Bhopal के फंदा इलाके का नाम हरिहर नगर होगा, सीएम मोहन यादव ने किया ऐलान
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal में विकास और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक परियोजनाओं का शुभारंभ शनिवार, 13 दिसंबर 2025 को किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फंदा इलाके के नामकरण को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब फंदा इलाके को “हरिहर नगर” के नाम से जाना जाएगा। यह ऐलान शासकीय महाराणा प्रताप स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया, जिसमें शहरवासियों और अधिकारियों ने भी भाग लिया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि शहर के विभिन्न इलाकों का नामकरण केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी उजागर करता है। फंदा इलाके का नाम बदलकर हरिहर नगर रखने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर की आधुनिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत दोनों को संतुलित रूप में पेश किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि नामकरण के साथ-साथ इस क्षेत्र में आधुनिक विकास कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
विक्रमादित्य द्वार का भूमिपूजन और महत्व
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य द्वार का भूमिपूजन भी किया। यह द्वार भोपाल में उज्जैन के प्रसिद्ध विक्रमादित्य द्वार की तरह ही बनाया जाएगा। यह परियोजना न केवल शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक छवि को मजबूत करेगी, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगी।
विक्रमादित्य द्वार का निर्माण इस प्रकार किया जाएगा कि यह आने वाले समय में भोपाल की पहचान का प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह द्वार केवल वास्तुकला का उदाहरण नहीं होगा, बल्कि यह आधुनिक शहर और ऐतिहासिक संस्कृति का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि द्वार का निर्माण करते समय आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला का सम्मिश्रण किया जाएगा, ताकि यह देखने में भव्य और आकर्षक लगे।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस द्वार से जुड़े क्षेत्र में सौंदर्यीकरण कार्य भी किए जाएंगे। सड़कें, लाइटिंग, हरित क्षेत्र और पैदल मार्गों को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जाएगा। यह परियोजना शहरवासियों और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षक स्थल बनेगी।
ई-बस डिपो का भूमिपूजन और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन
सीएम मोहन यादव ने फंदा में प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक ई-बस सेवा योजना के तहत अत्याधुनिक ई-बस डिपो का भी भूमिपूजन किया। यह डिपो राजधानी भोपाल में पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है।
ई-बस डिपो पूरी तरह से सोलर पावर, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, चार्जिंग स्टेशन और अन्य आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इस डिपो से 100 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा, जिससे राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण मुक्त और किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह यात्रियों को आधुनिक, आरामदायक और तेज़ परिवहन सेवा भी प्रदान करेगी।
ई-बस डिपो के निर्माण से भोपाल शहर की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह डिपो शहर के विभिन्न हिस्सों से बसों के संचालन में सुविधा देगा और आने वाले समय में यात्रियों के लिए समय की बचत भी सुनिश्चित करेगा।
अन्य विकास कार्य और स्थानीय विधायक भी मौजूद
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप, हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा, और दक्षिण-पश्चिम विधायक भगवानदास सबनानी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में शहरवासियों को विकास कार्यों की जानकारी दी गई और भविष्य में इस क्षेत्र में किए जाने वाले अन्य सुधारों के बारे में बताया गया।
सीएम ने यह भी बताया कि नामकरण और द्वार तथा ई-बस डिपो जैसी परियोजनाओं के अलावा शहर में अन्य बुनियादी ढांचे के विकास कार्य भी चल रहे हैं। इनमें सड़क निर्माण, जल निकासी, पार्क और हरित क्षेत्र का विकास, और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
Bhopal में पहले हुए नाम परिवर्तन
Bhopal में नामकरण और क्षेत्रीय पहचान बदलने की प्रक्रिया नई नहीं है। इससे पहले भी कई क्षेत्रों का नाम बदला जा चुका है। उदाहरण के लिए:
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बैरागढ़ का नाम बदलकर संत हिरदारामनगर किया गया।
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इस्लामपुर का नाम बदलकर ईश्वरपुर रखा गया।
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हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति किया गया।
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ईदगाह हिल्स का नाम बदलकर गुरुनानक टेकरी करने की मांग की गई।
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अलीराजपुर जिले का नाम आलीराजपुर कर दिया गया।
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उज्जैन और देवास के कई गांवों के नाम भी बदले गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नाम बदलने की प्रक्रिया केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि इन बदलावों से स्थानीय लोगों की भावनाओं और ऐतिहासिक गौरव की रक्षा होगी।
कार्यक्रम की विशेषताएँ और सांस्कृतिक प्रस्तुति
इस कार्यक्रम में Bhopal की सांस्कृतिक धरोहर और विकास का एक अद्भुत मिश्रण देखा गया। कार्यक्रम में बीएसएफ बैंड के द्वारा वंदे मातरम की प्रस्तुति दी गई, जिससे कार्यक्रम की भव्यता और बढ़ गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर भोपाल शहर को नई पहचान देने के लिए कई सांस्कृतिक और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम केवल एक समारोह नहीं था, बल्कि शहरवासियों को शहर के भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों से अवगत कराने का भी माध्यम था।
निष्कर्ष
भोपाल के फंदा इलाके का नाम बदलकर हरिहर नगर करना, विक्रमादित्य द्वार और ई-बस डिपो का निर्माण, और अन्य विकास परियोजनाओं का शुभारंभ यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश सरकार शहर की ऐतिहासिक पहचान और आधुनिक विकास को संतुलित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह कार्यक्रम विकास, संस्कृति और पर्यावरण के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों को जोड़ता है। इस पहल से न केवल शहरवासियों को आधुनिक और सुरक्षित परिवहन मिलेगा, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह कार्यक्रम भोपाल और पूरे मध्यप्रदेश में सरकार की “विरासत के साथ विकास” की नीति का प्रतीक बनकर उभरा है। आने वाले वर्षों में हरिहर नगर, विक्रमादित्य द्वार और ई-बस डिपो जैसी परियोजनाएँ शहर की आधुनिकता, संस्कृति और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का उदाहरण साबित होंगी।
