अपनी जिंदादिली के कारण सदा याद रहेंगे थांदला के समाजसेवी अरविंद रुनवाल — बेटियों ने दिया कंधा, समाज के लिए बनी मिसाल
थांदला।
नगर के प्रतिष्ठित रुनवाल परिवार के सुश्रावक, मिलनसार, सामाजिक व्यक्तित्व और जिंदादिल इंसान के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले समाजसेवी अरविंद रुनवाल का अचानक हृदयगति रुकने से निधन हो गया। अप्रत्याशित निधन की खबर ने पूरे नगर, तेरापंथ समाज और राजनीतिक-सामाजिक संगठनों में गहरा शोक फैला दिया। सोशल मीडिया से लेकर समाज के हर वर्ग में लोगों ने उनके प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।
अरविंद रुनवाल न केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) से सक्रिय रूप से जुड़े रहे बल्कि हर समाज वर्ग की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते थे। उनकी लोकप्रियता और सामाजिक स्वीकार्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी धर्मपत्नी कामिनी रुनवाल नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 2 से सर्वाधिक मतों से विजयी पार्षद बनीं। यह जनसमर्थन उनके परिवार की वर्षों से समाज सेवा में की गई मेहनत का प्रमाण रहा।
तेरापंथ सभा के मजबूत स्तंभ रहे थे अरविंद रुनवाल
अरविंद रुनवाल कई वर्षों तक तेरापंथ सभा के अध्यक्ष रहे और प्रदेश कार्यकारिणी में भी उन्होंने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। उनके नेतृत्व में कई सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों का सफल संचालन हुआ। स्वभाव से बेहद सरल, विनम्र और हँसमुख होने के कारण वे सभी पीढ़ियों में लोकप्रिय थे।
उनकी सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने अंतिम दिन भी वे कल्याणपुरा में नवनिर्मित तेरापंथ भवन के उद्घाटन समारोह में बतौर अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद देर शाम अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। रात लगभग 8 बजे बेचैनी के दौरान एक उल्टी हुई और वे ज़मीन पर गिर पड़े।
सूचना मिलते ही सिविल अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. कमलेश परस्ते तुरंत उनके निवास पहुँचे। प्राथमिक उपचार के साथ हार्ट पम्प का प्रयास भी किया गया, परंतु उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उनके निधन से न केवल तेरापंथ समाज, बल्कि पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई।
परिवार—जिन्होंने दिया संस्कारों का उदाहरण
रुनवाल परिवार नगर का प्रतिष्ठित, संस्कारी और सामाजिक परिवार है।
अरविंद रुनवाल स्व. सुश्रावक श्री राजेंद्रकुमार रुनवाल के ज्येष्ठ पुत्र थे।
वे तेरापंथ सभा के पूर्वाध्यक्ष अभय रунवाल व इंदर रुनवाल के भाई,
और नवधा व ग्रिशा (गौरी) के पिता,
साथ ही ऋषि, अंशुल और हिमांशु के अंकल थे।
उनके सरल स्वभाव और सामाजिक सेवाओं ने परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज को गौरवान्वित किया।
बेटियों ने दिया कंधा — समाज के लिए बनी मिसाल
अरविंद रुनवाल की अंतिम यात्रा में उनकी दोनों बेटियों नवधा और ग्रिशा ने न केवल पिता को कंधा दिया बल्कि मुखाग्नि देकर समाज के सामने एक सशक्त संदेश प्रस्तुत किया —
“बेटियाँ किसी भी रूप से कम नहीं।”
आज जिस समाज में कई बार बेटियों की भूमिका को सीमित दृष्टि से देखा जाता है, वहाँ रुनवाल परिवार ने जिस साहस, दृढ़ता और संस्कारों की मिसाल पेश की, वह पूरे नगर के लिए प्रेरणादायी बन गई। अंतिम संस्कार में शामिल हर व्यक्ति भावुक था और इस दृश्य ने सभी के मन में बेटियों के प्रति सम्मान को और मजबूत कर दिया।
यह कार्य न सिर्फ परिवार के लिए गर्व का प्रसंग था, बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि—
“जहाँ बेटियों को संस्कार और अवसर दिए जाते हैं, वे हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम होती हैं।”
अनेक सामाजिक संगठनों की उपस्थिति, भावपूर्ण विदाई
स्वर्ग वाटिका में हुई अंतिम यात्रा में नगर के सैकड़ों लोग, तेरापंथ सभा के पदाधिकारी, भाजपा एवं RSS के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और विभिन्न समाजों के लोगों ने पहुँचकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में —
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तेरापंथ सभा मालवा प्रांताध्यक्ष संजय गांधी
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नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि सुनील पणदा
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श्रीसंघ पूर्वाध्यक्ष नगीनलाल शाहजी
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पूर्व जियोस विश्वास सोनी
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RSS विभाग प्रमुख आकाश चौहान
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भाजपा मंडल अध्यक्ष बंटी डामर
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अक्षय भट्ट, समर्थ उपाध्याय, संजय भाबर
आदि शामिल थे।
इस अवसर पर पवन नाहर ने दो लोगस्स का काऊसग्ग करवाया और दिवंगत आत्मा के लिए मंगलकामनाएँ दीं।
सभा का संचालन श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने किया।
जनसहयोग से मिली श्रद्धांजलि: स्वर्ग वाटिका जीर्णोद्धार हेतु 8290 रुपये एकत्रित
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने जनसहयोग स्वरूप स्वर्ग वाटिका के जीर्णोद्धार के लिए 8,290 रुपये की राशि एकत्र की, जिसे संचालक मयूर तलेरा को सुपुर्द किया गया। यह योगदान अरविंद रुनवाल की समाज सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का एक प्रतीक माना गया।
अरविंद रुनवाल: जिंदादिली का दूसरा नाम
थांदला उन्हें हमेशा याद रखेगा—
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उनकी मिलनसारिता,
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उनकी जिंदादिली,
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उनका समाज के हर वर्ग से जुड़ाव,
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और हर जरूरतमंद की मदद करने का निस्वार्थ भाव।
वे जहाँ भी जाते, लोगों में ऊर्जा और सकारात्मकता भर देते। उनकी बातों में सहजता, स्वभाव में सादगी और हृदय में लोगों के लिए असीम प्रेम था।



