भारतीय किसान यूनियन मंच ने किसानों की समस्याओं को लेकर कलेक्टर के नाम एसडीएम नागदा को सौंपा ज्ञापन | BKU Farmers Protest Nagda News
नागदा जनपद, 22 नवंबर 2025:
भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रदेश अध्यक्ष कवि देवसिंह गुर्जर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान शुक्रवार को एसडीएम कार्यालय नागदा पहुंचे। किसानों ने यहां जिलाधीश (कलेक्टर) के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें कृषि कार्य से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं और प्रशासनिक लापरवाही की ओर ध्यान आकर्षित किया गया। किसान यूनियन का कहना है कि रबी सीजन के महत्वपूर्ण समय में किसान कई संकटों से जूझ रहे हैं, जिनका तत्काल समाधान बेहद जरूरी है।
मुख्य मांगें: किसानों ने बिजली, ट्रांसफार्मर, नीलगाय नुकसान, फसल बीमा और नामांतरण प्रक्रिया में सुधार की उठाई आवाज
ज्ञापन में किसानों ने विस्तार से उन समस्याओं का उल्लेख किया जिनके कारण किसान समुदाय आर्थिक और मानसिक दबाव झेल रहा है। ज्ञापन के मुख्य बिंदु निम्न प्रकार रहे—
1. रबी सीजन में रात्रिकालीन बिजली बंद कर दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाए
किसानों ने बताया कि इस समय रबी की फसलें बुवाई और सिंचाई के महत्वपूर्ण चरण में हैं।
सर्दियों में रात के समय अत्यधिक ठंड होने के कारण सिंचाई करना किसानों के लिए बेहद कठिन होता है।
यूनियन का कहना है—
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रात की बजाय दिन में पर्याप्त बिजली आपूर्ति की जाए,
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ताकि फसलें सही समय पर सिंचित हो सकें और किसान असुविधा से बच सकें।
किसानों के अनुसार कई बार बिजली रात में दी जाती है, जिससे ठंड के कारण सिंचाई करना जोखिम भरा और मुश्किल हो जाता है।
2. क्षतिग्रस्त बिजली खंभों और लटकते तारों की मरम्मत की मांग
कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के खंभे टूटी या झुकी हुई हालत में खड़े हैं।
उनसे लटकते हुए तार खतरा पैदा कर रहे हैं, खासकर रात के समय दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
किसानों ने मांग की—
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विद्युत विभाग तुरंत सर्वे कराकर
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क्षतिग्रस्त खंभों और ढीले तारों की मरम्मत करवाए,
ताकि जनहानि से बचा जा सके।
3. बढ़े हुए बिजली लोड के चलते ट्रांसफार्मर क्षमता बढ़ाई जाए
रबी सीजन में हर किसान सिंचाई के लिए पंप का उपयोग करता है।
एक साथ बिजली का भार बढ़ने से—
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ट्रांसफार्मर फुंक जाते हैं,
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सिंचाई रुक जाती है,
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और किसानों को आर्थिक नुकसान होता है।
किसानों ने यह भी कहा कि कई गांवों में पुराने और कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगे हैं।
इसलिए ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।
4. 60-40 योजना को पुनः लागू करने की मांग
किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से पुरानी 60-40 योजना को फिर से लागू करने की मांग की।
उनका कहना है कि इस योजना से किसानों को सुविधा और राहत मिलती थी।
इसे फिर से शुरू करना उनके हित में होगा।
5. नीलगाय से हो रहे फसल नुकसान पर नियंत्रण और कार्रवाई की मांग
वर्तमान में कई गांवों में नीलगायों का आतंक बढ़ गया है।
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नीलगायें किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं।
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रात में फसल चरने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है।
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साथ ही सड़क पर दौड़ती हुई नीलगायें राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी खतरा बन रही हैं।
किसान यूनियन ने प्रशासन से मांग की कि:
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नीलगाय नियंत्रण हेतु तुरंत कार्रवाई की जाए
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और वन विभाग तथा प्रशासन मिलकर ठोस योजना बनाए।
6. राहत राशि से वंचित किसानों को तुरंत भुगतान देने की मांग
किसानों ने बताया कि कई किसानों को अब तक राहत राशि नहीं मिली, जबकि वे वास्तविक नुकसान झेल चुके हैं।
इसलिए यूनियन की मांग है कि—
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ऐसे सभी किसानों का सत्यापन करवाकर
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राहत राशि का भुगतान शीघ्र किया जाए।
7. फसल बीमा क्लेम राशि (2023-24 और वर्तमान वर्ष) किसानों को नहीं मिली
किसानों ने बताया कि—
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वर्ष 2023-24 के फसल बीमा क्लेम कई किसानों को नहीं मिले हैं।
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चालू वर्ष के बीमा क्लेम भी लंबित पड़े हैं।
इससे किसान दोहरी परेशानी में हैं।
यूनियन ने प्रशासन से मांग की कि बीमा कंपनियों को निर्देश जारी कर
तत्काल क्लेम राशि किसानों के खातों में जमा करवाई जाए।
8. सहकारी समितियों में खाद की कमी दूर की जाए
एक बड़ी समस्या खाद की कमी की भी है।
कई सहकारी समितियों में खाद उपलब्ध नहीं होने से किसानों को बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदना पड़ रहा है।
किसानों ने मांग की—
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समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए,
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ताकि किसानों को परेशानी न हो और कालाबाज़ारी भी रुके।
9. जमीन नामांतरण (Mutation) की धीमी प्रक्रिया को तेज करने की मांग
किसानों ने प्रशासन का ध्यान जमीन के नामांतरण (नामांतर) की धीमी प्रक्रिया पर भी दिलाया।
कई मामलों में—
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पटवारियों के ट्रांसफर
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या कार्यवाही में देरी
के कारण किसानों को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
किसानों ने इस प्रक्रिया को समयबद्ध और सरल बनाने की मांग की।
कई संगठन पदाधिकारी और किसान रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में किसान और संगठन पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- सुरेंद्र सिंह गुर्जर (राष्ट्रीय सचिव)
- देवीलाल चंद्रवंशी (जनपद उपाध्यक्ष)
- सुरेश नंदेड़ा बेरछा
- दिनेश अटलवदा
- संजू गुर्जर जलवाल
- देवेंद्र राजपूत
- दरबार सिंह पंवार
- कान्हा भीमपुरा
- दुलेसिंह पटेल
- कमल गुर्जर
- विजय गुर्जर जलवाल
- लखन गुर्जर (वि. स. अध्यक्ष)
- पप्पू सिंह पंवार
- अर्जुन गुर्जर
- सुरेश गुर्जर जलोदिया
- समर्थ गुर्जर
- ईश्वर गुर्जर राजगढ़
- विनोद धाकड़ बनवाड़ा
- अनिल चौधरी
- मांगीलाल
- पवन
- रामसिंह चौधरी
- राधेश्याम बोड़ाना
आदि किसान साथी शामिल थे।
निष्कर्ष
भारतीय किसान यूनियन मंच द्वारा उठाई गई समस्याएं किसानों की जमीनी हकीकत बयान करती हैं।
रबी सीजन के बीच—बिजली संकट, खाद की कमी, नीलगायों का आतंक, फसल बीमा क्लेम और राहत राशि में देरी जैसे मुद्दे किसानों के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं।
किसान यूनियन ने कलेक्टर तक अपनी आवाज पहुंचाकर प्रशासन से तत्काल और प्रभावी समाधान की मांग की है।



