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China–Japan Tension News: सेंकाकू द्वीपों के पास चीनी जहाज, ताइवान मुद्दे पर East China Sea में बढ़ा तनाव और सैन्य गतिविधियां तेज

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Published On: 16 November 2025
Xi Jinping

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China–Japan Tension News: ताइवान को लेकर चीन-जापान में बढ़ा तनाव, सेंकाकू द्वीपों के पास पहुंचे चीनी जहाज — East China Sea में हलचल तेज


एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन और जापान के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। ताइवान पर जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची (Sanae Takaichi) की टिप्पणी के बाद चीन का रुख बेहद आक्रामक हो गया है। इसी कड़ी में चीन ने रविवार को जापान के बेहद पास स्थित विवादित सेंकाकू द्वीपों (Senkaku Islands) के आसपास अपने चार सशस्त्र कोस्ट गार्ड जहाज भेज दिए। चीन इन्हें दियाओयू द्वीप (Diaoyu Islands) कहता है और अपना अधिकार जताता है।

चीन के इस कदम के बाद पूर्वी चीन सागर (East China Sea) में हलचल तेज हो गई है और जापान ने इसे उकसाने वाली कार्रवाई (Provocative Move) बताया है। ताइवान को लेकर पिछले कुछ महीनों से जो असहजता बढ़ रही थी, वह अब खुले संघर्ष की ओर बढ़ती दिख रही है।

चीन ने जापान के बिल्कुल पास भेजे सशस्त्र कोस्ट गार्ड जहाज

चीन कोस्ट गार्ड ने आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि उसके वेसल 1307 फॉर्मेशन ने सेंकाकू/दियाओयू क्षेत्र के ‘क्षेत्रीय जल’ में प्रवेश कर ‘राइट्स इन्फोर्समेंट पेट्रोल’ अभियान चलाया। यह पहली बार नहीं है जब चीन ने इस क्षेत्र में गश्त की है, लेकिन ताइवान विवाद के बीच इस गश्त की तीव्रता और आक्रामकता कई गुना बढ़ गई है।

जापान के मुताबिक:

  • चार चीनी कोस्ट गार्ड जहाज पूरी तरह सशस्त्र थे

  • जहाज जापान के प्रशासन वाले द्वीपों के बिल्कुल नजदीक देखे गए

  • पिछले कुछ महीनों में चीनी जहाजों की आमद रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है

जापानी प्रशासन ने इस घटना को समुद्री सीमा का उल्लंघन और सीधा खतरा बताया है।

तनाव क्यों बढ़ा? विवाद की मूल वजह

तनाव की सबसे बड़ी वजह बनी जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की संसद में कही गई यह टिप्पणी:

“ताइवान पर चीन के किसी संभावित हमले की स्थिति में जापान सैन्य प्रतिक्रिया दे सकता है।”

यह बयान चीन को बेहद नागवार गुज़रा। चीन ने इसे हस्तक्षेप और आंतरिक मामले में दखल करार दिया है। चीन ने ताकाइची से बयान वापस लेने की मांग की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान जापान की रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है—जो चीन के विस्तारवादी रवैये से निपटने की तैयारी को दर्शाता है।

चीन ने अपने छात्रों को चीन-जापान तनाव को लेकर चेतावनी दी

तनाव इतना बढ़ चुका है कि चीन ने अपने छात्रों को जापान में सतर्क रहने की सलाह जारी की है। चीन के सरकारी चैनल CCTV ने रिपोर्ट किया कि शिक्षा मंत्रालय ने:

  • जापान में पहले से मौजूद चीनी छात्रों को सुरक्षा स्थिति पर नज़र रखने को कहा

  • जापान जाने की योजना बना रहे छात्रों को फैसले पर दोबारा विचार करने की सलाह दी

  • कहा कि मौजूदा माहौल में जापान में पढ़ाई करना जोखिम भरा हो सकता है

पिछले साल जापान में 1.23 लाख से अधिक चीनी छात्र थे।
अगर नए छात्रों की संख्या घटती है तो जापान के विश्वविद्यालयों पर बड़ा असर पड़ेगा—क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर काफी निर्भर रहते हैं।

ताइवान के आसपास चीनी सैन्य गतिविधियां भी बढ़ीं

चीन सिर्फ जापान के पास ही नहीं, बल्कि ताइवान स्ट्रेट के आसपास भी एक्टिव हो गया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक पिछले 24 घंटों में उसने:

  • 30 चीनी सैन्य विमान

  • 7 युद्धपोत

  • 1 आधिकारिक गवर्नमेंट वेसल
    को अपनी सीमा के आसपास घूमते देखा।

इसके अलावा, तीन चीनी ड्रोन जापान के योना गुनी द्वीपों के पास भी उड़ते पाए गए।

ये सभी घटनाएँ बताती हैं कि चीन ने ताइवान और उसके आसपास के इलाके में खतरे का स्तर बढ़ा दिया है

चीन–जापान–ताइवान विवाद का बड़ा असर — क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद सिर्फ चीन और जापान तक सीमित नहीं है:

  • अमेरिका, जापान के सबसे बड़े रणनीतिक साझेदार के रूप में ताइवान मुद्दे में पहले से शामिल है

  • दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस सहित इंडो-पैसिफिक के कई देशों की सुरक्षा नीतियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा

  • चीन के जहाजों की बढ़ती संख्या बताती है कि वह सेंकाकू—जो जापान के नियंत्रण में है—को लेकर अपनी रणनीति और तेज कर रहा है

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे एक नया एशियाई फ्लैशपॉइंट बता रहे हैं, जहाँ किसी भी गलत कदम से बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है।

जापान की प्रतिक्रिया — उकसाने वाली कार्रवाई बताया

जापानी सरकार ने कहा:

  • चीन की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है

  • जापान किसी भी उकसावे को बर्दाश्त नहीं करेगा

  • ताइवान के मुद्दे पर जापान अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देगा

जापानी मीडिया इसे “चीन के दबाव की नई रणनीति” करार दे रहा है।

चीन का संदेश — “ताइवान पर कोई समझौता नहीं”

पूरी घटना से साफ है कि चीन ताइवान के मुद्दे पर किसी भी देश की टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करना चाहता।
चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और “बल प्रयोग से इनकार नहीं किया है”।

चीन की यह बढ़ती सैन्य गतिविधि यह दिखाती है कि:

  • चीन ताइवान को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाएगा

  • जापान की किसी भी टिप्पणी पर आक्रामक प्रतिक्रिया दी जाएगी

  • क्षेत्रीय जल में उपस्थिति बढ़ाकर चीन वास्तविक नियंत्रण की स्थिति बनाना चाहता है

निष्कर्ष: East China Sea में तेज़ी से बदल रहा शक्ति संतुलन

चीन और जापान के बीच बढ़ता तनाव एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
सेंकाकू/दियाओयू द्वीपों पर चीन की आक्रामक गश्त, ताइवान के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ और जापान के छात्रों को जारी चेतावनी—ये सभी संकेत बताते हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।

भूमि विवाद, सैन्य ताकत का प्रदर्शन और ताइवान की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति मिलकर इस क्षेत्र को दुनिया का सबसे खतरनाक संघर्ष क्षेत्र बना सकती है।

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