Udar Sagar Jankalyan Teerth Badgaon News: पंचकल्याणक महोत्सव के सातवें दिन ज्ञान कल्याण महोत्सव में उमड़ा जनसागर
टीकमगढ़ जिले के सिद्ध क्षेत्र बड़ागांव स्थित श्री उदारसागर जनकल्याण तीर्थ बड़गांव में आयोजित भव्य श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक जिन बिंब प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव अपने चरम पर है। 23 नवंबर से प्रारंभ हुआ यह पावन महोत्सव 30 नवंबर तक विविध आध्यात्मिक, धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों के साथ चल रहा है। शनिवार को महोत्सव के सातवें दिन आयोजित ज्ञान कल्याणक महोत्सव में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा तीर्थ परिसर भक्ति रस से सराबोर हो गया।
भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता
सुबह होते ही वातावरण मंत्रोच्चारण से गूंज उठा। बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित अनेक प्रांतों से आए हजारों श्रद्धालु ब्रह्ममुहूर्त से ही तीर्थ परिसर में दर्शन, पूजा और अनुष्ठान के लिए पहुंचने लगे।
प्रातः 6:00 बजे कार्यक्रमों की शुरुआत मंत्र आराधना, नित्य मय अभिषेक, और शांति धारा जैसे पवित्र अनुष्ठानों के साथ हुई। धर्मानुरागी समाजजन भक्ति, ध्यान और श्रद्धा में लीन होकर इस दिव्य वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते दिखे।
9:15 बजे धर्मसभा—आचार्य श्री का दिव्य प्रवचन
सुबह 9:15 बजे विशाल धर्मसभा आयोजित की गई, जिसमें आचार्य श्री ने हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
अपने प्रेरणाप्रद संदेश में उन्होंने पंचकल्याणक के महत्व, जीवन में ज्ञान, संयम और सदाचार की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। धर्मसभा के दौरान पंडाल पूरी तरह से खचाखच भरा रहा और कई श्रद्धालु बाहर खड़े होकर भी प्रवचन सुनते रहे।
सूरि मंत्र संस्कारारोहण—आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
दोपहर 12:30 बजे से सूरि मंत्र संस्कारारोहण का भव्य आयोजन हुआ। मंत्रों की दिव्य ध्वनि और शास्त्रीय वैदिक उच्चारण से पूरा परिसर आध्यात्मिक स्पंदन से भर गया। श्रद्धालु इस दुर्लभ आध्यात्मिक अनुष्ठान को देखने के लिए देर तक पंक्तिबद्ध रहे।
3:30 बजे आचार्य श्री की दिव्या देशना—पंडाल छोटा पड़ गया
दोपहर 3:30 बजे पुनः आचार्य श्री की दिव्या देशना आयोजित की गई।
इस दौरान स्थिति ऐसी हो गई कि विशाल पंडाल में बैठने के लिए जगह कम पड़ गई। श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति का जोश देखने लायक था। प्रवचन के बाद सम्मान समारोह हुआ जिसमें अनेक सेवाभावी व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया।
शाम 7 बजे श्रीजी की विशाल महाआरती—भक्ति का अद्वितीय नज़ारा
शाम 7:00 बजे से आयोजित श्री जी की महाआरती महोत्सव का मुख्य आकर्षण रही।
शिवपुरी निवासी सौरभ जैन के निवास से आरती की शोभायात्रा हाथी, बग्घी, दिव्य घोष, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ बड़े धूमधाम से निकली।
पुरुष, महिलाएँ, युवा और बच्चे—सभी भक्ति में लीन होकर जुलूस के साथ पंडाल तक पहुंचे।
पंडाल में आयोजित महाआरती का दृश्य अद्भुत था।
हजारों श्रद्धालु अपने स्थान पर खड़े होकर आरती की संगीत ध्वनि पर झूमते, थिरकते और दिव्य आध्यात्मिक अनुभूति में खोते रहे। वातावरण में घंटे-घड़ियाल की ध्वनि और “श्रीजी आरती” की पावन गूंज फैल गई।
रात्रि 8:30 बजे राष्ट्रीय हास्य कवि सम्मेलन—हंसी और आध्यात्मिकता का संगम
रात्रि 8:30 बजे से देशभर में प्रसिद्ध राष्ट्रीय स्तर का हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का संयोजन ख्यात कवि डॉ. कमलेश बसंत ने किया।
देर रात तक चले कवि सम्मेलन ने भारी जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों की हास्य व्यंग्य रचनाओं ने श्रोताओं को खूब आनंदित किया और महोत्सव के आध्यात्मिक माहौल में सांस्कृतिक रंग भर दिए।
उदारसागर जनकल्याण तीर्थ बड़गांव—बुंदेलखंड का महाधार्मिक केंद्र
श्री उदारसागर जनकल्याण तीर्थ को सिद्ध क्षेत्र बड़ागांव में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।
यहां हो रहा श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक जिनबिंब प्रतिष्ठा गजरथ महोत्सव बुंदेलखंड ही नहीं, पूरे देश का प्रमुख जैन आयोजन बन चुका है।
हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन, पूजा और प्रवचन सुनने के लिए यहां पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक गतिविधियों का विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

