बिना डिग्री डॉक्टर बना बैठा प्राथमिक शिक्षक: क्लिनिक चलाते पकड़ा गया, बैतूल कलेक्टर ने किया निलंबित
MP News: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक प्राथमिक शिक्षक बिना किसी डॉक्टरी डिग्री के खुद को डॉक्टर बताकर क्लिनिक चला रहा था और मरीजों का इलाज कर रहा था। शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब उसकी कथित क्लिनिक पर छापा मारा, तो मौके से एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन, वायल, बायो मेडिकल वेस्ट और कई चिकित्सीय उपकरण बरामद हुए। जांच के आधार पर जिला कलेक्टर ने उक्त शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
बिना डिग्री खुली थी डॉक्टर की दुकान: बैतूल में फर्जी डॉक्टर का सच उजागर
मध्य प्रदेश में अक्सर शिक्षक कई जिम्मेदारियां निभाते दिखाई देते हैं—शिक्षण कार्य, शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन, और सामाजिक गतिविधियों में सहयोग। लेकिन बैतूल जिले में एक शिक्षक ने ऐसी भूमिका निभा ली जो किसी की जान के लिए भी खतरा बन सकती थी। प्राथमिक शिक्षक रघुनाथ फौजदार ने अपनी पहचान एक डॉक्टर के रूप में बना रखी थी और गाँव में बाकायदा क्लिनिक चला रहा था।
लोग उससे इलाज करवाने पहुंचते थे और वह इंजेक्शन से लेकर एलोपैथिक दवाइयों तक का उपयोग कर रहा था। लेकिन जब इस अवैध गतिविधि की भनक स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची, तो पूरा मामला खुल गया।
स्वास्थ्य विभाग ने मारा छापा, मिला बड़ा फर्जीवाड़ा
स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए एक विशेष जांच दल गठित किया। यह टीम 8 नवंबर 2025 को बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी विकासखंड स्थित कुण्डीखेड़ा पहुँची, जहां शिक्षक की अवैध क्लिनिक चल रही थी।
छापा मारते ही शिक्षक रघुनाथ फौजदार मौके पर ही मरीजों का इलाज करते पकड़ा गया। न तो उसके पास डॉक्टरी की कोई डिग्री थी, न पंजीयन।
जांच टीम के अनुसार, क्लिनिक से निम्न चीजें बरामद हुईं—
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भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयाँ
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कई तरह के इंजेक्शन और वायल
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बायो मेडिकल वेस्ट, जो इलाज के बाद निष्पादन में आता है
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मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कई चिकित्सीय उपकरण
इन सामग्रियों की बरामदगी ने साफ कर दिया कि शिक्षक लंबे समय से यहाँ डॉक्टर बनकर लोगों को दवाएं दे रहा था, जो पूर्णतः अवैध और दंडनीय है।
CMHO ने दी रिपोर्ट, कलेक्टर ने लिया सख्त एक्शन
छापे की कार्रवाई के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी को भेजी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि शिक्षक अवैध रूप से डॉक्टरी कर रहा था और इससे ग्रामीणों की जान को खतरा था।
CMHO के प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से प्राथमिक शिक्षक रघुनाथ फौजदार को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
कलेक्टर का आदेश: कदाचार की श्रेणी में आता है शिक्षक का कृत्य
निलंबन आदेश में कलेक्टर ने लिखा कि—
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शिक्षक का कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के पूर्णतः विपरीत है।
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यह कार्य कदाचार की श्रेणी में आता है।
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इसलिए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत उसे निलंबित किया जाता है।
कलेक्टर के अनुसार, एक शिक्षक द्वारा बिना योग्यता और बिना पंजीयन डॉक्टर बनकर क्लिनिक चलाना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी है।
ग्रामीणों की जान पर बन सकता था खतरा
बिना मान्यता प्राप्त डिग्री और बिना चिकित्सा प्रशिक्षण के किसी भी व्यक्ति द्वारा मरीजों का उपचार करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में गलत दवा, गलत इंजेक्शन या गलत उपचार मरीज की जान तक ले सकता है।
चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र अनिवार्य है। लेकिन शिक्षक रघुनाथ फौजदार खुद को डॉक्टर बताकर ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ करता रहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग ऐसे फर्जी डॉक्टरों के झांसे में आ जाते हैं क्योंकि:
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सरकारी अस्पताल दूर होते हैं
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तत्काल सुविधा उपलब्ध नहीं रहती
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लोग भरोसे में जल्द आ जाते हैं
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“शिक्षक” की समाज में अच्छी छवि होने के कारण लोग शंका भी नहीं करते
इसलिए ऐसे मामलों में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी होती है।
मध्य प्रदेश में फर्जी डॉक्टरों पर बढ़ा शिकंजा
पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के कई जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ बिना डिग्री के लोग डॉक्टर बनकर इलाज करते पाए गए।
स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मामलों पर सख्ती बढ़ाई है और नियमित रूप से छापेमारी की जा रही है।
बैतूल मामले ने एक बार फिर प्रदेश में फर्जी डॉक्टरों की समस्या पर ध्यान केंद्रित किया है।
आखिर क्यों बढ़ रहे ऐसे मामले? – एक विश्लेषण
1. ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
जब स्वास्थ्य सेवाएँ सीमित हों, तब लोग मजबूरी में फर्जी चिकित्सकों पर निर्भर हो जाते हैं।
2. कम जागरूकता
कई लोग यह जानते ही नहीं कि दवा देने या इंजेक्शन लगाने के लिए भी डॉक्टर का पंजीयन जरूरी होता है।
3. जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों का दुरुपयोग
शिक्षक एक सम्मानित पद है, लेकिन उसका दुरुपयोग कर समाज में गलत मिसाल पेश करना और भी गंभीर है।
4. कानूनी लापरवाही के उदाहरण
कई बार शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई न होने से ऐसे फर्जी डॉक्टर वर्षों तक सक्रिय रहते हैं।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
निलंबन के बाद शिक्षक पर आगे ये कदम उठाए जा सकते हैं—
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विभागीय जांच
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सेवा से बर्खास्तगी (यदि दोष सिद्ध होता है)
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फर्जी डॉक्टरी के लिए कानूनी कार्यवाही
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दवाइयों और उपकरणों की बरामदगी पर केस दर्ज
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कार्रवाई भी संभव है, क्योंकि यह मामला दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
निष्कर्ष: नियमों की अनदेखी और ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़
बिना डिग्री डॉक्टर बनकर क्लिनिक चलाने वाले बैतूल के इस प्राथमिक शिक्षक रघुनाथ फौजदार ने न सिर्फ शिक्षा प्रणाली की गरिमा को ठेस पहुंचाई, बल्कि लोगों की जान को भी जोखिम में डाला।
कलेक्टर द्वारा किया गया निलंबन इस बात का संकेत है कि प्रदेश में ऐसे मामलों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह घटना बताती है कि फर्जी डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई ही लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है।
