नई दिल्ली: गाजा में युद्धविराम बनाए रखने के प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर के मध्य में जॉर्डन और ओमान की यात्रा कर सकते हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।
ओमान और जॉर्डन यात्रा का महत्व
ओमान यात्रा पीएम मोदी की दूसरी होगी। भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) पर बातचीत पूरी हो चुकी है और अब औपचारिक हस्ताक्षर शेष हैं। इस समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए यह दौरा अहम माना जा रहा है। जॉर्डन की बात करें तो पीएम मोदी ने पिछली बार 2018 में जॉर्डन का दौरा किया था और फिलिस्तीन जाते समय वहां रुके थे।

गाजा और मध्य पूर्व शांति प्रयास
समझा जा रहा है कि इस दौरे के दौरान पीएम मोदी जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से गाजा की स्थिति और युद्धविराम बनाए रखने के प्रयासों पर चर्चा करेंगे। भारत हमेशा से गाजा में शांति और युद्धविराम के प्रयासों का समर्थन करता रहा है और चाहता है कि बंधकों की रिहाई और कूटनीतिक वार्ता को बढ़ावा मिले।
व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग
ओमान और जॉर्डन दौरे में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी ध्यान दिया जाएगा। विशेष रूप से India-Middle East-Europe Economic Corridor पर बातचीत होने की संभावना है। जॉर्डन इस कॉरिडोर के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट देश के रूप में भूमिका निभा सकता है। भारत और जॉर्डन के बीच 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 2.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया और भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया।
रक्षा और रणनीतिक सहयोग
ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का करीबी रक्षा सहयोगी भी है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास और रक्षा सहयोग के माध्यम से रणनीतिक संबंध मजबूत हो रहे हैं। यह दौरा भारत के लिए पश्चिम एशिया के साथ आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
