नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने किराएदारों और मकान मालिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘रेंट रूल्स 2025’ लागू कर दिए हैं। नए नियमों का उद्देश्य किराए की प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। अब किराया समझौता करने के 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और सिक्योरिटी डिपॉजिट पर सीमा भी तय की गई है। इससे मनमानी, विवाद और गैरकानूनी प्रथाओं की संभावना कम होगी।
उच्च किराए पर टैक्स नियम
यदि किसी व्यक्ति का मासिक किराया 50,000 रुपये से अधिक है, तो उसे TDS काटना और उसकी रिपोर्टिंग करना अनिवार्य होगा। TDS का भुगतान साल में एक बार या किराए की अवधि समाप्त होने पर करना होता है।

TDS से जुड़े मुख्य प्रावधान:
- धारा 194-IB के अनुसार नौकरीपेशा, प्रोफेशनल या छोटे व्यापारी जो 50,000 रुपये से अधिक किराया देते हैं, उन्हें 2% TDS काटना अनिवार्य है।
- TDS भरने के बाद फॉर्म 26QC जमा करना और मकान मालिक को फॉर्म 16C जारी करना जरूरी है।
- उल्लंघन पर लेट फीस, ब्याज और जुर्माना लागू होगा।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
- देर से TDS जमा करने पर प्रतिदिन 200 रुपये लेट फीस
- TDS न काटने पर 1% मासिक ब्याज
- TDS न जमा करने पर 1.5% मासिक ब्याज
- 10,000 से 1,00,000 रुपये तक का जुर्माना
- गंभीर मामलों में 3 महीने से 7 साल तक की जेल
ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट अनिवार्य
- किराया समझौता 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन रजिस्टर करना होगा
- उल्लंघन पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना
- मकसद: लिखित और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए विवादों को रोकना
किराया बढ़ोतरी और मकान खाली करवाने पर नियंत्रण
- किराया बढ़ाने के लिए 90 दिन पहले लिखित सूचना अनिवार्य
- बिना रेंट ट्रिब्यूनल के आदेश मकान मालिक किराएदार को घर नहीं खाली करा सकता
मरम्मत और निरीक्षण के नियम
- मकान मालिक को निरीक्षण या मरम्मत के लिए 24 घंटे पूर्व सूचना देनी होगी
- आवश्यक मरम्मत 30 दिनों में पूरी करना अनिवार्य
- किराएदार स्वयं मरम्मत कराकर खर्च समायोजित कर सकता है
- विवादों का निर्णय अब 60 दिनों के भीतर ट्रिब्यूनल करेगा
किराएदारों के मुख्य लाभ
- सिक्योरिटी डिपॉजिट पर सीमा
- किराया बढ़ोतरी पर नियंत्रण
- डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया
- समयबद्ध विवाद समाधान
मकान मालिकों के फायदे
- कानूनी रूप से मजबूत और सुरक्षित कॉन्ट्रैक्ट
- डिजिटल रिकॉर्ड से विवाद कम
- भुगतान ट्रैकिंग आसान
- रेंट ट्रिब्यूनल से समयबद्ध न्याय
