बीते दिनों 10 नवंबर की शाम दिल्ली के लाल किले के आसपास सब कुछ सामान्य था । लोग रोज़ की तरह घूम रहे थे, लेकिन कुछ ही समय में ब्लास्ट हो गया जिससे हालात पूरी तरह बदल गए। लगातार हुए धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा ।
आतंकी हमले के बाद सीएनजी टैंक के फट गए , चीख-पुकार और भगदड़ ने माहौल हो गया। ऐसी स्थिति के बीच दो पुलिसकर्मी ऐसे थे जिन्होंने अपनी जान की परवाह किये बिना दर्जनों लोगों को बचाया। हेड कांस्टेबल थान सिंह और हेड कांस्टेबल अजय कुमार ने अपनी बहादुरी से कई मासूमो की जान बचा ली ।
दो बहादुर जवानो ने नई घटना की जानकारी
दोनों जवानों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की PCR को कॉल पहुंचने से पहले ही वे धमाके की आवाज सुनकर मौके की ओर दौड़ पड़े। थान सिंह कहते हैं, “हम पुलिस स्टेशन में थे जब अचानक जोरदार धमाका हुआ। समझ नहीं आया कि क्या हुआ, लेकिन हम तुरंत उसी दिशा में भागे जहां से आवाज आई थी।”
जब वे घटनास्थल पर पहुंचे, वहां का दृश्य बेहद दर्दनाक था। चारों तरफ लोग घायल पड़े थे, कई वाहन जल रहे थे और धमाके लगातार जारी थे। हवा में गैस की तीखी गंध थी और लोग डर के मारे एक-दूसरे को धक्का देकर भाग रहे थे।
थान सिंह ने बताया :
थान सिंह बताते हैं, “कई लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। किसी की हड्डी टूटी थी, कोई खून से लथपथ था। लेकिन लोग डर के कारण घायलों को छूने तक की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे।”
ऐसे में दोनों पुलिसकर्मियों ने किसी आदेश का इंतजार नहीं किया और राहत कार्य शुरू कर दिया। वे आग, धुएं और धमाकों के बीच घुसकर घायलों को सुरक्षित स्थानों तक ले गए। कई लोगों को कंधे पर उठाकर सड़क से बाहर निकाला और एम्बुलेंस आने तक स्वयं उनकी मदद करते रहे।
इनकी बहादुरी और त्वरित कार्रवाई की वजह से कई लोगों की जान बच सकी। कठिन परिस्थितियों के बीच दोनों पुलिसकर्मी उस रात के सच्चे हीरो साबित हुए।
