Operation Sindoor India Strategy :ऑपरेशन सिंदूर पर अंतरराष्ट्रीय सराहना: ब्रिटिश विशेषज्ञ बोले—भारत की रणनीति बदल गई | | 26/11 Mumbai Attack Anniversary
नई दिल्ली।
26/11 मुंबई हमलों के सत्रह वर्ष पूरे होते-होते भारत की सुरक्षा रणनीति और काउंटर-टेररिज्म नीति में व्यापक बदलाव दर्ज किए गए हैं। एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत अब पहले से कहीं अधिक सतर्क, सक्षम और निर्णायक बन चुका है। खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को लेकर विदेशों में जिस तरह की प्रतिक्रिया सामने आई है, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में एक निर्णायक मोड़ ले लिया है।
ब्रिटिश सुरक्षा विश्लेषक क्रिस ब्लैकबर्न ने कहा—“भारत की रणनीति 2025 के बाद स्पष्ट रूप से बदल गई है”
‘ग्लोबल ऑर्डर’ प्लेटफ़ॉर्म पर लिखे एक लेख में ब्रिटिश राजनीतिक एवं सुरक्षा विशेषज्ञ क्रिस ब्लैकबर्न ने Operation Sindoor India Strategy को भारत की नई सोच का “स्पष्ट संकेतक” बताया है। उनके अनुसार, मई 2025 में शुरू किया गया यह ऑपरेशन दर्शाता है कि भारत अब अपनी “लक्ष्मण रेखा” पार होने पर किसी भी आतंकी ढांचे, खासतौर पर लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के ठिकानों पर सीधी कार्रवाई करने में हिचकिचाता नहीं है।
26/11 के बाद भारत की सुरक्षा नीति में आया बड़ा बदलाव
1. तटीय सुरक्षा में क्रांतिकारी सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, 2008 की तुलना में भारत की Coastal Surveillance Network, इंटेलिजेंस-शेयरिंग मेकैनिज्म, और क्विक रिएक्शन फोर्सेज (QRF) की क्षमता कई गुना बढ़ चुकी है।
- समुद्र से होने वाली घुसपैठ की संभावनाएं पहले से बेहद सीमित
- हाई-टेक तटीय राडार चेन
- मरीन पुलिस और कोस्ट गार्ड के बीच वास्तविक-समय समन्वय
- मल्टी-एजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (MAOC) की क्षमता बढ़ी
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सब 26/11 Mumbai Attack Lessons से मिली सीख का सीधा परिणाम है।
ऑपरेशन सिंदूर—भारत की नई सामरिक सोच का प्रतीक
Operation Sindoor India Strategy के तहत की गई कार्रवाई यह दर्शाती है कि भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि प्रतिक्रियात्मक और सक्रिय नीति अपना रहा है। ब्लैकबर्न लिखते हैं:
“भारत ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि उसके नागरिकों या सीमाओं के खिलाफ पाकिस्तान-प्रेरित आतंकी खतरा बढ़ता है, तो वह जवाब देने में अब एक पल की भी देरी नहीं करता।”
ऑपरेशन सिंदूर क्यों बना चर्चा का विषय?
- सीमा पार मौजूद आतंकी ढांचों पर सटीक और तेज़ कार्रवाई
- इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन
- आतंकियों की गतिविधियों पर कड़ा प्रहार
- तटीय और जमीनी खतरों पर समान सतर्कता
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समुदाय ने इसे भारत की निर्णायकता का प्रतीक माना है—कुछ ऐसा, जिसकी लंबे समय से अपेक्षा की जा रही थी।
पाकिस्तान आधारित आतंकी नेटवर्क पर बढ़ती वैश्विक समझ
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 2008 की तुलना में आज Pakistan Based Terror Networks को लेकर विश्व समुदाय की समझ अधिक स्पष्ट है।
लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन नाम बदलते रहते हैं, लेकिन लक्ष्य वही रखते हैं—भारत में अस्थिरता फैलाना।
क्रिस ब्लैकबर्न लिखते हैं:
“ये संगठन नए मुखौटे पहन लेते हैं, लेकिन उनकी विचारधारा और उद्देश्यों में कोई बदलाव नहीं आता।”
उनके अनुसार, दुनिया की ढुलमुल कूटनीति ने इन नेटवर्कों को बार-बार बच निकलने का मौका दिया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अक्सर “शांतिपूर्ण संवाद” के पुराने रटारटाए सूत्रों की ओर लौट आता है, जबकि आतंकवाद की जटिलता कहीं अधिक गहरी है।
26/11 की बरसी—सिर्फ स्मरण नहीं, रणनीति पर पुनर्विचार का अवसर
रिपोर्ट में कहा गया है कि 26/11 Mumbai Attack Anniversary हर वर्ष भारत को यह याद दिलाती है कि:
- मुंबई को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह भारत की वित्तीय शक्ति, फिल्मी प्रतिष्ठा, और बहुसांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
- हमले की योजना पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के नेतृत्व ने बनाई थी।
- यह हमला भारत की सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव का कारण बना।
आज, 17 वर्ष बाद, भारत की सुरक्षा-रणनीति में वह कमजोरी नहीं है जिसकी वजह से 26/11 संभव हुआ था।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रवैया—अब भी कई सवाल
रिपोर्ट में यह भी आलोचना की गई कि कई देशों ने पाकिस्तान को “रणनीतिक सहयोगी” मानते हुए उसके आतंकी ढांचों को पर्याप्त दबाव में नहीं लिया।
यह पूछा गया—
- जब आतंकी नेटवर्क इतने शक्तिशाली, संगठित और वैश्विक हो चुके हैं तो दुनिया का रुख इतना नरम क्यों?
- क्या अंतरराष्ट्रीय राजनीति का संतुलन आतंकवाद के वास्तविक खतरे को समझने में बाधा है?
ब्लैकबर्न का तर्क है कि India Counter Terrorism Strategy ने जिस त्वरित बदलाव का प्रदर्शन किया है, उसकी नकल कई देशों को करनी चाहिए।
भारत की नई रणनीति: सक्रियता, सटीकता और त्वरित प्रतिक्रिया
“ऑपरेशन सिंदूर” को एक मॉडल ऑपरेशन के रूप में देखा जा रहा है, जिसने भारत के तीन बड़े बदलाव स्पष्ट किए:
1. Proactive Response (सक्रिय कार्रवाई)
अब भारत खतरे के इंतजार में नहीं बैठता; वह पहले ही संकेतों पर प्रतिक्रिया देता है।
2. Zero Tolerance (शून्य सहनशीलता) नीति
भारत अब यह संदेश दे चुका है कि उसकी सुरक्षा-सीमा लांघने की कीमत बहुत भारी होगी।
3. Modernised Security Infrastructure (आधुनिक सुरक्षा तंत्र)
तकनीक, सर्विलांस, इंटेलिजेंस और त्वरित कार्रवाई की संयुक्त रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है।
निष्कर्ष: ऑपरेशन सिंदूर ने बदल दिया भारत की सुरक्षा का अध्याय
ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है—
कि भारत अब 26/11 जैसी किसी भी चुनौती को केवल सहन नहीं करेगा, बल्कि उसे जन्म देने वाली संरचनाओं पर प्रहार भी करेगा।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह ऑपरेशन आने वाले वर्षों में भारत की काउंटर टेररिज्म पॉलिसी का आधार बनेगा और दुनिया के लिए भी एक मॉडल साबित होगा।
