कैमरून (अफ्रीका) में फंसे आगरा निवासी धीरज जैन परिवार की सुरक्षा के लिए भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की त्वरित अपील
कैमरून में गंभीर संकट में आगरा का भारतीय परिवार
कैमरून (वेस्ट अफ्रीका) में फंसे आगरा के निवासी धीरज जैन, उनकी पत्नी सुप्रिया जैन तथा डेढ़ वर्षीय मासूम बच्ची राघवी बेहद गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।
कंपनी द्वारा पासपोर्ट जब्त करना, झूठा केस दर्ज करना, तथा आर्थिक सहायता रोक देना—इन सभी ने परिवार को अत्यंत चिंताजनक स्थिति में पहुँचा दिया है।
पीड़ित परिवार के पास अब भोजन, दवा, यहाँ तक कि बच्ची के दूध तक के लिए पैसे नहीं बचे हैं।
कैमरून में स्थित भारतीय दूतावास से भी अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिल सकी है, जिसके कारण हालात और गंभीर बने हुए हैं।
इस अत्यंत संवेदनशील मामले को देखते हुए भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव का बयान: “विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता हो”
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
“विदेश में फंसे भारतीयों की सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। धीरज जैन और उनका परिवार गंभीर जीवन संकट में है। संगठन की ओर से माननीय प्रधानमंत्री जी और विदेश मंत्रालय को आधिकारिक पत्र भेजा गया है, जिसमें उनके सुरक्षित भारत लौटने की अपील की गई है।”
उन्होंने कहा कि डेढ़ साल की बच्ची की सुरक्षा को देखते हुए सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा यादव: “बच्ची के पास दूध और दवा नहीं, स्थिति बेहद दुखद”
ट्रस्ट के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा यादव ने भावुक अपील करते हुए कहा:
“जिस परिवार के पास बच्ची के दूध और दवा तक के पैसे न हों, उनकी स्थिति बेहद दर्दनाक है। विदेशी धरती पर एक भारतीय परिवार ऐसी यातना झेल रहा है—यह बहुत चिंता का विषय है।”
उन्होंने मांग की कि विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास तुरंत Emergency Travel Document (ETD) जारी करे, ताकि परिवार को शीघ्र भारत वापस लाया जा सके।
राष्ट्रीय सचिव शिवम तिवारी: “पासपोर्ट की अवैध जब्ती मानव अधिकारों का उल्लंघन”
ट्रस्ट के राष्ट्रीय सचिव शिवम तिवारी ने कहा:
“पासपोर्ट की अवैध जब्ती और झूठे केस के आधार पर परिवार को कैमरून में रोके रखना अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकारों का स्पष्ट और गंभीर उल्लंघन है। संगठन ने इस मामले को उच्च प्राथमिकता पर लेकर केंद्र सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है।”
उन्होंने आश्वासन दिया कि ट्रस्ट परिवार के सुरक्षित भारत लौटने तक निरंतर फॉलो-अप करता रहेगा।
मीडिया प्रभारी व पदाधिकारियों की अपील: “सभी प्रमाण बताते हैं कि परिवार तत्काल संकट में है”
मीडिया प्रभारियों जीवन लाल जैन (चाय वाले), भावेश नाहर, सुश्री सोना जैन, अनिल जैन, अंकित जैन, ओमप्रकाश टांडी ने भी संयुक्त रूप से भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
उनका कहना है:
“हमें मिले वीडियो और दस्तावेज़ साफ दिखाते हैं कि परिवार तुरंत मदद का मोहताज है। मीडिया से अनुरोध है कि इस गंभीर मानवतावादी संकट को प्रमुखता से उठाएं, ताकि सरकारी स्तर पर शीघ्र कार्रवाई हो सके।”
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भावुक अपील
ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, संतोष सिंह पवार, श्रीमती सौंपा चटर्जी, श्रीमती अनीता दुबे और श्रीमती मधु शर्मा ने कहा:
“यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि मानवता का मामला है। एक माँ और उसकी मासूम बच्ची संकट में हों—यह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को विचलित करने के लिए पर्याप्त है। सरकार को त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।”
संगठन लगातार पीड़ित परिवार से संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।
कंपनी द्वारा धमकी और उत्पीड़न का आरोप, जांच की मांग
परिवार ने कंपनी पर दबाव बनाने, धमकाने और पासपोर्ट न लौटाने जैसी गंभीर शिकायतें दर्ज की हैं।
ट्रस्ट ने मांग की है कि:
- कंपनी द्वारा किए गए उत्पीड़न की जांच हो
- स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी निगरानी की जाए
- अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकारों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाए
ट्रस्ट की ओर से भारत सरकार को चार प्रमुख मांगें
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को भेजे पत्र में निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- परिवार की तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- पासपोर्ट वापस दिलाया जाए या तत्काल ETD जारी किया जाए।
- परिवार को सुरक्षित भारत वापस लाने की व्यवस्था की जाए।
- कंपनी एवं स्थानीय पुलिस द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न की निष्पक्ष जांच की जाए।
प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को आधिकारिक पत्र भेजा गया
ट्रस्ट ने बताया कि पूरा दस्तावेज़, वीडियो और प्रमाण संलग्न करते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी, विदेश मंत्री, और विदेश मंत्रालय को विस्तृत पत्र भेजा जा चुका है।
इसमें परिवार की गंभीर स्थिति को ध्यान में रखकर तुरंत सहायता प्रदान करने की अपील की गई है।
निष्कर्ष: एक भारतीय परिवार की ज़िंदगी दांव पर—सरकारी हस्तक्षेप की तात्कालिक आवश्यकता
कैमरून में फंसे आगरा के धीरज जैन, उनकी पत्नी और मासूम बच्ची की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकारों के उल्लंघन, पासपोर्ट जब्ती और आर्थिक संकट ने इसे एक मानवतावादी आपदा बना दिया है।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने इसे उच्च प्राथमिकता का मुद्दा मानते हुए सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
अब पूरा देश उम्मीद कर रहा है कि भारत सरकार शीघ्र हस्तक्षेप कर इस परिवार को सुरक्षित भारत वापस लाएगी।
