नई दिल्ली: राज्यसभा के उपसभापति सीपी राधाकृष्णन के पहले शीतकालीन सत्र से पहले सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण बुलेटिन जारी किया गया है। इस बुलेटिन में सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सदन में या बाहर चेयर के किसी भी निर्णय की आलोचना नहीं की जाएगी। साथ ही, नारेबाजी जैसे ‘जय हिंद’, ‘वंदे मातरम्’ या अन्य किसी प्रकार के उद्घोष की अनुमति नहीं होगी।
बुलेटिन में यह भी कहा गया है कि सदन में तख्तियां दिखाना, किसी अन्य सदस्य या मंत्री की आलोचना करना और उसके जवाब के समय अनुपस्थित रहना संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन माना जाएगा। सांसदों से अपेक्षा की गई है कि वे जवाब सुनने के लिए सदन में उपस्थित रहें। यह कदम सदन की मर्यादा और गंभीरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

राज्यसभा का शीतकालीन सत्र इस बार 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा और इसमें कुल 15 बैठकें होंगी। उपसभापति राधाकृष्णन के नेतृत्व में यह पहला सत्र है, इसलिए इसका राजनीतिक और पार्लियामेंटरी महत्व अधिक है। पिछले वर्षों में विपक्ष और सभापति के बीच मतभेदों के कारण कई बार विवाद पैदा हुए थे। इस बार बुलेटिन के जरिए सदस्यों को संसदीय शिष्टाचार का पालन करने और शांति बनाए रखने के लिए निर्देशित किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्देश विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि पारंपरिक नारेबाजी और चर्चा की स्वतंत्रता अब सीमित होगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि उपसभापति राधाकृष्णन के कार्यकाल में विपक्ष किस तरह का रुख अपनाता है और सदन की कार्यवाही कितनी सुव्यवस्थित रहती है।
