Indore Revenue Department Action News: महू के 3 पटवारियों पर कलेक्टर शिवम वर्मा की बड़ी कार्रवाई, राजस्व लापरवाही पर तत्काल निलंबन
इंदौर: राजस्व मामलों में लापरवाही पर कलेक्टर का सख्त एक्शन, महू के 3 पटवारी निलंबित
इंदौर।
इंदौर जिला प्रशासन ने राजस्व कार्यों में लापरवाही और गंभीर अनियमितताओं को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए महू (डॉ. भीमराव अंबेडकर नगर) तहसील के तीन पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि राजस्व प्रकरणों के समय पर, पारदर्शी और जिम्मेदार निपटान में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निलंबित किए गए पटवारियों के नाम—
- आशीष कटारे
- अनिता चौहान
- मेघा शर्मा
प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, इन कर्मचारियों पर अपने क्षेत्र में राजस्व मामलों के निराकरण में गंभीर लापरवाही और अनियमितताएँ सामने आई थीं, जिसके बाद कलेक्टर ने कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि—ग्राम सांतेर (रसलपुरा) का विवाद
यह कार्रवाई महू तहसील के ग्राम सांतेर (रसलपुरा) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले के बाद की गई है। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि खसरा नंबर 68/1 और 69/1 से संबंधित एक राजस्व प्रकरण में पटवारियों द्वारा—
- दस्तावेज़ी त्रुटियाँ,
- राजस्व मानचित्र में विसंगतियाँ,
- समय पर रिपोर्ट न देना,
- और जांच में सहयोग न करने
जैसी गंभीर अनियमितताएँ पाई गईं।
राजस्व विभाग ने जब इस मामले की जांच की, तो पाया गया कि संबंधित पटवारियों ने न केवल नियमों का उल्लंघन किया बल्कि प्रशासन को गुमराह करने की भी कोशिश की। जांच रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद इसे अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल निलंबन का निर्णय लिया गया।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने दिया स्पष्ट संदेश—राजस्व विभाग में ढिलाई बर्दाश्त नहीं
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने अपने आदेश में जोर देते हुए कहा कि—
“राजस्व कार्य सार्वजनिक हित से सीधे जुड़े होते हैं। भू-अभिलेख, नामांतरण, सीमांकन, खसरा-खतौनी जैसे कार्यों में त्रुटि पूरे प्रशासनिक ढाँचे को प्रभावित करती है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा शासकीय कार्य में लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।”
इस कार्रवाई से प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में भी यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने कर्तव्य में कोताही बरतता पाया गया तो उसके खिलाफ भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।निलंबन अवधि में देपालपुर रहेगा मुख्यालय
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन के दौरान तीनों पटवारियों का मुख्यालय देपालपुर तहसील कार्यालय निर्धारित किया गया है। निलंबित कर्मचारी इस अवधि में—
- देपालपुर तहसील कार्यालय में नियमित उपस्थिति दर्ज करेंगे
- विभागीय जांच में सहयोग करेंगे
- कोई फील्ड कार्य नहीं करेंगे
- किसी प्रकार के राजस्व रिकॉर्ड संचालन का कार्य नहीं संभालेंगे
यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पूरी हो।
राजस्व विभाग में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कलेक्टर सक्रिय
पिछले कुछ महीनों में जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों से—
- नामांतरण में देरी
- सीमांकन प्रक्रियाओं का लंबा खिंच जाना
- खसरे-खतौनी में बदलाव
- प्रकरणों में पारदर्शिता की कमी
जैसी शिकायतें प्रशासन तक पहुँच रही थीं। विशेष रूप से महू तहसील में कई प्रकरणों के लंबित होने की जानकारी मिलने पर कलेक्टर ने पूरे राजस्व विभाग में औचक समीक्षा की थी।
इसी समीक्षा के दौरान ग्राम सांतेर (रसलपुरा) के उक्त प्रकरण में गंभीर अनियमितताएँ मिलीं और कार्रवाई की गई।
ग्राम सांतेर प्रकरण क्यों है महत्वपूर्ण?
ग्राम सांतेर का यह भूमि प्रकरण पिछले कुछ समय से विवाद का केंद्र रहा है क्योंकि—
- भूमि के दावेदार दो समूहों में बंटे हुए थे।
- राजस्व रिकॉर्ड में खसरा 68/1 और 69/1 को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।
- सीमांकन रिपोर्ट में कई विसंगतियाँ सामने आई थीं।
- स्थानीय लोगों ने पटवारियों पर पक्षपात के आरोप लगाए थे।
प्रशासन ने जब मामले की गहराई से जांच की, तो पाया कि पटवारियों ने समय पर आवश्यक प्रमाण, पंचनामा और सीमांकन रिपोर्ट जमा नहीं की थी।
प्रशासन का उद्देश्य—पारदर्शी राजस्व व्यवस्था
इंदौर प्रशासन लंबे समय से राजस्व विभाग को—
- पारदर्शी
- जवाबदेह
- और जनता-हितैषी
- बनाने की दिशा में काम कर रहा है। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा के नेतृत्व में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं जिससे—
- लंबित प्रकरणों को तेजी से निपटाया जाए
- राजस्व कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो
- अतिक्रमण रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जाए
- डिजिटल रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित हो
महू के तीन पटवारियों के निलंबन को इसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई के बाद ग्राम सांतेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने राहत की भावना जताई है। ग्रामीणों ने कहा कि—
- लंबे समय से भूमि प्रकरण में अटकाव था
- पटवारियों से सही जानकारी मिलना कठिन हो गया था
- सीमांकन रिपोर्ट बार-बार बदल रही थी
कई ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अब मामले का निष्पक्ष समाधान संभव होगा।
क्या आगे और कार्रवाई होगी?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राजस्व विभाग की जांच अभी जारी है। यदि आगे भी—
- और कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं
- या अन्य प्रकरणों में गंभीर विसंगतियाँ मिलती हैं
तो कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
कलेक्टर ने तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और राजस्व निरीक्षकों को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकरण में देरी या अनियमितता पाए जाने पर तुरंत रिपोर्ट भेजें।
निष्कर्ष—इंदौर प्रशासन का संदेश स्पष्ट
महू में तीन पटवारियों के निलंबन से जिला प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि—
- राजस्व मामलों में कोई समझौता नहीं होगा।
- लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई होगी।
- जनता से जुड़े भूमि विवादों के समाधान में तेजी और पारदर्शिता सर्वोपरि है।
इंदौर जिला प्रशासन ने अपने सख्त रुख से यह संदेश दिया है कि सरकारी कार्यों में पेशेवर ईमानदारी और त्वरित सेवा ही प्राथमिकता है, और कोई भी कर्मचारी इससे हटता है तो कठोर कार्रवाई तय है।
