इंदौर की बीआरटीएस कॉरिडोर पर विवाद थम नहीं रहा है , इसे ध्वस्त करने का सदेश 27 फरवरी को आया था। लेकिन इसके बावजूद भी साढ़े 11 किलोमीटर लंबी कॉरिडोर से अब तक एक किलोमीटर हिस्सा भी ध्वस्त नहीं हो सका है।
ठेकेदार एजेंसी ने प्रस्ताव दिया है कि दिन में बस स्टॉप हटाए जाएं और रात में रैलिंग तोड़ी जाए। ध्वस्तीकरण के बाद मिलने वाली सामग्री का उपयोग ठेकेदार को मिलेगा, जिसके बदले उसे नगर निगम को 2.5 करोड़ रुपये जमा करने होंगे। हालांकि कम लाभ होने के कारण ठेकेदार इस काम को अनिच्छा से कर रहा है।
हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी
हाईकोर्ट ने बीआरटीएस हटाने में हो रही लगातार देरी पर कड़ी नाराज़गी जताई। कोर्ट ने अधिकारियों को याद दिलाया कि भोपाल में बीआरटीएस मात्र 9 दिनों में हट गया था, जबकि इंदौर में 9 महीने बीत जाने के बावजूद काम पूरा नहीं हो सका।
अदालत ने टिप्पणी की कि जब किसी का मकान तोड़ना होता है, तो अधिकारी तुरंत मौके पर मशीनरी के साथ पहुंच जाते हैं, लेकिन बीआरटीएस हटाने में इतनी सुस्ती क्यों बरती जा रही है। अगली सुनवाई 26 नवंबर को तय की गई है, और कलेक्टर व नगर निगम आयुक्त को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पांच लाख में बने थे बस स्टॉप
बीआरटीएस के बस स्टॉपों को हटाने का काम अब शुरू हो गया है। व्हाइट चर्च दिशा वाले हिस्से में बस स्टॉपों का ध्वस्तीकरण जारी है। निर्माण के समय नगर निगम ने इन स्टॉप्स पर भारी खर्च किया था। इनमें स्वचालित दरवाजे, कांच की दीवारें और विदेश से मंगाई गई लकड़ी से बनी छत शामिल थी। एक बस स्टॉप पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च हुए थे। पूरे कॉरिडोर में पंद्रह से अधिक ऐसे स्टॉप बनाए गए थे, जिन्हें अब हटाया जा रहा है।
