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Yamuna River Pollution पर Delhi High Court सख्त, Yamuna Foam और DSIIDC–DPCC Report में खुलीं खामियां, Yamuna Cleaning Plan पर सवाल

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Published On: 22 November 2025
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Yamuna River Pollution: यमुना प्रदूषण पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, कहा—“नदी की स्थिति बेहद खराब, 27 क्षेत्रों में कोई काम नहीं”


प्रस्तावना: यमुना नदी का बिगड़ता हाल और अदालत की कड़ी टिप्पणी

दिल्ली में लगातार बढ़ते Yamuna River Pollution पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। हर साल यमुना नदी में जहरीले झाग, गंदे नाले, औद्योगिक कचरे और ट्रीटमेंट प्लांट्स की खराब स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन 22 नवंबर 2025 की सुनवाई में अदालत ने सीधे कहा कि नदी की हालत “बहुत ज्यादा खराब” है और संबंधित विभाग “समय पर कोई ठोस काम नहीं कर रहे।”

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह की बेंच ने DSIIDC, MCD, DDA, DPCC और DJB की रिपोर्टों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि अगर इसी तरह काम की लापरवाही रही तो विभागों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार: “27 क्षेत्रों में कोई योजना लागू नहीं, 2.5 करोड़ रु. रोके बैठे हैं”

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि:

  • 27 औद्योगिक क्षेत्रों में यमुना की सफाई से जुड़ी कोई भी योजना पूरी तरह लागू नहीं है।

  • ट्रीटमेंट सिस्टम काम नहीं कर रहा, इसलिए प्रदूषण बढ़ रहा है।

  • DSIIDC की ओर से 2.5 करोड़ रुपये रोककर रखने की वजह से काम आगे नहीं बढ़ा।

अदालत ने सवाल पूछा—जब कैबिनेट ने 2023 में प्लान को मंजूरी दे दी थी, तब 2025 तक रिपोर्ट आने में इतनी देरी क्यों हुई? कोर्ट ने इसे “गंभीर प्रशासनिक लापरवाही” बताया।

कोर्ट ने कहा—जरूरत पड़ी तो DSIIDC बंद करने पर विचार हो सकता है

सुनवाई के दौरान अदालत ने DSIIDC को फटकारते हुए कहा कि कामकाज की रफ्तार बेहद धीमी है और इस तरह प्रदूषण नियंत्रण संभव ही नहीं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि:

“अगर इसी तरह काम चलता रहा, तो DSIIDC को बंद करने पर भी विचार किया जा सकता है।”

यह टिप्पणी साफ दिखाती है कि कोर्ट अब यमुना प्रदूषण पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करना चाहता।

यमुना नदी में जहरीला झाग: Yamuna River Foam का बढ़ता खतरा

सुनवाई के दिन यानी 22 नवंबर को यमुना नदी पर जहरीले झाग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल थीं।
नदी में खड़े मजदूर झाग हटाते नजर आए, जिनकी वजह से Yamuna River Foam फिर से चर्चा में आ गया।

कोर्ट ने इसे “लंबे समय से जारी गंदे पानी के अनियंत्रित बहाव” का परिणाम बताया।

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3 सदस्यों की समिति का गठन: DSIIDC, MCD और DDA मिलकर जांच करेंगे

कोर्ट ने आदेश दिया कि:

  • DSIIDC

  • दिल्ली नगर निगम (MCD)

  • दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA)

की एक 3-सदस्यीय कमेटी बनाई जाए, जो:

  1. इंडस्ट्रियल एरिया में बनाए गए लेआउट प्लान की संयुक्त जांच करेगी।

  2. अप्रूवल प्रक्रिया को तेज करेगी।

  3. दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंपेगी।

इसके साथ ही अदालत ने DSIIDC को निर्देश दिया कि 2 हफ्तों में MCD को 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाए, ताकि काम को रोका न जा सके।

DPCC की रिपोर्ट ने खोली पोल: CETPs की हालत बेहद खराब

दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (DPCC) ने बताया कि:

  • कई CETPs (Common Effluent Treatment Plants) बिल्कुल खराब स्थिति में हैं।

  • इन प्लांटों में ट्रीटमेंट की क्षमता कम है।

  • कई प्लांटों में मेंटेनेंस महीनों से नहीं हुआ है।

कोर्ट ने इस रिपोर्ट को “बहुत ज्यादा चौंकाने वाला” बताया और पूछा कि इतने सालों से CETPs की मॉनिटरिंग कैसे हो रही थी?

दिल्ली जल बोर्ड पर भी सवाल: क्या STP से निकलने वाला पानी फिर से नाले में जा रहा है?

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की स्टेटस रिपोर्ट पर भी अदालत ने गंभीर टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा कि दो मुख्य समस्याएँ हैं:

  1. STP में पानी सही से साफ हो रहा है या नहीं—इसकी नियमित मॉनिटरिंग नहीं हो रही।

  2. कई जगहों पर ट्रीट किया गया पानी वापस नाले में जाकर गंदे पानी से मिल रहा है, जिससे पूरा काम बेकार हो जाता है।

कोर्ट ने कहा:

“अगर ट्रीटेड वाटर पार्कों और हरित क्षेत्रों में नहीं पहुँच रहा और फिर से सीवेज में जा रहा है, तो यह आपकी कोशिशों की विफलता है।”

अदालत ने निर्देश दिया कि पाइपलाइन सिस्टम का पुन: मूल्यांकन किया जाए ताकि साफ पानी सही जगह पहुंचे।

नए प्लांटों और रीडेवलपमेंट योजनाओं में देरी: कोर्ट ने पूछा—रुकावट कहाँ है?

अदालत ने DJB और DPCC से यह रिपोर्ट मांगी कि:

  • पुराने प्लांटों की मरम्मत कब होगी?

  • नए प्लांट बनाने में देरी का क्या कारण है?

  • जिन प्लांटों का विस्तार होना था, वह कब पूरा होगा?

कोर्ट ने कहा कि दिसंबर की सुनवाई में इस पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।

औद्योगिक क्षेत्रों में गंदा पानी सबसे बड़ी समस्या

कोर्ट के अनुसार, यमुना में प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है:

  • औद्योगिक इकाइयों का untreated water

  • नालों का बगैर ट्रीटमेंट नदी में बहना

  • CETP और STP के सिंक न होना

  • पाइपलाइन का गलत नेटवर्क

कोर्ट ने विभागों को तत्काल मिलकर जमीन पर काम तेज करने को कहा।

निष्कर्ष: अब अदालत ने साफ कह दिया—यमुना सफाई में बहाना नहीं चलेगा

दिल्ली हाईकोर्ट की यह कड़ी चेतावनी दिखाती है कि:

यमुना सफाई अब सिर्फ कागजों पर नहीं चलेगी
विभागों को समय सीमा में काम करना अनिवार्य होगा
रिपोर्टों में देरी या फंड रोकने पर विभागों के खिलाफ कार्रवाई संभव है

दिल्ली में Yamuna River Pollution और Yamuna Foam अब हर साल की समस्या नहीं रहनी चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यमुना नदी की हालत बेहद चिंताजनक है, और अगर अब भी विभाग नहीं चेते, तो कठोर कदम उठाए जाएंगे।

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