मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र 2025 के अंतिम दिन (5 दिसंबर) में सिंगरौली में 6 लाख पेड़ों की अवैध कटाई को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के विधायकों के बीच सदन में जोरदार बहस हुई। प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी नेता उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए और सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि क्यों सिंगरौली इलाके को 2023 के बाद पांचवीं अनुसूची से हटाया गया और पेड़ काटे जा रहे हैं।
वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने जवाब में कहा कि पेड़ कटाई सभी नियमों के अनुसार की जा रही है। उन्होंने बताया कि ग्राम और ब्लॉक एरिया पेसा एक्ट के दायरे में नहीं आता, इसलिए अनुमति दी गई। वहीं कांग्रेस के अन्य विधायकों ने आरोप लगाया कि अडाणी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए सिंगरौली से पेड़ काटे जा रहे हैं और इसे न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने वन मंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने पहली बार विधायक होते हुए सही जवाब दिया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में विधानसभा सत्र के समय शादियों के मुहूर्त को ध्यान में रखा जाए, ताकि विधायकों को अपने क्षेत्रों में शादियों में भाग लेने में कोई समस्या न हो।

इस दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि प्रदेश में कोई ऐसी सड़क नहीं है, जहां लोगों की जान जा रही हो। कांग्रेस और बीजेपी के बीच पेड़ कटाई को लेकर तीखी बहस के बाद विपक्षी दल ने सदन से वॉकआउट किया।
स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने इस पूरे मामले पर नेता प्रतिपक्ष से अलग बैठक करने और वन मंत्री से उत्तर लेने का निर्देश दिया। यह घटना प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण, औद्योगिक विकास और विधायकों की पारस्परिक राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखने की जटिलता को उजागर करती है।
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सिंगरौली में 6 लाख पेड़ों की कटाई का मुद्दा
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कांग्रेस और बीजेपी के बीच सदन में हंगामा
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वन राज्य मंत्री ने कहा – सभी नियमों के अनुसार कार्य
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संसदीय कार्य मंत्री ने वन मंत्री का समर्थन किया
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विपक्षी दल ने वॉकआउट किया
