इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने पहली बार स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया है कि अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के संबंध अब कभी सामान्य नहीं हो सकते। तालिबान के सत्ता में आने के चार साल बाद भी इस्लामाबाद को उसकी उम्मीदों के विपरीत परिणाम का सामना करना पड़ रहा है।
एक साक्षात्कार में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान ने तालिबान का स्वागत किया, कई बार काबुल जाकर उनसे बातचीत की, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। उन्होंने कहा,
“हमें लगा था कि तालिबान हम पर निर्भर रहेंगे और पुराना प्रभाव बना रहेगा, मगर ठीक उलटा हुआ। अब हमारी सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं। तालिबान से किसी सकारात्मक बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं बची।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अक्टूबर 2025 से दोनों देशों की सीमा पर गोलीबारी और हवाई हमले जारी हैं। तीन दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही, क्योंकि पाकिस्तान टीटीपी हमलों की जिम्मेदारी अफगान तालिबान पर डालता रहा।
आसिफ ने माना कि तालिबान ने पाकिस्तान की कोई नहीं सुनी और अब दोनों देशों के रिश्ते सुधारने की संभावना लगभग शून्य हो गई है। पाकिस्तानी सेना और सरकार की नाराजगी की असली वजह तालिबान की स्वतंत्र विदेश नीति है। अफगान मंत्री लगातार भारत आ रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और कनेक्टिविटी के नए समझौते हो रहे हैं।
ख्वाजा आसिफ का यह कबूलनामा पाकिस्तान की अफगान नीति की सबसे बड़ी नाकामी का सार्वजनिक ऐलान है। चार साल पहले जिस तालिबान को इस्लामाबाद अपना स्ट्रैटेजिक एसेट मानता था, आज उसी से उसे स्थायी दुश्मनी का डर सता रहा है।
