आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का पुणे भाषण सोमवार को चर्चा का मुख्य विषय बन गया। भाषण में उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की बात गंभीरता से सुन रही है। वैश्विक स्तर पर भारत की शक्ति उसी स्थान और समय पर दिखाई दे रही है, जहाँ इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है। इसी कारण दुनिया भारत की भूमिका और उसके महत्व को पहले से अधिक समझने लगी है।
भागवत पुणे में आयोजित एक विशेष समारोह में बोल रहे थे, जो आरएसएस की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में संघ के इतिहास, राष्ट्रनिर्माण में उसके योगदान और भविष्य की दिशा पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि जब भारत आगे बढ़ता है, तो दुनिया की कई समस्याओं का समाधान स्वतः ही निकलने लगता है। भारत की प्रगति न केवल देश के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक शांति स्थापित करने और संघर्षों को कम करने में भारत की भूमिका बेहद अहम है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियाँ भी यही संकेत देती हैं कि दुनिया की उम्मीदें भारत से जुड़ी हुई हैं। इसलिए भारत को इतिहास में दर्ज अपनी महान भूमिका को एक बार फिर निभाना होगा।
भागवत ने जोर देकर कहा कि भारत का मार्ग हमेशा से समग्र कल्याण और विश्व-शांति का रहा है। भारत जितना मजबूत होगा, दुनिया उतनी ही स्थिर और शांतिपूर्ण बनेगी। उनका यह पुणे भाषण स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि आने वाले समय में भारत की वैश्विक भूमिका और भी प्रभावशाली होने वाली है।
