भोपाल : भोपाल में बिना अनुमति पेड़ काटे जाने की बढ़ती शिकायतों के बाद नगर निगम कमिश्नर IAS संस्कृति जैन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पेड़ों की कटाई और छंटाई से जुड़े सभी अधिकार अपने पास ले लिए हैं। उन्होंने अधिकारियों की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि अब शहर में बिना परमिशन पेड़ काटने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल भेजने तक की कार्रवाई शामिल है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के हालिया आदेशों के बाद बीएमसी ने सख्ती और बढ़ा दी है। कमिश्नर जैन ने माना कि नगर निगम क्षेत्र में बिना अनुमति पेड़ काटने के मामले लगातार सामने आ रहे थे, जिसे रोकने के लिए अब अनुमति प्रक्रिया पूरी तरह उनके नियंत्रण में रहेगी। पहले पेड़ अधिकारी के पास जो अधिकार थे, उन्हें निरस्त कर दिया गया है।

एमपी में पेड़ कटाई के नियम: क्या कहता है कानून?
एमपी वृक्षण का परिक्षण अधिनियम 2001 के अनुसार—
- नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्र में किसी भी पेड़ को काटने, हटाने, उखाड़ने या छांटने के लिए अनुमति अनिवार्य है, चाहे जमीन निजी हो या सरकारी।
- बिना अनुमति पेड़ को नुकसान पहुंचाने पर ₹500 तक जुर्माना।
- कार्रवाई के बाद भी नुकसान जारी रहा तो ₹50 प्रतिदिन प्रति पेड़ अतिरिक्त जुर्माना।
- सार्वजनिक स्थानों पर शाखाएं काटने या फूल-पत्ते तोड़ने पर ₹1,000 तक जुर्माना।
- दोबारा उल्लंघन करने पर ₹2,000 तक जुर्माने का प्रावधान।

कमिश्नर संस्कृति जैन ने चेतावनी दी कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिना अनुमति कटाई करने वालों को सीधे जेल भेजने की कार्रवाई लागू की जाएगी।
