बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हर होने के बाद अब RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें और भी बढ़ गई है। उनके परिवार के भीतर चल रही मनमुटाव अब खुलकर सामने आने लगा है। ये स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि भाई-बहन के बीच आरोप-प्रत्यारोप और कटु शब्दों का आदान-प्रदान सार्वजनिक हो चुका है। यह विवाद लालू यादव के किडनी ट्रांसप्लांट, कथित आर्थिक लेन-देन, अपमानजनक भाषा और घरेलू कलह तक पहुँच गया है।
रोहिणी ने दि थी अपने पिता लालू यादव किडनी :
लालू यादव को अपनी किडनी दान करने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर लगातार अपना दर्द साझा कर रही हैं। उन्होंने भावुक होते हुए लिखा कि वे अपने अपमान से बेहद आहत हैं। रोहिणी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वे नहीं चाहतीं कि किसी भी परिवार में उनके जैसा दर्द सहने वाली बेटी या बहन पैदा हो।

हार के बाद शुरू हुई बहसबाजी :
सूत्रों के अनुसार, मतगणना वाले दिन तेज प्रताप यादव की हार के बाद ही घर में बहसबाजी शुरू हो गई थी। शुक्रवार देर रात लालू यादव भी बाहर निकलकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन शनिवार को रोहिणी से जुड़ा विवाद बढ़ गया। इस तनावपूर्ण माहौल में तेजस्वी यादव पूरी तरह शांत रहे। लालू परिवार में मतभेद पहले भी रहे हैं। 2018 में तेज प्रताप और ऐश्वर्या राय के बीच वैवाहिक विवाद ने भी खूब सुर्खियाँ बटोरी थीं। अब उसी घर से एक बेटी रोहिणी आचार्य आंसुओं के साथ बाहर निकली है, जिसने पार्टी की हार पर जिम्मेदारी से जुड़े सवाल उठाए थे और इसके बदले उन्हें अपमान झेलना पड़ा। तेज प्रताप ने भी बहन के समर्थन में बयान दिया और कहा कि रोहिणी के साथ हुए अन्याय के गंभीर परिणाम होंगे।
परिवार में यह कलह नया नहीं है, बल्कि पहले से ही कई स्तरों पर तनाव मौजूद रहा है। तेज प्रताप लंबे समय से पार्टी में ‘जयचंदों’ को विवाद का कारण बताते रहे हैं और दावा करते हैं कि इन्हीं वजहों से उन्हें चुनाव से पहले पार्टी से बाहर किया गया। रोहिणी की नाराज़गी भी हाल की घटनाओं के बाद गहरी हो गई है। लालू ने जब तेजस्वी को राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था, तब तेज प्रताप ने खुद को कृष्ण और तेजस्वी को अर्जुन कहकर अपनी भूमिका स्थापित करने की कोशिश की थी, लेकिन तेजस्वी की ओर से किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं मिली। बाद में संजय यादव को तेजस्वी का रणनीतिकार बनाकर राज्यसभा भेजा गया, जिससे तेज प्रताप और अधिक हाशिए पर चले गए। व्यक्तिगत विवाद भी हालात को बिगाड़ते रहे।
रोहिणी के मामले में लालू यादव पर नैतिक दबाव और भी अधिक है, क्योंकि उन्होंने अपनी किडनी देकर अपने पिता की जान बचाई थी। ऐसे में इस विवाद के बीच उनका घर छोड़ना राजनीतिक और पारिवारिक दोनों ही स्तरों पर गंभीर स्थिति पैदा करता है। अब यह देखना अहम होगा कि लालू यादव इस पूरे विवाद पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और रोहिणी के ‘स्वनिष्कासन’ के बाद परिवार किस दिशा में जाता है। उधर, विपक्ष ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए लालू परिवार में बढ़ती दरार को गंभीर राजनीतिक संदेश बताया है।
गौरतलब है कि रोहिणी आचार्य का विवाह 2002 में समरेश सिंह से हुआ था, जो आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के बेटे हैं। समरेश पहले अमेरिका में रहते थे, बाद में सिंगापुर चले गए और वर्तमान में एवरकोर में निवेश बैंकिंग और अधिग्रहण-विलय के प्रबंध निदेशक हैं। रोहिणी अपने पति और तीन बच्चों के साथ वहीं रहती हैं। उन्होंने कहा कि मायके में जो कुछ हुआ, उससे उनकी सास भी बेहद व्यथित हैं और रो पड़ीं।
