इंदौर की सर्द सुबह में उमड़ा उत्साह, ‘रन इंदौर, वन इंदौर’ मैराथन में दिखा फिटनेस का अद्भुत जोश
रविवार की हल्की ठंड से घिरी हुई सुबह इंदौर के लिए बेहद खास रही। जैसे ही सूरज की पहली किरणें शहर पर पड़ीं, हजारों लोग हेल्थ अवेयरनेस का संदेश देते हुए सड़कों पर दौड़ पड़े। ‘रन इंदौर, वन इंदौर’ मैराथन का भव्य आयोजन दशहरा मैदान से शुरू हुआ, जहां हर उम्र के लोग फिटनेस के प्रति अपना जोश दिखाने पहुंचे। यह कार्यक्रम न सिर्फ एक खेल आयोजन था, बल्कि इंदौर की जनसहभागिता, स्वच्छता और स्वास्थ्य संस्कार का मजबूत प्रतीक भी बना।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का संदेश – स्वच्छता की तरह फिटनेस भी बने इंदौर की पहचान
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि इंदौर हर क्षेत्र में देश के लिए आदर्श स्थापित कर रहा है—चाहे बात स्वच्छता की हो, स्मार्ट सिटी की हो या नवाचारों की।
मुख्यमंत्री ने कहा—
“इंदौर की फिटनेस संस्कृति देश में नई पहचान बनाएगी। स्वच्छता की तरह ‘फिट इंदौर’ भी पूरे भारत में मॉडल बने।”
उनके संदेश ने प्रतिभागियों में अतिरिक्त ऊर्जा भर दी।
मैराथन का मार्ग और दौड़ की शुरुआत
दशहरा मैदान पर वंदे मातरम के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इसके बाद अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ की शुरुआत की।
मैराथन का मार्ग इस प्रकार रहा—
- दशहरा मैदान
- नरेंद्र तिवारी मार्ग
- रणजीत हनुमान रोड
- महूनाका
- अन्नपूर्णा मार्ग
- पुनः दशहरा मैदान
सड़कों के दोनों तरफ खड़े लोगों का उत्साह प्रतिभागियों को लगातार प्रोत्साहित करता रहा।
तीन, पाँच और सात किलोमीटर की दौड़ में हर आयु वर्ग की भागीदारी
मैराथन को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया—
- 3 किलोमीटर
- 5 किलोमीटर
- 7 किलोमीटर
इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई परिवार पूरे समूह के रूप में दौड़ में शामिल हुए, जिससे यह आयोजन केवल एक स्पोर्ट्स इवेंट नहीं बल्कि परिवारों के बीच सामूहिक गतिविधि का भी अनोखा उदाहरण बन गया।
इंदौर का बढ़ता प्रभाव—विजयवर्गीय बोले: जनता की भागीदारी ही शहर की पहचान
जल संसाधन मंत्री और इंदौर के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने मैराथन में उमड़ी भीड़ पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा—
“इंदौर दुनिया का ध्यान खींच रहा है। स्वच्छता, प्रशासन, नवाचार—हर क्षेत्र में यह शहर मिसाल है। यह सब सरकार नहीं, जनता की भागीदारी से संभव हुआ है।”
उन्होंने प्रतिभागियों के उत्साह को देखकर कहा कि इंदौर की यही ऊर्जा उसे देश के सबसे आगे रहने वाले शहरों में शामिल रखती है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव: दौड़ सामूहिक जागरूकता की मिसाल
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि फिटनेस की शुरुआत दौड़ से होती है और इंदौर की यह मैराथन एक बार फिर शहर की सामूहिक जागरूकता का प्रतीक बनी है।
उन्होंने कहा—
“इंदौर की असली शक्ति उसकी जनता है। यहाँ कोई भी अभियान सरकारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर चलता है। यही वजह है कि स्वच्छता में इंदौर लगातार नंबर 1 है।”
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट: इंदौर का नवाचार पूरे देश को प्रेरित करता है
मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी मैराथन के दौरान ऊर्जा से भरपूर माहौल की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह इंदौर स्वच्छता में लगातार अव्वल रहा है, उसी तरह स्वास्थ्य जागरूकता में भी यह शहर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा—
“रन विथ मेयर जैसे कार्यक्रम इंदौर की सामाजिक एकता और नवाचार की असली पहचान हैं।”
दिव्यांग धावकों के लिए विशेष व्यवस्थाएँ—सैकड़ों ने किया शानदार प्रदर्शन
मैराथन की सबसे प्रेरक झलक दिव्यांग धावकों का उत्साह रहा। उनके लिए विशेष प्रबंध किए गए—
- व्हीलचेयर रैंप
- विशेष सहायक टीमें
- मेडिकल टीम
- हाइड्रेशन पॉइंट्स
सैकड़ों दिव्यांग प्रतिभागियों ने पूरे जोश के साथ दौड़ में हिस्सा लिया। उनके हौसले से पूरे आयोजन का माहौल और भी जीवंत हो गया।
इंदौर—स्वच्छता से फिटनेस तक नंबर 1 बनने की राह पर
इंदौर को स्वच्छता में लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है। अब शहर प्रशासन और जनता दोनों मिलकर स्वास्थ्य और फिटनेस को भी इंदौर की नई पहचान बनाने में जुटे हैं।
इस मैराथन ने पूरे शहर को यह संदेश दिया कि—
- फिटनेस कोई विकल्प नहीं, आदत है
- स्वस्थ शहर ही सशक्त शहर बनता है
- जनभागीदारी से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है
निष्कर्ष—मैराथन ने दिया स्वच्छता, स्वास्थ्य और एकता का संदेश
‘रन इंदौर, वन इंदौर’ मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं था, बल्कि यह शहर की सोच, जागरूकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बना। हजारों लोगों ने मिलकर यह दिखा दिया कि इंदौर केवल स्वच्छता में ही नहीं, बल्कि फिटनेस संस्कृति में भी देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
इंदौर की जनता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया—
“इंदौर केवल शहर नहीं, एक आंदोलन है।”
