उदार सागर जनकल्याण तीर्थ बड़ागांव में मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव: गर्भ कल्याणक (उत्तरार्द्ध) में उमड़ी भक्तों की अभूतपूर्व भीड़
आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज ने कहा—“जिंदगी वही सार्थक जो पंचकल्याणक में समर्पित हो”
घुवारा/बड़ागांव (धसान)। उदार सागर जनकल्याण तीर्थ बड़ागांव में चल रहे श्री मज्जिनेन्द्र जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के गर्भ कल्याणक (उत्तरार्द्ध) का आयोजन परम पूज्य आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में अत्यंत भव्यता, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। अलसुबह से देर रात तक निरंतर चलने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने सम्पूर्ण तीर्थ परिसर को अलौकिक दिव्यता से भर दिया।
प्रातः 6:30 बजे मंत्र-आराधना व गर्भ कल्याणक पूजन से हुई शुरुआत
सुबह 6:30 बजे से तीर्थ परिसर में मंत्र आराधना, नित्य अभिषेक, शांति धारा, गर्भ कल्याणक पूजन और वैदिक-जैन विधि अनुसार हवन संपन्न हुआ। जिनेन्द्र देव की अनंत शक्ति और पुण्य–प्रभावना को अनुभव कर भक्तगण मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक में तल्लीन रहे।
गर्भ कल्याणक जैन धर्म की वह महान घटना है जब तीर्थंकर के गर्भ में आने से संपूर्ण संसार पवित्रता और ऊर्जा से भर जाता है। इसी दिव्य स्मृति को जागृत करते हुए साधु-साध्वीगण, आचार्य संघ और भक्तों ने मनोभावपूर्वक पूजा कर पुण्य अर्जित किया।
आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज का प्रेरक प्रवचन—“27 में से 10 नक्षत्र कम हों तो कुछ नहीं बचता, वैसा ही है जीवन”
सुबह 9:15 बजे विशाल धर्मसभा में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी में एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए कहा—
“जैसे सम्राट अकबर के दरबार में 27 नक्षत्रों में से 10 के कम होने पर बीरबल ने कहा था कि कुछ भी शेष नहीं बचेगा—वैसे ही यदि हम जीवन के कीमती समय में से धर्म के 8 दिन भी घटा दें, तो हमारी जिंदगी भी ‘शून्य’ हो जाएगी।”
आचार्य श्री ने स्पष्ट कहा कि—
“जीवन कितना बीत गया, कितना बचा है—कोई नहीं जानता। परंतु जो भी समय है, यदि उसे पंचकल्याणक जैसे दिव्य प्रसंगों में नहीं लगाया, पूजा-अर्चना में नहीं लगाया, तो जीवन अधूरा ही रह जाएगा। जिनेन्द्र भगवान के पंचकल्याणक में सहभागी होना ही जीवन को सार्थक और धन्य बनाता है।”
उनकी वाणी सुनकर पंडाल में बैठे हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
सागर, जबलपुर, दमोह, ललितपुर, टीकमगढ़, छतरपुर, राजस्थान–महाराष्ट्र से उमड़ा जनसैलाब
उदार सागर जनकल्याण तीर्थ में आज श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था।
संपूर्ण पंडाल भक्तों से खचाखच भरा रहा।
भारी संख्या में श्रद्धालु निम्न क्षेत्रों से पहुंचे—
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सागर
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जबलपुर
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दमोह
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ललितपुर
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टीकमगढ़
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छतरपुर
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राजस्थान एवं महाराष्ट्र
पूरे परिसर में दिव्यता, भक्ति और आनंद का वातावरण व्याप्त रहा। तीर्थ स्थल की भव्य सजावट, जिनेंद्र भगवान के अलंकरण और धार्मिक झांकियों ने सभी का मन मोह लिया।
दोपहर 1 बजे सीमितन्नी क्रियाएं, 3:30 बजे नवीन बेदी संस्कार
दोपहर 1:00 बजे से पारंपरिक सीमितन्नी क्रियाएं अत्यंत विधि-विधान से सम्पन्न हुईं। तीर्थ में उपस्थित विद्वान पंडितों और साधु-साध्वियों ने शास्त्रीय अनुशासन के अनुरूप सभी क्रियाएं कराईं।
इसके बाद 3:30 बजे नवीन बेदी संस्कार सम्पन्न हुआ, जिसमें भक्तगणों ने अत्यंत श्रद्धा के साथ निमित्त-पूजा की। बेदी निर्माण जैन पंचकल्याणक का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग माना जाता है, क्योंकि इसी पर जिनबिंब प्रतिष्ठित होकर भगवान रूप में प्रकट होते हैं।
शाम 7 बजे श्रीजी की महाआरती—भक्ति से भर उठा वातावरण
शाम 7:00 बजे श्रीजी की भव्य महाआरती संपन्न हुई। हजारों दीपों की रोशनी और घंटों-घड़ियालों की ध्वनि से तीर्थ स्थल गूंज उठा।
भक्तों ने “जय जिनेंद्र” के उद्घोष के साथ भगवान की आरती की और दिव्य वातावरण से सराबोर हो गए।
इसके बाद 7:45 बजे शास्त्र सभा प्रवचन आयोजित हुई, जिसमें जैन आगमों और पंचकल्याणक महिमा पर आधारित उपदेश दिए गए।
रात्रि 8:30 बजे हुआ भावविभोर कर देने वाला ‘माता का जागरण व नाभिराय दरबार का मंचन’
रात्रि 8:30 बजे से माता का जागरण, माता का श्रृंगार, एवं छप्पन कुमारियों द्वारा भेंट सेवा के मनोहारी कार्यक्रमों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके पश्चात प्रस्तुत हुआ नाभिराय दरबार राज्य-व्यवस्था फलादेश का अद्भुत मंचन, जिसमें कलाकारों ने त्रिपुटि भाव, भक्ति और आध्यात्मिकता को जीवंत कर दिया। भक्तगण भावविभोर होकर इस दिव्य प्रस्तुति को देखते रहे।
तीर्थ क्षेत्र में दिखा अद्वितीय धार्मिक समन्वय—पंचकल्याणक को यादगार बना रहे आयोजन
उदार सागर जनकल्याण तीर्थ पिछले कई दिनों से पंचकल्याणक की अलौकिक ऊर्जा से सराबोर है।
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दिव्य सजावट
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विशाल पंडाल
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अनुशासित व्यवस्था
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प्रतिदिन की भक्ति-पूजा
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आचार्य श्री का मंगल सान्निध्य
इन सबने इस महोत्सव को जैन समाज के लिए ऐतिहासिक बना दिया है।


