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कोटा रामपुरा अकलंक स्कूल में पद्म पुराण आधारित श्रीराम कथा के छठे दिवस पुण्यात्मा का पुण्य आगे-आगे चलता संदेश

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Published On: 26 November 2025
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पुण्यात्मा का पुण्य आगे-आगे चलता है: रामपुरा कोटा में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिवस में उमड़ा भक्ति का सैलाब


कोटा (राजस्थान)। रामपुरा स्थित अकलंक स्कूल परिसर में आयोजित पद्म पुराण पर आधारित भव्य श्रीराम कथा का आज छठा दिवस अत्यंत भावपूर्ण और भक्तिमय वातावरण के साथ संपन्न हुआ।
विशिष्ट राम कथाकार, अनुशासन एवं ध्यान योग के आचार्य परम पूज्य ध्यान दिवाकर धर्म चक्रवर्ती 108 श्री जय कीर्ति जी गुरुदेव की दिव्य वाणी के साथ आज का दिन अध्यात्म, भक्ति और पुण्य के संदेश से सराबोर रहा।

कार्यक्रम की जानकारी 35 वर्षों से पत्रकारिता में योगदान देने वाले, जिनवाणी टीवी चैनल के ब्यूरो चीफ
पारस जैन “पार्श्वमणि” ने दी।

भव्य आयोजन—21 से 30 नवंबर तक श्रीराम कथा

अकलंक स्कूल परिसर में 21 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित यह श्रीराम कथा भक्ति, संगीत और अध्यात्म का जीवंत संगम बन चुकी है।
कोटा में पहली बार इतना व्यापक और भव्य आध्यात्मिक आयोजन देखने को मिल रहा है, जिसमें प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त गण संगीत की मधुर धुनों और गुरुदेव की ज्ञानमयी वाणी में डूबकर आत्मिक आनंद ले रहे हैं।

छठे दिवस का विशेष आयोजन—राजा श्रेणिक बनने का सौभाग्य

अकलंक एसोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष बज एवं सचिव अनिमेष जैन ने बताया कि आज के विशेष अवसर पर
लादुलाल–लाड़बाई पद्म, मीना संयोग अजमेरा, अनिल–मिंटो, पुलकित वशिष्ठ श्रीमाल परिवार को राजा श्रेणिक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

इसके साथ ही मां जिनवाणी की पालकी को गुरुदेव के करकमलों में सौंपने का पवित्र अवसर
दिगंबर जैन तेरह पंथी पंचायत के समस्त सदस्यों को प्राप्त हुआ।

दिगंबर जैन समाज के अनेक श्रेष्ठी रहे उपस्थित

महेश गंगवाल गुलाबबाड़ी ने बताया कि कार्यक्रम में दिगंबर जैन महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष निशा वैद,
कविता बज, मीना गंगवाल, अनिल ठोरा, हेमंत पापड़ीवाल (कापरेन),
हरकचंद लूंगया, राजकुमार पोरवाल, निर्मल पोरवाल, कैलाश जैसवाल, अशोक बड़जात्या,
अखिलेश जैन सहित अनेक समाजश्रेष्ठी उपस्थित रहे।

गुरुदेव जय कीर्ति जी महाराज का दिव्य प्रवचन — “पुण्यात्मा का पुण्य आगे-आगे चलता है”

अपने मंगल प्रवचन में पूज्य गुरुदेव ने पद्म पुराण में वर्णित रामकथा का अत्यंत मार्मिक और विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया—

पवनंजय का अंबरगोचर गजराज पर चढ़कर भूतरव वन में प्रवेश

अंजना के वियोग से व्यथित पवनंजय का वन में प्रवेश…
पिता प्रह्लाद द्वारा पुत्र की खोज…
हनुमान का नाना महेंद्र से युद्ध…
और अंततः पवनंजय–अंजना–हनुमान का मिलन अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग के रूप में प्रस्तुत हुआ।

लंका में हनुमान का प्रवेश और विभीषण से संवाद

हनुमान द्वारा लंका में प्रवेश, विभीषण से वार्तालाप,
और प्रमद वन में माता सीता को राम की अंगूठी द्वारा संदेश देना—
ये सभी प्रसंग दर्शकों को भावविभोर कर गए।

सीता जी का राम के समाचार सुनकर 11 दिन के उपवास के बाद ऐरा देवी द्वारा लाए भोजन का सेवन करना अत्यंत हृदयस्पर्शी रहा।

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🔥 हनुमान पर अत्याचार और युद्ध का आरंभ

इंद्रजीत व मेघवाहन द्वारा हनुमान को नागपाश से बांधना,
रावण द्वारा अनेक दुर्वचनों से उनका अपमान,
और फिर हनुमान का अपने बल से बंधन मुक्त होकर किश्किंधा लौटना—
सभी घटनाएँ प्रवचन का मुख्य केंद्र रहीं।

हनुमान ने राम को लंका का समस्त वृतांत सुनाया, जिसके बाद
राम, लक्ष्मण, वानर सेना और मित्र राजाओं के साथ युद्ध के लिए प्रस्थान करते हैं।

युद्ध से पहले शुभ शकुन

गुरुदेव ने बताया कि राम की सेना के मार्ग में—

  • दाहिनी ओर निर्धूम अग्नि

  • मयूर का मधुर शब्द

  • सौभाग्यवती स्त्री के दर्शन

  • सुगंधित वायु

  • निर्ग्रंथ मुनिराज के दर्शन

  • घोड़ों की हिनहिनाहट

  • शंख–घंटा ध्वनि

ये सभी शुभ शकुन विजय के संकेत थे।

रावण पक्ष में अपशकुन

दूसरी ओर रावण की सेना में—

  • दक्षिण दिशा में भयंकर रीछ शब्द

  • विनाश-सूचक गिद्ध

  • खुले बाल वाली स्त्री

  • व्याकुल पक्षियों का समूह

ये सभी अपशकुन आने वाले विनाश का सन्देश दे रहे थे।

राम–रावण युद्ध का भव्य वर्णन

गुरुदेव ने आगे बताया—

  • गरुड़ेन्द्र महालोचन देव द्वारा राम–लक्ष्मण को दिव्य विद्या प्रदान करना

  • लक्ष्मण द्वारा भामंडल तथा सुग्रीव को नागपाश से मुक्त करना

  • विभीषण–रावण का प्रचंड युद्ध

  • रावण द्वारा अमोघ विजया शक्ति का प्रयोग जिससे लक्ष्मण अचेत हो गए

इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालुओं में गहन शांति एवं श्रद्धा का भाव उमड़ा।

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गुरुदेव का आध्यात्मिक संदेश—“पुण्य ही सब प्राप्त कराता है”

गुरुदेव ने कहा—

**“पुण्यात्मा जीव को समस्त मनचाही वस्तु मिलती है।”

“जिसके पास पुण्य नहीं, उसकी सभी वस्तुएं छिन जाती हैं।”**

उन्होंने बताया कि:

  • पुण्य करने से आश्चर्यकारी लक्ष्मी प्राप्त होती है।

  • पुण्यात्मा स्वयं वैभव प्राप्त करता है और दूसरों को भी वैभव देता है।

  • पुण्यात्मा जहाँ जाता है उसका पुण्य पहले पहुँच जाता है

  • संसार में सुख का एकमात्र मार्ग—जिनेंद्र भक्ति और साधु सेवा है।

प्रस्तुति

राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी
पारस जैन “पार्श्वमणि”, पत्रकार
कोटा — 941476498

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