भोपाल: पूर्व उपराष्ट्रपति , जगदीप धनखड़ भोपाल के रविंद्र भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने देश के समकालीन मुद्दों और समाज में फैलते गलत नैरेटिव पर अपने विचार रखे।
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद पहला बड़ा सार्वजनिक संबोधन
धनखड़ ने कहा, “भगवान करे कोई नैरेटिव के चक्कर में न फंसे। जो समझना नहीं चाहते, वे हर हाल में बात को धूमिल करेंगे। जो जागकर भी सोया हुआ है, उसे जगा नहीं सकते।” उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक संबोधन था। उन्होंने बताया कि अब वे अंग्रेजी में संबोधन करेंगे ताकि उनके विचारों को गलत ढंग से पेश न किया जा सके।

पूर्व उपराष्ट्रपति ने देशभक्ति और कर्तव्य निभाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “बल प्रयोग भले कर लो, लेकिन जागकर सोए व्यक्ति को नहीं जगा सकते। अपने कर्तव्यों को छोड़ना नहीं चाहिए। देश के प्रति अपने भाव को समझो और वही करो जो देशहित में हो।” उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें, अध्ययन करते रहें और समाज की सुदृढ़ता के लिए प्रयासरत रहें।

डॉ. मनमोहन वैद्य ने धनखड़ को अपना अभिभावक बताते हुए कहा कि उनका लेखन संघ विरोधियों के अकारण विरोध को देखकर प्रेरित हुआ। पुस्तक विमोचन में वृंदावन के श्री आनंदम धाम आश्रम के पीठाधीश्वर ऋतेश्वर महाराज और वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
धनखड़ ने कहा कि व्यक्ति अकेले नहीं लड़ सकता, लेकिन संस्था लड़ सकती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश बदल रहा है और अतीत के गौरव को याद रखते हुए हमें आगे बढ़ना चाहिए।
