राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 नवंबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर है। इस दौरान वे राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को सहेजने के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ करेंगी।
इन योजनाओं का उद्देश्य परंपरागत वैद्यों और अखरा परंपरा के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और जनजातीय परंपराओं को बढ़ावा देना है।
परंपरागत वैद्य को मिलेंगे सालाना 5000 रुपए
पहली योजना “मुख्यमंत्री वैद्यराज सम्मान निधि” है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के परंपरागत वैद्य हर साल 5000 रुपए की सम्मान राशि प्राप्त करेंगे। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से दी जाएगी।
इस योजना का उद्देश्य है पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना और वैद्य पेशे को सम्मान देना है। राज्य सरकार का मानना है कि पारंपरिक उपचार और आयुर्वेदिक ज्ञान का संरक्षण करना बेहद जरुरी है और इससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।

सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को संरक्षित करेगी प्रदेश सरकार
दूसरी योजना “मुख्यमंत्री जनजातीय ग्राम अखरा विकास योजना” है। इसके तहत अखरा देवस्थलों का विकास किया जाएगा। प्रत्येक स्थल के विकास पर 5 लाख से 20 लाख रुपए तक खर्च किए जाएंगे। इस योजना से धार्मिक स्थलों का रखरखाव होगा, साथ ही यह जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को संरक्षित करने में भी मदद करेगी।
छत्तीसगढ़ सरकार ने इन पहलों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को सहेजने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे से इन योजनाओं का अधिक प्रचार-प्रसार होगा और यह स्थानीय समुदायों के लिए प्रेरणादायक साबित होगी। दोनों योजनाओं से न सिर्फ पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति को संरक्षण मिलेगा, बल्कि राज्य की जनजातीय पहचान और स्थानीय परंपराओं को भी मजबूती मिलेगी।
