हार्दिक हुंडिया का बड़ा संदेश— “गुजराती और मारवाड़ी एक हों, नफरत मिटेगी तभी राष्ट्र आगे बढ़ेगा”
जनकल्याण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उठाई समाज एकता की अपील, राज ठाकरे जैसे नेताओं की शैली को बताया देश के लिए आवश्यक
गुजरात–राजस्थान–महाराष्ट्र की एकता पर बड़ा बयान
जनकल्याण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया ने आज देशवासियों के नाम एक मजबूत और भावनात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “समय आ गया है कि गुजराती और मारवाड़ी समाज एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका और अधिक मजबूत करें।”
उन्होंने कहा कि जब इतिहास में गुजरात प्रदेश का गठन ही नहीं हुआ था, तब यहाँ के लोग अपने आप में महाराष्ट्रीयन संस्कृति का हिस्सा माने जाते थे। ऐसे में आज किसी भी तरह का क्षेत्रीय भेदभाव या समाजों के बीच दूरी का कोई औचित्य नहीं है।
“जब पूरे देश की पार्टियां सुशासन चाहती हैं तो नफरत क्यों?”
हार्दिक हुंडिया ने राजनीति में बढ़ रही कटुता पर भी बड़ा प्रश्न उठाया। उनका कहना था कि देश की लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां सुशासन की बात करती हैं, पर दुर्भाग्य से समाज में नफरत की भावना लगातार बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा—
“हमें यह तय करना होगा कि नफरत की राजनीति से राष्ट्र कभी आगे नहीं बढ़ सकता। भाइयों के बीच दूरी पैदा करके कोई भी समाज तरक्की नहीं कर सकता।”
गुजराती–मारवाड़ी समाज: देश संकट में हो तो सबसे पहले आगे आने वाली कौम
हार्दिक हुंडिया ने अपने वक्तव्य में कहा कि गुजराती, मारवाड़ी और जैन समाज, जब भी देश कठिनाई में आया है, हमेशा अग्रणी पंक्ति में खड़े रहे हैं।
उन्होंने कहा—
“भारत माता के पुत्र होने के नाते इन समाजों ने राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोच्च रखा है। व्यापार, कर संग्रह, सामाजिक सेवा… हर क्षेत्र में इन समाजों ने देश को मजबूती दी है।”
ऐसे में इन समाजों को राजनीति की वजह से किसी भी तरह की नफरत या भेदभाव का शिकार नहीं होना चाहिए।
राज ठाकरे की शैली और स्वभाव की तारीफ— ‘देश को ऐसे मजबूत नेता चाहिए’
हार्दिक हुंडिया ने अपने वक्तव्य में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को उनकी जैसी साफ-सुथरी शैली, स्पष्टवादिता और जनता से जुड़ने का स्वभाव रखने वाले नेताओं की आवश्यकता है।
उन्होंने एक घटना साझा की—
जब ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के लगभग 25 पत्रकार राज ठाकरे से मिलने गए थे, तो उन्होंने सभी पत्रकारों से बराबर सम्मान के साथ समय दिया। उन्होंने पत्रकारों के अखबार पढ़े, उनके काम की सराहना की।
एक पत्रकार ने जब बताया कि उसका अखबार हिंदी, इंग्लिश और गुजराती तीन भाषाओं में निकलता है, तो राज ठाकरे ने प्रेम से पूछा—
“मराठी क्यों नहीं?”
हार्दिक हुंडिया ने इसे राज ठाकरे की सौम्यता, स्वाभिमान, और सबको साथ लेकर चलने वाली सोच का उदाहरण बताया।
“नफरत फैलाने वालों को रोकना होगा” — हार्दिक हुंडिया
हार्दिक हुंडिया ने राजनीति में नफरत फैलाने वालों पर कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ऐसे लोग किसी भी पार्टी में हों, उन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण दिया कि—
एक बार एक जैन संत ने शिवसेना के खिलाफ कठोर बातें कही थीं, जिससे शिवसेना और जैन समाज के बीच गंभीर गलतफहमियाँ पैदा हो गईं। नतीजा यह हुआ कि जैन संतों का विहार कई गांवों में रोक दिया गया, जबकि गलती उस एक संत की थी जिसने अनुचित भाषा का प्रयोग किया।
बाद में जब जैन समाज के प्रतिनिधि संजय राउत से मिले और बताया कि वह व्यक्ति असली जैन संत नहीं है, तब स्थिति सुधरी और जैन संतों का विहार फिर से शुरू हुआ।
हार्दिक हुंडिया ने कहा—
“यदि किसी ने भगवान महावीर का वेश धारण किया है तो उसे नफरत नहीं फैलानी चाहिए। जैन धर्म अहिंसा व प्रेम का संदेश देता है।”
“सबसे ज्यादा टैक्स देने वाला जैन समाज भेदभाव का शिकार क्यों?”
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि जैन समाज और व्यापारी वर्ग देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं।
लेकिन आज वही समाज गलतफहमियों, राजनीतिक बयानबाजी और सामाजिक दूरी का शिकार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि गुजराती, मारवाड़ी और जैन समाज एकजुट हो जाए, तो न केवल करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी सुरक्षित होगी, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक मजबूती भी बढ़ेगी।
“हम सब भारत माता के संतान हैं — पहले मानव बनें, फिर जाति-प्रांत देखें”
हार्दिक हुंडिया ने भावुक शब्दों में कहा—
“हम सब भारत माता के बच्चे हैं। हमें पहले इंसान बनना चाहिए, उसके बाद ही किसी जाति, भाषा या प्रदेश की पहचान मायने रखती है।”
उन्होंने कहा कि जब देश के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान दे दी, कठिनाइयाँ झेली, त्याग किए, तब उन्होंने कभी समाजों के बीच भेदभाव नहीं देखा।
आज भी यदि हम सब एक हो जाएं, तो रामराज्य जैसी कल्याणकारी व्यवस्था संभव है।
“नफरत की आग को कहीं न कहीं रोकना ही पड़ेगा”
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि आज समाज में कई जगहों पर “उसने क्यों मारा?”, “उसने क्यों मार खाई?” जैसी बहसें फैल रही हैं। यह नफरत की भाषा है।
उन्होंने कहा—
“हमें बहस नहीं, समाधान की जरूरत है। हमें नफरत नहीं, एकता की राजनीति करनी है।”
गुजराती–मारवाड़ी समाज के लिए अंतिम अपील
अपने उद्बोधन के अंत में हार्दिक हुंडिया ने दो हाथ जोड़कर गुजराती, मारवाड़ी और जैन समाज से अपील करते हुए कहा—
“कृपया एकजुट हो जाइए।
समाज का उत्थान कीजिए,
राष्ट्र निर्माण में योगदान दीजिए।
नफरत फैलाने वालों को पहचानिए।
हम सब एक हैं और एक रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि जीवन में हम सब कुछ यहीं छोड़कर चले जाते हैं, पर यदि समाज और राष्ट्र के लिए कुछ अच्छा करके जाएं, तो वही सच्ची विरासत होती है।
