इंदौर में मध्य प्रदेश के IAS अधिकारी संतोष वर्मा के कथित विवादित बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ा दी है। स्थानीय अदालत ने मामले में दर्ज शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तुकोगंज पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को 20 जनवरी तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई भी इसी तारीख को निर्धारित की गई है।
शिकायत में क्या कहा गया
शिकायत स्थानीय वकील शैलेन्द्र द्विवेदी द्वारा दर्ज कराई गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि संतोष वर्मा ने ब्राह्मण समाज के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। वकील का कहना है कि भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी ने ब्राह्मण समुदाय की बेटियों को लेकर अभद्र टिप्पणी की, जिससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ने का खतरा पैदा हुआ। शिकायत के बावजूद तुकोगंज थाने ने तुरंत मामला दर्ज नहीं किया, जिसके कारण अदालत की शरण ली गई।
आईएएस वर्मा का जवाब

बढ़ते विवाद के बाद संतोष वर्मा ने सफाई दी कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उनका कोई भी उद्देश्य किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं था। उन्होंने कहा, “यदि किसी को दुख पहुंचा है तो मैं खेद प्रकट करता हूँ।” मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिससे विवाद और बढ़ गया।
अजाक्स अधिवेशन और विवादित बयान
इस विवाद की शुरुआत अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन (23 नवंबर) में हुई थी। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान ना करे या उसके साथ संबंध ना बनाए, तब तक आरक्षण मिलना चाहिए।” उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात करते हुए कहा कि पिछड़ेपन की वजह से आरक्षण की पात्रता तब तक बनी रहनी चाहिए जब तक रोटी-बेटी का व्यवहार पूरा नहीं होता।
राज्य का सामान्य प्रशासन विभाग भी इस मामले में सक्रिय है और 26 नवंबर को अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अब अदालत और प्रशासन दोनों ही इस मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।
