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“दंतेवाड़ा ऑनलाइन पेमेंट घोटाला: शराब दुकान में सरकारी QR बदलकर 1 करोड़ रुपये का UPI फ्रॉड, आबकारी विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर”

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Published On: 26 November 2025
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1 करोड़ का ऑनलाइन पेमेंट घोटाला: शराब दुकान में सेल्समैनों ने सरकारी QR बदलकर लगाया बड़ा फाइनेंशल फ्रॉड

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दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बचेली स्थित सरकारी इंग्लिश शराब दुकान में हुआ लगभग 1 करोड़ रुपए का ऑनलाइन पेमेंट घोटाला राज्यभर में सुर्खियों में है। इस हाई–प्रोफाइल फाइनेंशियल फ्रॉड ने न केवल आबकारी विभाग (Excise Department) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी दुकानों में चल रही ऑनलाइन पेमेंट प्रणाली की सुरक्षा पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि दुकान में काम करने वाले कुछ सेल्समैनों ने सरकारी QR कोड को हटाकर उसकी जगह अपने निजी खातों से लिंक निजी UPI QR कोड चिपका दिया था। इस बदलाव का पता न ग्राहकों को चला, न विभाग को। परिणामस्वरूप लगभग 14 दिनों तक ग्राहकों द्वारा किया गया हर डिजिटल भुगतान सीधे कर्मचारियों के पर्सनल बैंक खातों में जमा होता रहा

कैसे हुआ 1 करोड़ रुपये का यह ऑनलाइन पेमेंट घोटाला?

जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि शराब दुकान में लगे सरकारी QR कोड को चुपचाप हटाकर फर्जी QR कोड लगा दिया गया था।
उन QR कोड में लिंक थे—
 निजी बैंक खाते
पर्सनल UPI IDs
कई छोटे–छोटे खातों में बंटे भुगतान

इन QR कोड को रणनीतिक तरीके से दुकान के काउंटर पर इस तरह चिपकाया गया कि ग्राहकों को बिल्कुल यह महसूस न हो कि यह सरकारी QR नहीं है।

सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे 14 दिनों तक सरकारी खाते में एक भी ऑनलाइन पेमेंट का एंट्री नहीं हुई, लेकिन विभाग के किसी अधिकारी–कर्मचारी ने इसकी जांच करने की जरूरत नहीं समझी।

आम तौर पर शराब दुकानों में हर दिन हजारों की ऑनलाइन एंट्री होती है, ऐसे में लगातार शून्य पेमेंट होना खुद एक बड़ा अलर्ट था—जो विभाग ने नजरअंदाज कर दिया।

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14 दिनों तक नहीं मिली एक भी ऑनलाइन एंट्री — विभाग सोता रहा

दुकान का सरकारी बैकएंड सिस्टम जब 14 दिनों तक “Zero Online Payment” दिखाता रहा, तब भी न तो दुकान प्रभारी ने रिपोर्ट दी, न ही निरीक्षण करने वाले अधिकारी कोई कार्रवाई कर पाए।

इससे साफ होता है कि:

  • निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल रहा,
  • डेली रिपोर्टिंग सिस्टम कमजोर थी,
  • और आंतरिक ऑडिट बिल्कुल नहीं हुआ

इसी लापरवाही का फायदा उठाकर आरोपी सेल्समैन लगातार ग्राहकों से भुगतान अपने खातों में मंगवाते रहे। जब तक विभाग को भनक लगी, रकम लगभग 1 करोड़ रुपए के आसपास पहुंच चुकी थी।

जांच टीम का कहना है कि घोटाले की वास्तविक रकम इससे भी अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पेमेंट छोटे खातों में भेजे गए हैं जिन्हें ट्रेस कर पाना अभी बाकी है।

जांच में क्या सामने आया? चार कर्मचारी संदिग्ध

आबकारी विभाग की प्रारंभिक जांच में चार कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
उन पर आरोप हैं कि—

  • सरकारी QR कोड नहीं चल रहा था,
  • ऑनलाइन एंट्री बंद हो चुकी थी,
  • लेकिन उन्होंने इस पर कोई रिपोर्ट नहीं बनाई।

इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि या तो वे लापरवाह थे, या फिर घोटाले की साजिश में किसी स्तर पर शामिल हो सकते हैं।

विभाग अब इन चारों कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की तैयारी कर रहा है।
साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि:

  • कुछ अन्य कर्मचारी,
  • दुकान संचालक से जुड़े लोग,
  • या पूरे नेटवर्क में शामिल बाहरी लोग भी

इस फ्रॉड में हिस्सेदार हो सकते हैं।

 किन–किन दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच शुरू?

आबकारी विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की है।
टीम इन सभी बिंदुओं की जांच कर रही है—

  • QR कोड से जुड़े सभी बैकएंड ट्रांजैक्शन
  • कैश–बुक और बहीखाते
  • दैनिक बिक्री रिपोर्ट
  • UPI/Wallet/Online Payment रिकॉर्ड
  • CCTV फुटेज
  • संबंधित कर्मचारियों के बैंक विवरण
  • शराब दुकान संचालन से जुड़े सभी फाइलें
  • निरीक्षण अधिकारियों की दैनिक रिपोर्ट

जांच अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि यह घटना केवल गलती नहीं बल्कि योजनाबद्ध आर्थिक अपराध है।

राज्य में राजस्व नुकसान — आबकारी विभाग की साख पर सवाल

इस घोटाले से सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं हुआ, बल्कि पूरा मामला राज्य में राजस्व हानि का गंभीर उदाहरण बन गया है। शराब दुकानें सरकार की आय का बड़ा स्रोत हैं, ऐसे में 14 दिनों तक ऑनलाइन पेमेंट गायब होना एक गहरी चूक है।

इस फ्रॉड ने साफ कर दिया है कि—

  • एक्साइज विभाग की निगरानी कमजोर है,
  • दुकानों की डिजिटल सुरक्षा बेहतरीन नहीं है,
  • और कर्मचारियों पर भरोसे की प्रक्रिया में बड़े सुधार की जरूरत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सिस्टम को मॉनिटर किया जाता, तो कई लाखों का नुकसान रोका जा सकता था

ग्राहक भी बने शिकार — उन्हें लगा वे सरकार को भुगतान कर रहे हैं

इस पूरे मामले में ग्राहकों को भी धोखा मिला।
लोगों को विश्वास था कि वे सरकारी शराब दुकान में QR कोड स्कैन कर भुगतान कर रहे हैं, लेकिन पेमेंट निजी खातों में जा रहा था।

कई ग्राहकों के पास तो पेमेंट रसीदें भी मौजूद हैं, जिससे अपराधियों की पहचान करना अब आसान हो रहा है।

क्या हैं आगे की कार्रवाई और संभव बदलाव?

जांच टीम अब निम्नलिखित कदम उठाने की तैयारी कर रही है—

  • आरोपी कर्मचारियों पर FIR
  • बैंक खातों पर रोक
  • पेमेंट गेटवे से समन
  • QR कोड बदलने वालों की पहचान
  • शराब दुकानों में CCTV इंटेंसिव ऑडिट
  • सभी दुकानों में QR कोड की तस्दीक
  • डिजिटल पेमेंट सुरक्षा मानकों में सुधार

राज्य सरकार भी इस घटना को बेहद गंभीर मानती है। संभावना है कि भविष्य में
स्मार्ट QR ट्रैकिंग सिस्टम,
सरकारी QR लॉकिंग तकनीक,
और दैनिक ऑडिट अनिवार्य किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

बचेली शराब दुकान में सामने आया 1 करोड़ रुपये का ऑनलाइन पेमेंट घोटाला सिर्फ एक दुकान का मामला नहीं है। यह सरकारी सिस्टम की कमजोरियों, कर्मचारियों की मिलीभगत और डिजिटल सुरक्षा के अभाव का बड़ा उदाहरण है। यह घटना विभाग के लिए चेतावनी है कि अगर समय रहते सिस्टम मजबूत नहीं किया गया, तो ऐसे फ्रॉड आगे भी दोहराए जा सकते हैं।

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