नई दिल्ली/रायपुर। नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को सोमवार को ऐतिहासिक सफलता मिली है। कुख्यात नक्सली कमांडर और सेंट्रल कमेटी सदस्य रामधेर मज्जी ने अपने 11 साथियों के साथ छत्तीसगढ़ के बकरकट्टा में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। मज्जी को नक्सली नेता हिडमा का समकक्ष माना जाता था और उस पर 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस बड़े सरेंडर के बाद एमएमसी ज़ोन (महाराष्ट्र–मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़) को आधिकारिक रूप से नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है, जो इन राज्यों में नक्सल उन्मूलन अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।
सरेंडर करने वालों में रामधेर मज्जी के अलावा तीन डिविजनल वाइस कमांडर और अन्य महत्वपूर्ण कैडर शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने इनके पास से एके-47, कार्बाइन, इंसास, .303 रायफल और एसएलआर जैसे हथियारों का बड़ा जखीरा भी बरामद किया है। सभी नक्सलियों ने राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण किया है, जिसके तहत उन्हें आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्स्थापन प्रदान किया जाएगा।

बालाघाट जिला अब हुआ नक्सल मुक्त :
मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला, जो 1990 के दशक से सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है, अब पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित किया गया है। यह उपलब्धि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तय मार्च 2026 की समय सीमा से पहले हासिल हुई है। बकरकट्टा थाना क्षेत्र में हुए इस सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने अपने सभी हथियार भी सुरक्षा बलों को सौंप दिए।
जिले में अब सिर्फ एक नक्सली सक्रिय :
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि नक्सलियों ने सरकार की “पुनर्वास से पुनर्जीवन” नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है। वर्तमान में जिले में केवल एक नक्सली दीपक सक्रिय है, जिसके भी जल्द सरेंडर करने की संभावना जताई जा रही है।
11 दिन में 33 माओवादी आत्मसमर्पण :
पिछले 11 दिनों में 33 माओवादी—दरेकसा और केबी डिविजन से—सरेंडर कर चुके हैं। सोमवार को हुए 12 आत्मसमर्पणों के बाद मध्य प्रदेश, विशेषकर बालाघाट में, नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है। पुलिस का दावा है कि लाल आतंक अब खत्म होने की कगार पर है।
