21 लाख का दान भी झूठा? चांदखेड़ी जैन मंदिर विवाद में संरक्षक को ही
राजस्थान के झालावाड़ जिले के प्रसिद्ध चांदखेड़ी दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में मंदिर परिसर से प्रतिमाएं हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राज्यव्यापी आक्रोश का रूप ले चुका है। आरोपों, गिरफ्तारी और प्रशासन की कथित एकतरफा कार्रवाई ने पूरे जैन समाज को झकझोर दिया है। सवाल यह है कि क्या मंदिरों के संरक्षक—जो जीवन भर समाज और धर्म सेवा में लगे रहते हैं—उन्हें ही अब अपराधी साबित किया जाएगा? क्या ₹21 लाख के सहयोग को भी झूठा बताकर समाज की एकता और सौहार्द पर प्रहार किया जाएगा?
सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हुकुमचंद जैन ‘काका’ को पुलिस ने कथित झूठे आरोपों के आधार पर गिरफ्तार कर लिया। उनका अपराध क्या था? समाज का कहना है—केवल इतना कि उन्होंने दोनों समाजों की सहमति से मंदिर परिसर से प्रतिमाओं के स्थानांतरण में सहयोग दिया और सौहार्द के लिए हिंदू समाज के मंदिर निर्माण हेतु 21 लाख रुपये का दान दिया।
‘मालिक’ को चोर बताना न्याय नहीं—जैन समाज बोला: यह षड्यंत्र है, घटना नहीं
जैन राजनीतिक चेतना मंच, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ और विश्व जैन संगठन के पदाधिकारियों—राजेश जैन दद्दू, मयंक जैन और सुभाष काला—ने प्रशासन की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उनका कहना है:
-
पुलिस ने जल्दबाजी और एकतरफा जांच के आधार पर कार्रवाई की
-
प्रदर्शनकारी समूहों और दबाव बनाने वाले तत्वों के प्रभाव में निर्णय लिए गए
-
जैन समाज द्वारा बार-बार दिए गए तथ्यों को अनदेखा किया गया
-
एक समर्पित और सम्मानित ट्रस्ट अध्यक्ष को ‘चोर’ बताकर जैन समाज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई
पदाधिकारियों ने प्रशासन से पूछा—
“जब प्रतिमाएं विधि-विधान, मुहूर्त और आपसी सहमति से हटाई गई थीं, तो इसे अपराध कैसे बताया जा सकता है?”
सवाल यह भी उठाया गया कि जब हिंदू समाज के मंदिर निर्माण के लिए जैन समाज की ओर से 21 लाख रुपये का सहयोग इस पूरी प्रक्रिया का प्रमाण है, तो प्रशासन ने इसे क्यों नहीं माना?
पुलिस पर गंभीर आरोप—‘सत्य की नहीं, दबाव की जांच हुई’
जैन समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि पुलिस ने जिस तेजी से ट्रस्ट अध्यक्ष को गिरफ्तार किया, वह निष्पक्ष जांच का संकेत नहीं देती।
समाज का कहना है:
-
पुलिस ने असामाजिक तत्वों और उग्र भीड़ के दबाव में कदम उठाए
-
एकतरफा बयान लेकर हुकुमचंद जैन पर आरोप थोप दिए
-
डीएसपी को हटाए जाने के बावजूद जांच की दिशा नहीं बदली
-
यह साबित करता है कि मामला केवल स्थानीय स्तर का नहीं बल्कि प्रशासनिक दुर्भावना का परिणाम है
जैन समाज believes कि यह पूरी घटना सोची-समझी साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जैन समाज के धार्मिक अधिकारों को कमजोर करना और अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी के प्रबंधन को विवादित बनाना है।
धर्म और समाज को समर्पित व्यक्ति को अपराधी दिखाना—जैन समाज में गहरा रोष
हुकुमचंद जैन ‘काका’ को जैन समाज में एक श्रद्धेय, सादगीपूर्ण और सेवा-निष्ठ नेता के रूप में जाना जाता है।
उनकी गिरफ्तारी से समाज के बीच यह सवाल गूंज रहा है:
“क्या समाज के जीवनभर सेवा करने वाले व्यक्ति को एक गलत और पूर्वाग्रहपूर्ण जांच के आधार पर बदनाम किया जाएगा?”
समाज का मानना है कि किसी भी तीर्थ क्षेत्र के लिए उसके ट्रस्टी और संरक्षक ‘धर्मस्थल के अभिभावक’ होते हैं। उन्हें अपराधी ठहराना—समाज के विश्वास, श्रद्धा और धार्मिक स्वतंत्रता को ठेस पहुँचाता है।
कोटा से दिल्ली तक जैन समाज सड़क पर—सैकड़ों संगठनों ने किया विरोध का आह्वान
चांदखेड़ी जैन मंदिर विवाद अब धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनता जा रहा है।
कोटा, जयपुर, इंदौर, दिल्ली, अहमदाबाद और अन्य शहरों में:
-
जैन संगठनों ने शांतिपूर्ण विरोध सभाएँ शुरू कर दी हैं
-
समुदाय में गहरा आक्रोश दिखाई दे रहा है
-
सोशल मीडिया पर #JusticeForKaka और #ChandkhediTruthLikeFire जैसे अभियान चल रहे हैं
समाज का स्पष्ट संदेश है:
“जब तक असली षड्यंत्रकारी कार्रवाई के दायरे में नहीं आएंगे, जैन समाज शांत नहीं बैठेगा।”
सरकार का दायित्व—अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों की रक्षा
जैन समाज ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना केवल चुनावी वादा नहीं बल्कि संविधान का दायित्व है।
समाज ने चेतावनी दी है कि यदि धार्मिक मामलों में इस प्रकार की मनमानी जारी रही, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे।
जैन समाज की प्रमुख तीन मांगें
राजेश जैन दद्दू और मयंक जैन ने सरकार और प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
1. असली षड्यंत्रकारियों की गिरफ्तारी
हुकुमचंद जैन ‘काका’ को फंसाने वाले मास्टरमाइंड्स, चाहे वे किसी समूह या राजनीतिक दल से जुड़े हों—उनकी तुरंत गिरफ्तारी की जाए।
2. उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच या CBI जांच
इस मामले को पुलिस के हाथों से निकालकर सीबीआई या उच्च-स्तरीय न्यायिक आयोग को सौंपा जाए, ताकि वास्तविक तथ्यों की पारदर्शी जांच हो सके।
3. जैन समाज से सार्वजनिक माफी
प्रशासन द्वारा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और निर्दोष व्यक्ति को प्रताड़ित करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।
जैन समाज का अंतिम संदेश: “धर्म पर प्रहार बर्दाश्त नहीं!”
जैन समाज का कहना है कि यह विवाद सिर्फ एक प्रतिमा हटाने का मामला नहीं है, बल्कि यह धर्म पर प्रहार, सम्मान पर हमला और धार्मिक स्थलों के अधिकारों का उल्लंघन है।
समाज ने एक स्वर में कहा है:
“यदि भविष्य में भी जैन समाज पर ऐसा कोई अन्याय किया गया, तो सरकार को हमारा लोकतांत्रिक, अहिंसक लेकिन प्रचंड रूप से उठता रोष झेलना पड़ेगा।”
मयंक जैन
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ | विश्व जैन संगठन, इंदौर
भारतवर्षीय तीर्थ संरक्षणी महासभा**
