं विश्वास में मीडिया की भूमिका आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। डिजिटल युग, सोशल मीडिया और तेज़ खबरों की दौड़ में मीडिया का दायित्व केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना भी है। इसी उद्देश्य के साथ इंदौर में एक राष्ट्रीय स्तर का मीडिया विमर्श आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्र प्रथम, मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता और सामाजिक जिम्मेदारी पर गहन चर्चा हुई।
भाईजी की पुण्य स्मृति और मीडिया विमर्श की पृष्ठभूमि
इंदौर के न्यू पलासिया स्थित ज्ञानशिखर, ओमशांति भवन में राजयोगी ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश ‘भाईजी’ की 10वीं पुण्य स्मृति के अवसर पर यह कार्यक्रम हुआ। विषय था— समाज में शांति, एकता एवं विश्वास में मीडिया की भूमिका। भाईजी मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता के प्रबल समर्थक थे और मीडिया में नैतिक आचार-संहिता के पक्षधर रहे।
प्रखर श्रीवास्तव: “राष्ट्र प्रथम” भाव क्यों जरूरी
डीडी न्यूज़ के वरिष्ठ सलाहकार संपादक प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि मीडिया का स्वरूप बदल चुका है और सोशल मीडिया ने इसकी दिशा तय की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गलत को उजागर करना नकारात्मकता नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना है।
उनके अनुसार, समाज में शांति, एकता एवं विश्वास में मीडिया की भूमिका तभी सार्थक होगी जब पत्रकार का पहला भाव “राष्ट्र प्रथम” होगा। आतंकवाद, व्हाइट कॉलर टेररिज़्म जैसे मुद्दों पर तथ्यात्मक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग जरूरी है।

ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी: मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता का आह्वान
इंदौर ज़ोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि आज विविधताओं से भरे समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में समाज में शांति, एकता एवं विश्वास में मीडिया की भूमिका निर्णायक हो जाती है।
उन्होंने कहा कि संवेदनशील, जिम्मेदार और सकारात्मक पत्रकारिता से ही जनमानस में भरोसा कायम किया जा सकता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन: डॉ. मानसिंह परमार
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. मानसिंह परमार ने कहा कि भाईजी ने मीडिया के लिए आचार-संहिता का निर्माण किया था। यदि पत्रकार राजयोग से जुड़ें, तो वे शांति और एकता के सशक्त वाहक बन सकते हैं।
उनके अनुसार, अच्छी खबरें भी खबर होती हैं—यही समाज में शांति, एकता एवं विश्वास में मीडिया की भूमिका का मूल मंत्र है।
वरिष्ठ संपादकों के विचार: विविध दृष्टिकोण
- अनिल कर्मा (पत्रिका): मीडिया उत्प्रेरक है, समाज स्वयं दिशा तय करता है।
- विवेक सेठ (इंदौर समाचार): पाठक अखबार की संपत्ति हैं, गिरावट चिंता का विषय है।
- कीर्ति राणा (प्रजातंत्र): सकारात्मक खबरों से समाज में आशा बढ़ती है।
- नवनीत शुक्ला (दैनिक दोपहर): पत्रकारिता मिशन से व्यवसाय बनी, इसे सुधारना होगा।
- सुदेश तिवारी (भारत एक्सप्रेस): संवाद और राष्ट्र सर्वोपरि हों।
- शक्ति सिंह परमार (स्वदेश): मीडिया–समाज पूरक हैं, संवाद बढ़े।
इन सभी विचारों का केंद्र समाज में शांति, एकता एवं विश्वास में मीडिया की भूमिका ही रहा।
राजयोग, संवेदनशीलता और मीडिया का भविष्य
कार्यक्रम में राजयोग की अनुभूति, व्यसन मुक्ति की शपथ और आत्मचिंतन पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आंतरिक शांति के बिना बाहरी शांति संभव नहीं। मीडिया कर्मी जब भीतर से संतुलित होंगे, तभी समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।
निष्कर्ष
समाज में शांति, एकता एवं विश्वास में मीडिया की भूमिका केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प है। राष्ट्र प्रथम, सत्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और संवाद—इन्हीं मूल्यों पर टिके मीडिया से ही शांत, एकजुट और भरोसेमंद समाज का निर्माण संभव है।

