दिल्ली से मस्कट-अम्मान: PM मोदी की यात्रा से खुलेगा नौकरी और निवेश का रास्ता? जानिए पूरी डिटेल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के मैदान में भारत की स्ट्रेटेजिक ताकत को रेखांकित करने जा रहे हैं। खबरों के मुताबिक, पीएम मोदी इसी महीने ओमान और जॉर्डन की महत्वपूर्ण यात्रा पर जा सकते हैं। यह सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में भारत के ‘मिशन मजबूती’ का एक बड़ा ब्लूप्रिंट सामने लाने वाला है। इस यात्रा का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, निवेश के नए रास्तों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों पर पड़ सकता है।
ओमान के साथ CEPA समझौता: नौकरी और व्यापार के नए द्वार
इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण ओमान के साथ होने वाला ‘कॉम्प्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ (CEPA) है। पिछले कई महीनों से इस व्यापक आर्थिक समझौते पर चर्चा चल रही है और पीएम मोदी की यात्रा के दौरान इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।
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नौकरियों का नया रास्ता: CEPA लागू होने से दोनों देशों के बीच टैरिफ कम होंगे और व्यापार बढ़ेगा। इससे भारतीय कंपनियों, खासकर MSME सेक्टर को ओमान के बाजार में निर्यात बढ़ाने में आसानी होगी। ज्यादा निर्यात का मतलब है भारत में उत्पादन बढ़ना, और उत्पादन बढ़ने से नई नौकरियों का सृजन होना।
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निवेश के अवसर: ओमान खाड़ी देशों में एक अहम कड़ी है। यह समझौता भारत के लिए न सिर्फ ओमान, बल्कि पूरे गल्फ रीजन में निवेश आकर्षित करने का रास्ता खोलेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ सकता है।
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भारतीय सामान होगा सस्ता: समझौते के बाद ओमान को भारतीय कृषि उत्पाद, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो पार्ट्स जैसी चीजों का निर्यात बढ़ेगा। साथ ही, भारत को ओमान से पेट्रोकेमिकल उत्पाद आदि आयात करने में भी फायदा होगा।
जॉर्डन यात्रा का महत्व: स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और सुरक्षा सहयोग
जॉर्डन की यात्रा भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। जॉर्डन मध्य-पूर्व में एक स्थिर और महत्वपूर्ण देश है। इस यात्रा के जरिए:
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सुरक्षा और रक्षा सहयोग को नई गति मिल सकती है। दोनों देश आतंकवाद जैसी समस्याओं से मिलकर निपटने पर चर्चा कर सकते हैं।
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फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में सहयोग बढ़ाने की काफी संभावना है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत जो भूमिका निभाई, उससे प्रभावित देशों में जॉर्डन भी शामिल है।
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पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। जॉर्डन में भारतीय पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है और छात्रों के लिए शैक्षणिक संभावनाएं बन सकती हैं।
जनवरी 2025: दिल्ली में अरब विदेश मंत्रियों का महासम्मेलन
पीएम मोदी की इस यात्रा को एक और बड़े इवेंट की ‘ग्राउंडवर्क’ यानी नींव तैयार करने वाली यात्रा के तौर पर देखा जा रहा है। भारत सरकार जनवरी 2025 में अरब लीग के विदेश मंत्रियों के एक बड़े सम्मेलन की मेजबानी करने जा रही है। यह भारत की विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि होगी।
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सीरिया का शामिल होना: इस बैठक में सीरिया के विदेश मंत्री के शामिल होने की संभावना है, जो एक बहुत बड़ा संदेश है। भारत ने सीरिया संकट के दौरान मानवीय सहायता भेजकर और संवाद बनाए रखकर अपनी संतुलित और दूरदर्शी विदेश नीति का परिचय दिया है। यह कदम भारत को पूरे क्षेत्र में एक विश्वसनीय और तटस्थ मध्यस्थ के रूप में स्थापित करेगा।
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रणनीतिक साझीदार के रूप में भारत: इस सम्मेलन के जरिए भारत पूरे अरब जगत के सामने यह साबित करेगा कि अब वह सिर्फ कच्चे तेल का खरीदार नहीं, बल्कि एक समान विचारों वाला रणनीतिक साझीदार है। टेक्नोलॉजी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेस, रिन्यूएबल एनर्जी और फूड सिक्योरिटी जैसे मुद्दों पर भारत का नेतृत्व अहम होगा।
निष्कर्ष: भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?
पीएम मोदी की ओमान और जॉर्डन यात्रा तीन स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण है:
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आर्थिक स्तर: CEPA जैसे समझौते भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देंगे, निवेश लाएंगे और रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ को वैश्विक साझेदारी से जोड़ने का रास्ता है।
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राजनीतिक-सामरिक स्तर: यह यात्रा भारत की ‘मिडिल ईस्ट पॉलिसी’ को और मजबूती देगी। क्षेत्र में शांति और स्थिरता में भारत की भूमिका बढ़ेगी, जिससे देश की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को भी फायदा होगा।
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सॉफ्ट पावर स्तर: अरब देशों के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को नए आयाम मिलेंगे। शिक्षा, पर्यटन और लोगों-से-लोगों के बीच संपर्क बढ़ेंगे।
संक्षेप में कहें तो, यह यात्रा सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि हर भारतीय की आर्थिक बेहतरी और देश के भविष्य से जुड़ी है। यह पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती दखल का एक और सबूत है, जहां अब हम सिर्फ बात नहीं, बल्कि मूर्त रणनीतिक और आर्थिक फायदे लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
