अवार्ड पारित 200 करोड़ की जमीन पर बसी अवैध कॉलोनी की रजिस्ट्रियां होंगी शून्य | सुखलिया साईंनाथ पैलेस कॉलोनी इंदौर बड़ा एक्शन
इंदौर में अवैध कॉलोनियों पर बड़ी कार्रवाई—200 करोड़ की जमीन पर बने 40 से अधिक मकानों की रजिस्ट्रियां होंगी शून्य
इंदौर। शहर में अवैध कॉलोनियों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन पहली बार प्राधिकरण ने इतना बड़ा कदम उठाते हुए अवार्ड पारित और योजना में शामिल 200 करोड़ रुपए की जमीन पर विकसित की गई अवैध कॉलोनी ‘साईंनाथ पैलेस’ को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद न केवल यहां हुए सभी क्रय-विक्रय शून्य माने जाएंगे, बल्कि निर्मित पक्के मकानों को भी ध्वस्त किया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वर्षों पहले यह जमीन विधिवत अर्जित कर ली गई थी, तो प्राधिकरण इतने लंबे समय तक सोया क्यों रहा? आखिर कैसे नोटरी के आधार पर भूखंड बिकते रहे, रजिस्ट्री होती रही और 30–40 पक्के मकान भी खड़े हो गए?
अवैध कॉलोनी कट गई, प्लॉट बिक गए और प्राधिकरण को कई साल बाद जाग आई
सुखलिया स्थित योजना 139 की यह बेशकीमती जमीन लंबे समय से राजनीतिक संरक्षण में अवैध कॉलोनी में तब्दील की जा रही थी।
0.793 हेक्टेयर (लगभग 80,000 वर्गफुट) जमीन पर कॉलोनाइज़र ने बिना किसी अनुमति के ‘साईंनाथ पैलेस’ नाम से कॉलोनी काट दी।
- नोटरी पर भूखंड बेचे गए
- कई खरीदारों ने पक्के मकान बना लिए
- 40 से अधिक मकान पूरी तरह निर्मित हो चुके
- कई रजिस्ट्री भी की जा चुकी
जब यह पूरा क्षेत्र घनी बसावट में तब्दील हो चुका, तब जाकर प्राधिकरण हरकत में आया। कुछ दिन पहले निगम की सहायता से 4 अवैध मकानों को तोड़ा गया और प्राधिकरण ने अपनी जमीन होने के बोर्ड भी लगा दिए।
अधिकारी की स्पष्ट घोषणा—यह जमीन योजना 139 में अवार्ड पारित, यहां का हर निर्माण अवैध
प्राधिकरण के भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा ने जाहिर सूचना जारी कर यह साफ कर दिया है कि:
- सुखलिया खसरा नंबर 425/1 पार्ट और 425/2 पार्ट की जमीन
- योजना 139 में विधिवत शामिल है
- यह भूमि अवार्ड पारित होकर प्राधिकरण के नाम है
- इस पर किसी भी तरह का निर्माण, क्रय-विक्रय, रजिस्ट्री—सभी अवैध हैं
- ऐसे सभी दस्तावेज शून्य घोषित किए जाएंगे
प्राधिकरण अब इस मामले को लेकर कोर्ट में वाद दायर करने जा रहा है ताकि नोटरी पर की गई रजिस्ट्री भी रद्द की जा सके।
कैसे बन गई अवैध कॉलोनी?—राजनीतिक संरक्षण और ढीला प्रशासन
यह कोई पहला मामला नहीं है जब अवैध कॉलोनी राजनीतिक दबाव में फलती-फूलती रही हो।
शिकायतें कई बार की गईं, मगर:
- प्राधिकरण ने एफआईआर दर्ज नहीं करवाई
- न तो कॉलोनाइज़र पर प्रकरण बना
- न ही समय रहते निर्माण रोके गए
- निगम और पुलिस प्रशासन भी खामोश रहे
चौंकाने वाली बात यह है कि प्राधिकरण के अध्यक्ष स्वयं संभागायुक्त, संचालक कलेक्टर और सदस्य के रूप में निगमायुक्त जैसे बड़े अधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से बचाने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा।
शिकायतकर्ता लगातार दे रहे थे सूचना, फिर भी कार्रवाई नहीं
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता लोकेश हार्डिया ने कई बार भूमाफियाओं द्वारा अवैध कॉलोनी काटे जाने की शिकायत दर्ज कराई।
कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने भी नगर निगम एवं प्राधिकरण दोनों को शिकायतें भेजीं।
लेकिन शिकायतों पर तत्काल अमल करने की बजाय फाइलें वर्षों तक दबाए रखी गईं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलोनी काटने वालों को भाजपा से जुड़े बड़े नेताओं का संरक्षण मिला हुआ था, जिसके कारण प्रशासन निर्णायक कार्रवाई नहीं कर पाया।
नोटरी पर बिके प्लॉट, रजिस्ट्री हुई और अब बुलडोज़र चलेंगे
साईंनाथ पैलेस अवैध कॉलोनी में:
- प्लॉट नोटरी के आधार पर बेचे गए
- कई खरीदारों ने इसे वैध मानकर रजिस्ट्री भी करवा ली
- कई जगह पक्के मकान बन गए
- अब इन घरों पर भी बुलडोज़र चलने की तैयारी
प्राधिकरण ने पंजीयन विभाग से इन सभी रजिस्ट्री दस्तावेजों की विस्तृत जानकारी मांगी है।
जिन जमीनों पर अभी निर्माण नहीं हुआ, वहाँ पर अधिकार क्षेत्र दर्शाने वाले बोर्ड लगा दिए गए हैं।
प्राधिकरण की देरी का भारी नुकसान—लाखों खर्च कर बने मकान अब मलबे में बदलेंगे
यह जमीन लगभग 200 करोड़ रुपए कीमत की बताई जा रही है।
खरीदारों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन है क्योंकि:
- उन्होंने यह जमीन वैध समझकर खरीदी
- करोड़ों रुपए मकान बनाने में लगाए
- अब पूरा निर्माण अवैध घोषित कर ध्वस्त किया जा सकेगा
- रजिस्ट्री भी शून्य होगी, मतलब कोई वैधानिक हक नहीं बचेगा
यह सवाल अब भी बना हुआ है कि जब अवार्ड पारित जमीन पर पहली बार प्लॉट बेचे जा रहे थे, तब रोक क्यों नहीं लगी?
प्राधिकरण की आगामी कार्रवाई—सभी अवैध मकान हटाए जाएंगे
अधिकारियों के अनुसार:
- पहले 4 मकान तोड़े जा चुके
- शेष निर्माणों को हटाने की तैयारी
- पंजीयन विभाग से दस्तावेज मंगाए गए
- कोर्ट में वाद दायर कर सभी रजिस्ट्री शून्य करवाई जाएंगी
- भूमाफियाओं पर भी कार्रवाई की संभावना
सुखलिया वार्ड 22, ज़ोन 5 में स्थित यह कॉलोनी अब पूरी तरह जांच के दायरे में है।
यह केवल अवैध कॉलोनी का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का उदाहरण है
यह प्रकरण इंदौर में अवैध कॉलोनियों की बढ़ती समस्या और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है।
यदि शुरुआत में ही कार्रवाई हो जाती, तो न खरीदार ठगे जाते, न सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा होता।
अब जबकि प्राधिकरण नींद से जागा है, सवाल यह भी है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था बनेगी?
निष्कर्ष—अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई का संदेश, मगर देर से उठे कदम का खामियाज़ा झेलेंगे निर्दोष खरीदार
साईंनाथ पैलेस कॉलोनी पर कार्रवाई इंदौर शहर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कड़ा संदेश है।
लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को होगा, जिन्होंने नोटरी और रजिस्ट्री के आधार पर जमीन खरीदी और मकान बनाए।
अब उनके मकान ढहेंगे और रजिस्ट्री भी अमान्य हो जाएगी।
इसलिए भविष्य में खरीदारों को प्राधिकरण और नगर निगम से NOC व वैधता प्रमाणपत्र की जांच ज़रूर करनी चाहिए।
