अनिरुद्धाचार्य का हरिद्वार में बड़ा बयान: ‘बॉलीवुड फैला रहा लव जिहाद’, सनातन शिक्षा और संस्कृति संरक्षण पर जोर
हरिद्वार में आयोजित विश्व सनातन महापीठ के भव्य कार्यक्रम के दौरान कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज और कई प्रमुख संतों ने देश की शिक्षा व्यवस्था, सांस्कृतिक सुरक्षा, धार्मिक मूल्यों और समाज में बढ़ते बदलावों को लेकर अपनी बातें रखीं। कार्यक्रम के दौरान अनिरुद्धाचार्य महाराज का बॉलीवुड को लेकर दिया गया बयान चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।
‘बॉलीवुड फैला रहा लव जिहाद’ — अनिरुद्धाचार्य का आरोप
मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने हरिद्वार के अमेरिकन आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि कुछ फिल्में और बॉलीवुड का एक वर्ग समाज में गलत संदेश फैला रहा है। उनके अनुसार, “भारत में बॉलीवुड लव जिहाद को बढ़ावा दे रहा है और इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।”
हालांकि यह बयान उनके व्यक्तिगत विचार थे, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कई संतों ने भी सांस्कृतिक सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि संतों का कर्तव्य हमेशा से सनातन धर्म की रक्षा करना रहा है और आज भी वही जिम्मेदारी पहले की तरह महत्वपूर्ण है। समाज को भ्रमित करने वाले तत्वों पर रोक लगनी चाहिए ताकि युवा पीढ़ी सही दिशा में बढ़ सके।
शिक्षा व्यवस्था पर अनिरुद्धाचार्य के सुझाव
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि सीबीएसई बोर्ड का पाठ्यक्रम दिशा के लिहाज से अच्छा है, लेकिन बच्चों को केवल आधुनिक विज्ञान ही नहीं, बल्कि राम, लक्ष्मण, भरत और अन्य आदर्श चरित्रों के जीवन मूल्यों की शिक्षा भी दी जानी चाहिए।
उनका कहना था कि:
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शिक्षा में संस्कार और संस्कृति दोनों का संतुलन जरूरी है
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वैदिक गणित जैसी भारतीय प्राचीन विधाएं बच्चों को अधिक सक्षम बनाती हैं
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विज्ञान के साथ-साथ अध्यात्म और नैतिक शिक्षा को भी स्कूलों में स्थान मिलना चाहिए
उन्होंने कहा, “भारत की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो ज्ञान के साथ चरित्र भी गढ़े। केवल करियर ही नहीं, संस्कारी नागरिक भी बनाना हमारा उद्देश्य होना चाहिए।”
देवकीनंदन ठाकुर ने उठाई ‘सनातन बोर्ड’ गठन की मांग
कार्यक्रम में उपस्थित देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने भी सनातन धर्म की सुरक्षा और भावी पीढ़ी में धार्मिक शिक्षण को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि जैसे अन्य धर्मों में धार्मिक शिक्षा अनिवार्य रूप से दी जाती है, उसी प्रकार सनातन धर्म के बच्चों के लिए एक ‘सनातन बोर्ड’ का गठन किया जाना चाहिए।
उनका तर्क था कि धर्म को मजबूत करने के लिए एक संगठनात्मक ढांचा जरूरी है। इस बोर्ड के माध्यम से:
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बच्चों को सनातन संस्कृति
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शास्त्रों का अध्ययन
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नैतिक मूल्यों की शिक्षा
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भारतीय अध्यात्म की समझ
सुनिश्चित की जा सकेगी।
इसके साथ ही उन्होंने तीर्थ स्थलों को मांस और मदिरा मुक्त घोषित किए जाने की जोरदार मांग रखी। संतों का कहना था कि धार्मिक नगरी में यह वातावरण संस्कृति और श्रद्धा के अनुरूप नहीं है और सरकारों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
कार्यक्रम में शामिल रहे अनेक संत और धर्माचार्य
विश्व सनातन महापीठ के इस कार्यक्रम में कई प्रमुख संत उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज
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परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि महाराज
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कई अन्य प्रसिद्ध संत, धर्माचार्य और समाजसेवी
सभी संतों ने धर्म, शिक्षा, संस्कृति और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर विचार साझा किए।
साथ ही हरिद्वार को मांस और मदिरा मुक्त शहर बनाने की मांग को दोहराया गया। संतों ने कहा कि तीर्थस्थल की पवित्रता बनाए रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
हरिद्वार में बन रहा विशाल ‘विश्व सनातन महापीठ’
कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि हरिद्वार में लगभग 100 एकड़ भूमि पर विशाल विश्व सनातन महापीठ का निर्माण कार्य चल रहा है। यह प्रोजेक्ट बाबा हठयोगी और रामविशाल दास महाराज के नेतृत्व में और देशभर के संतों व समाजसेवियों के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।
इस महापीठ में निम्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी:
- विश्व सनातन संसद
- विभिन्न प्रमुख मंदिरों के प्रतिरूप
- आधुनिक विश्वविद्यालय
- चिकित्सालय
- गौशाला
- आध्यात्मिक शोध केंद्र
इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना और सनातनियों को एक मंच पर एकजुट करना है।
पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव से जुड़े बयान पर भी चर्चा
कार्यक्रम के दौरान देश के अन्य राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी हल्की चर्चा हुई। इसी क्रम में कुछ संतों ने हाल ही में टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। हालांकि कार्यक्रम का मुख्य फोकस धर्म, शिक्षा और संस्कृति रहा।
सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर बढ़ रही जागरूकता
हरिद्वार में आयोजित यह कार्यक्रम केवल संतों के संवाद का मंच नहीं था, बल्कि इसमें देशभर से आए भक्तों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर देश की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में सामूहिक प्रयास की इच्छा जताई।
सभी संतों का मानना था कि आधुनिकता और परंपरा के बीच एक संतुलन बनाकर ही आगे बढ़ा जा सकता है।
