इस्कॉन इंदौर में गीता दान महायज्ञ एवं तुलादान महोत्सव का भव्य आयोजन: गीता जयंती व मोक्षदा एकादशी पर 700 श्लोकों की आहुति, 150+ भक्तों की उपस्थिति
इंदौर।
इस्कॉन इंदौर, श्री श्री राधा-गोविंद मंदिर एवं श्री श्री जगन्नाथ मंदिर द्वारा गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी के पावन अवसर पर भव्य गीता दान महायज्ञ एवं तुलादान महोत्सव का आयोजन अत्यंत उत्साह और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह दिव्य महोत्सव 1 दिसंबर 2025 (मोक्षदा एकादशी) के शुभ दिन परमपूज्य महामन महाराज जी के दिव्य नेतृत्व में वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न हुआ।
इस आयोजन ने न केवल भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण किया, बल्कि मानव समाज को श्रीमद्भगवद्गीता के शाश्वत संदेश को अपनाने की प्रेरणा भी दी।
गीता जयंती: दिव्य ज्ञान का प्राकट्य दिवस
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
यह दिव्य उपदेश केवल अर्जुन के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए कर्म, भक्ति और ज्ञान के समन्वय का मार्गदर्शक है। गीता जयंती का दिन वह क्षण है जब विश्व का यह महान ग्रंथ प्रकट हुआ और मानव जाति को सत्य, धर्म एवं कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली।
मोक्षदा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
मोक्षदा एकादशी को शास्त्रों में अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना गया है। इस दिन व्रत, जप, ध्यान, उपवास और भगवद्भक्ति के माध्यम से व्यक्ति को पापों से मुक्ति तथा मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
इस्कॉन इंदौर द्वारा इस तिथि पर आयोजित महायज्ञ का उद्देश्य भक्तों को आध्यात्मिक साधना के माध्यम से आत्मिक शुद्धि और भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में पूर्ण समर्पण की प्रेरणा देना था।
विश्व की दूसरी सबसे बड़ी गीता के समक्ष दिव्य महायज्ञ
इस वर्ष के महायज्ञ की विशेषता यह रही कि यह आयोजन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भगवद्गीता के समक्ष किया गया।
यज्ञशाला में वैदिक आचार्यों के निर्देशन में 700 श्लोकों की आहुति वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अर्पित की गई।
करीब 3 घंटे से अधिक समय तक निरंतर चलने वाले इस दिव्य यज्ञ में ऊर्जा, श्रद्धा और भक्तिभाव का अद्भुत संगम देखने को मिला।
21 से अधिक परिवारों की सहभागिता, 150+ भक्त हुए शामिल
महायज्ञ में 21 से अधिक परिवारों ने सक्रिय भागीदारी की।
इस्कॉन परिसर में जुटे 150 से अधिक भक्तों ने मंत्रोच्चार, आहुति, कीर्तन और तुलादान में भाग लेकर दिव्य आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया।
समस्त भक्तों में अपार उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली।
महायज्ञ का उद्देश्य: कलियुग में आध्यात्मिक चेतना का पुनर्जागरण
आयोजन समिति ने स्पष्ट किया कि इस महायज्ञ का सबसे बड़ा उद्देश्य कलियुग में मनुष्य को आध्यात्मिक जागरण की ओर प्रेरित करना है।
आधुनिक जीवन में बढ़ती भौतिकता, तनाव, आत्महत्या, हिंसा और अपराध जैसे सामाजिक संकटों का मूल कारण भगवान से दूर होना है।
श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित दिव्य संदेश—
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मनुष्य को कर्तव्यपथ पर चलने की प्रेरणा देता है
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जीवन में भक्ति, अनुशासन और ज्ञान का समन्वय स्थापित करता है
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मन को शांति और जीवन को दिशा प्रदान करता है
इसी संदेश को जन-जन तक पहुँचाने हेतु यह गीता दान महायज्ञ आयोजित किया गया।
पुजारी के रूप में केशव भक्त दास जी की उपस्थिति
पूरे कार्यक्रम में यज्ञ की वेदिक विधियाँ केशव भक्त दास जी के निर्देशन में सम्पन्न हुईं।
उन्होंने गीता के श्लोकों की महत्ता और कलियुग में गीता-ज्ञान के प्रभाव को विस्तार से व्याख्यायित किया।
कीर्तन मेला बना कार्यक्रम का आकर्षण
यज्ञ के दौरान नृत्य-भक्ति और संकीर्तन की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विशेष कीर्तन मेला का आयोजन किया गया।
भक्तों ने घंटों तक हरिनाम-संकीर्तन करते हुए दिव्य आनंद की अनुभूति प्राप्त की।
कीर्तन मेला बच्चों, युवाओं और वरिष्ठों—सभी के लिए प्रेरणादायी क्षण बन गया।
तुलादान महोत्सव: बच्चों से बुजुर्गों तक सभी ने किया गीता दान
तुलादान इस आयोजन की विशेष आकर्षण रहा।
भक्तों ने अपने शरीर के वजन के बराबर भगवद्गीता का दान करके इस परंपरा को जीवंत किया।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक तुलादान में सहभागिता कर गीता-ज्ञान प्रसार के संकल्प को दृढ़ किया।
इस्कॉन के सेवा कार्यों के लिए यह दान महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस्कॉन गुरुकुल के 40 से अधिक छात्रों ने किए 700 श्लोकों का उच्चारण
इस महायज्ञ की सबसे प्रेरणादायक झलक तब देखने को मिली जब इस्कॉन गुरुकुल के 40 से अधिक बाल-भक्तों ने पुजारी के साथ मिलकर समस्त 700 श्लोकों का शुद्ध उच्चारण किया।
उनका एक-सुर में गूंजता गीता पाठ पूरे परिसर में दिव्य स्पंदन उत्पन्न कर रहा था।
परिक्रमा एवं यज्ञशाला दर्शन
श्लोक-आहुति के पश्चात भक्तों ने यज्ञशाला की कीर्तन के साथ परिक्रमा की।
हरिनाम संकीर्तन के मधुर स्वर और दामोदर दीप की रोशनी ने भक्तों को आध्यात्मिक भाव में डुबो दिया।
कार्यक्रम संचालन
पूरा कार्यक्रम अत्यंत सुचारू रूप से इन सेवकों द्वारा संचालित किया गया—
एच.जी. अच्युत गोपाल प्रभु, समर्पित गौर दास, भक्तवत्सल दास, चंद्रभानु दास, गिरिधर गोपाल दास, अद्वैत प्राण लाडली लाल, भक्त विष्णु तथा अन्य समर्पित सेवक-व्रिंद।
एकादशी महाप्रसाद से हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों के लिए एकादशी महाप्रसाद का दिव्य आयोजन किया गया।
लगभग सभी दर्शनार्थियों ने महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को कृतार्थ महसूस किया।
भक्तों ने बताया कि यह आयोजन उनके लिए आध्यात्मिक जीवन में एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।




