देवउठनी एकादशी के बाद पारंपरिक रूप से विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है, लेकिन इस वर्ष ग्रहों की स्थिति के चलते शादियों का मौसम देर से प्रारंभ हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 18 नवंबर दोपहर 1.38 बजे सूर्य तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन के बाद ही शुभ कार्यों को हरी झंडी मिलेगी और 21 नवंबर से विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे। इसके कारण नवंबर और दिसंबर में मुहूर्त सीमित हैं, जबकि जनवरी में एक भी विवाह मुहूर्त उपलब्ध नहीं होगा।
जाने नवंबर और दिसंबर की सुबह तिथियों के बारे में

बता दे की नवंबर में कुल सात मुहूर्त है 21, 22, 23, 24, 25, 29 और 30 नवंबर इन तिथियों में हैं, जबकि दिसंबर में केवल पाँच मुहूर्त 1, 4, 5, 6 और 7 दिसंबर को उपलब्ध हैं। 14 दिसंबर को शुक्र ग्रह के अस्त होने के बाद से 1 फरवरी 2026 तक सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे, जिससे दिसंबर के मध्य से लेकर पूरे जनवरी तक शादियों पर पूर्ण विराम लग जाएगा। मुहूर्त कम होने के चलते शहरों में मैरिज गार्डन, होटल, धर्मशालाएं, बैंड-बाजे और घोड़ी सर्विसेज महीनों पहले ही फुल बुक हो चुकी हैं, जिसकी वजह से कई परिवारों को विकल्प ढूंढने पड़े हैं।
मुहूर्त न होने के बाद भी कुछ लोग विवाह पाती के आधार पर शुभ लग्न निकालकर शादियां कर रहे हैं। पंडितों के अनुसार भगवान श्री चिंतामन गणेश मंदिर में पाती लग्न निकालकर बिना पारंपरिक मुहूर्त के भी विवाह संपन्न किए जा सकते हैं। फरवरी 2026 में शुक्र उदय होने के साथ ही शहनाइयों का दौर फिर से तेज होगा और मांगलिक कार्यों की रौनक लौट आएगी।
