रायपुर जबलपुर इंटरसिटी ट्रेन का नाम श्री विद्यासागर एक्सप्रेस रखा जाए—जैन समाज की यह प्रमुख मांग राज्यसभा में भी उठाई गई। सांसद माया जी ने रेल मंत्री से नामकरण का प्रस्ताव रखा, समाज में खुशी की लहर।
रायपुर जबलपुर इंटरसिटी ट्रेन का नाम श्री विद्यासागर एक्सप्रेस रखा जाए—जैन समाज की यही मांग आज मध्य भारत में प्रमुख चर्चा का विषय बन चुकी है। नव संचालित जबलपुर–रायपुर इंटरसिटी ट्रेन के नामकरण को लेकर धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि यह सिर्फ एक ट्रेन का नाम नहीं, बल्कि श्रृमण संस्कृति, अहिंसा और तप की अनूठी परंपरा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जबलपुर–रायपुर रूट पर नई इंटरसिटी ट्रेन को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के नाम पर “श्री विद्यासागर एक्सप्रेस” या क्षेत्रीय पहचान को दर्शाने वाले नाम “मूकमाटी एक्सप्रेस” से संचालित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह नाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी इस क्षेत्र की पहचान को दृढ़ बनाता है।
दद्दू ने बताया कि इस मांग को न सिर्फ स्थानीय जैन समाज बल्कि रायपुर–जबलपुर के हजारों नागरिकों का समर्थन प्राप्त हुआ है। इस विषय को आगे बढ़ाते हुए राज्यसभा सांसद माया जी (बीजेपी) ने संसद के पटल पर यह प्रस्ताव मजबूती के साथ रखा। उन्होंने रेल मंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि जैन समाज की यह भावना अत्यंत पवित्र व ऐतिहासिक है और इसे सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाना चाहिए।
सांसद माया जी ने राज्यसभा में स्पष्ट रूप से कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी का जीवन भारतीय आध्यात्मिक विरासत का अप्रतिम उदाहरण है। उनके आदर्शों से प्रभावित होकर देशभर में करोड़ों लोग शांति, सदाचार और संयम के मार्ग पर चलते हैं। ऐसे महान संत के नाम पर ट्रेन का नामकरण होना उनकी विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
राजेश जैन दद्दू ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि भारत वर्षीय जैन समाज लंबे समय से इस प्रस्ताव की प्रतीक्षा कर रहा था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रेल मंत्रालय इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ जैन समाज की अपेक्षा नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों यात्रियों की भावनात्मक मांग है।
उन्होंने आगे कहा कि जबलपुर–रायपुर मार्ग पर प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं, और यदि ट्रेन का नाम “श्री विद्यासागर एक्सप्रेस” रखा जाता है तो यात्रियों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव और अधिक मजबूत होगा।
दद्दू ने यह भी बताया कि इस मांग को लेकर सोशल मीडिया पर भी बड़ा अभियान शुरू हुआ है, जिसमें सैकड़ों लोग हैशटैग के माध्यम से समर्थन कर रहे हैं। जैन समाज और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि नामकरण से उस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन भी बढ़ेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि यह फैसला जल्द आने वाला है और जबलपुर–रायपुर इंटरसिटी ट्रेन का नाम आधिकारिक रूप से “श्री विद्यासागर एक्सप्रेस” घोषित किया जाएगा। यह निर्णय समाज की आस्था को सम्मान देगा और राष्ट्र में श्रृमण संस्कृति के संदेश को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अंत में, रायपुर जबलपुर इंटरसिटी ट्रेन का नाम श्री विद्यासागर एक्सप्रेस रखा जाए—इस मांग ने पूरे क्षेत्र में एक नई ऊर्जा और आशा जगाई है। अब नज़रें रेल मंत्रालय पर टिकी हैं कि इस सांस्कृतिक और धार्मिक भावना को कब सम्मान मिलता है।

