उज्जैन में अनोखी मिसाल: दुल्हन अपूर्वा ओझा घोड़ी पर सवार होकर पहुंची दूल्हे को निमंत्रण देने
महाकाल की पवित्र नगरी उज्जैन में इन दिनों शादी–विवाह का मौसम पूरे शबाब पर है। ढोल-ढ़माके, रोशनी, बारातों और खुशियों के बीच एक ऐसी शादी देखने को मिली जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अक्सर शादियों में दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर दुल्हन के दरवाज़े पहुँचता है, लेकिन इस बार तस्वीर बिलकुल उलटी थी। उज्जैन की सड़कों पर दुल्हन अपूर्वा ओझा शाही घोड़ी पर सवार होकर अपने दूल्हे को शादी का निमंत्रण देने निकल चुकी थीं। यह दृश्य इतना अद्भुत और अनोखा था कि जिसने भी देखा, वह मुस्कुराए बिना नहीं रह सका।
दुल्हन बनी बाराती—उज्जैन की सड़कों पर दिखा अनोखा जुलूस
शनिवार की दोपहर उज्जैन की मुख्य सड़कों पर ढोल-बैंड की गूंज पहले जैसी ही थी, लेकिन इस जुलूस की खासियत थी—घोड़ी पर सजी–धजी, स्टाइलिश चश्मे लगाए हुए और दुल्हन के पूरे शृंगार में बैठी अपूर्वा ओझा। उनके साथ नाचते-गाते युवक-युवतियाँ किसी बारात से कम नहीं लग रहे थे। करीब डेढ़ घंटे तक चलता यह जुलूस शहर में चर्चा का विषय बना रहा।
पैदल चल रहे लोग, दुकानें खोलकर खड़े व्यापारी, तथा राहगीर—हर कोई मोबाइलबंद करने लगा। लोग कहते सुनाई दिए—
“वाह! ये हुई ना असली जेंडर इक्वैलिटी!”
“दुल्हन भी घोड़ी चढ़ सकती है, क्यों नहीं!”
कौन हैं दुल्हन अपूर्वा ओझा?
अपूर्वा ओझा अहमदाबाद में South Indian Bank में क्लास-वन ऑफिसर हैं। उज्जैन उनके मायका होने के कारण शादी के लिए शहर चुना गया। उनका विवाह बड़ौदा निवासी हर्ष दवे से तय हुआ था, जिनसे फेरे KGC होटल उज्जैन में होने वाले थे।
फेरों से पहले दूल्हे को स्वयं जाकर बुलाने की इच्छा ने उनकी शादी को खास बना दिया।
क्यों चढ़ी दुल्हन घोड़ी पर? परंपरा से जुड़ी प्रेरक कहानी
जब लोगों ने इस अनोखी परंपरा का कारण पूछा तो अपूर्वा मुस्कुराकर बोलीं—
“मज़ा सिर्फ लड़के ही क्यों लें?”
उन्होंने बताया कि यह राजस्थान के श्रीमाली समाज की एक पुरानी परंपरा है, जिसमें शादी से पहले दुल्हन घोड़ी पर चढ़कर दूल्हे के घर या उसके स्थान पर जाती है और प्रतीकात्मक रूप से उसे विवाह के लिए आमंत्रित करती है।
अपूर्वा ने कहा—
“हमारे समाज में महिलाओं को सदियों से बराबरी का स्थान मिला है। यह परंपरा उसी सोच का प्रतीक है। मैं इसे निभाकर गर्व महसूस कर रही हूँ।”
उनकी यह अनोखी घोड़ी सवारी देखने के लिए इंदौर, बेंगलुरु और बड़ौदा से आए उनके दोस्त भी इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बने।
महिला सशक्तिकरण का मजबूत संदेश
अपूर्वा ओझा का यह कदम केवल परंपरा निभाना ही नहीं था; यह समाज को एक सकारात्मक संदेश भी दे गया।
आज के समय में जहां महिलाएँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं—फिर चाहे वह शिक्षा हो, नौकरी, राजनीति, सेना या खेल—वहीं विवाह जैसे सामाजिक अवसर पर इस तरह की पहल समाज में समानता और आधुनिक सोच को दर्शाती है।
शादी के जुलूस में शामिल एक बुजुर्ग महिला ने कहा—
“हमने पहली बार दुल्हन को घोड़ी पर चढ़ते देखा। बहुत अच्छा लगा। लड़कियों को भी आज सब अधिकार मिल रहे हैं।”
उज्जैन में पहली बार—सोशल मीडिया पर वायरल
जैसे ही दुल्हन घोड़ी पर बैठी अपूर्वा का जुलूस शहर की गलियों से गुज़रा, सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल होने लगे।
दोनों हाथों में सजे मेहंदी, सिर पर दुल्हन का मुकुट, और आत्मविश्वास से भरी मुस्कान—इसने तस्वीर को यादगार बना दिया।
वीडियो पर लोग लिख रहे हैं—
- “शानदार! हर लड़की को ये हक मिलना चाहिए।”
- “राजस्थान की एक पुरानी परंपरा को आज के जमाने में निभाना—कमाल है।”
- “अपूर्वा ओझा… आप ट्रेंड बन जाएँगी।”
दूल्हे हर्ष दवे ने कहा—“बहुत Proud महसूस हुआ”
जब अपूर्वा जुलूस के साथ दूल्हे हर्ष दवे के पास पहुँचीं तो उनके चेहरे पर गर्व साफ दिखा।
उन्होंने कहा—
“यह मेरे लिए सरप्राइज था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि दुल्हन घोड़ी पर बैठकर मुझे लेने आएगी। यह पल जिंदगी भर याद रहेगा।”
दोनों परिवारों ने इस अनोखे आयोजन का दिल से स्वागत किया और कहा कि ऐसी परंपराएं समाज को नई सोच देती हैं।
परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
आज जहाँ युवा पीढ़ी आधुनिक शादियों में नई–नई थीम और ट्रेंड अपनाती है, वहीं अपूर्वा ने परंपरा और आधुनिकता का ऐसा सुंदर संगम पेश किया जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया।
दुल्हन के दोस्तों ने कहा—
“यह कदम महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। अपूर्वा ने समाज को दिखाया कि परंपराएं निभाते हुए भी हम आधुनिक विचार रख सकते हैं।”


