बिहार की जनता ने लोकतंत्र के इस पर्व में भारी मतों से प्रदेश की कमान NDA को सोप दी है। जनता ने अगले 5 सालो के लिए NDA की सरकार को चुना है।
ऐसा बताया जा रहा है की इस बार एनडीए की शानदार जीत के पीछे महिला मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी, एक मज़बूत सामाजिक गठबंधन और विपक्ष की बिखरी रणनीति को बताया जा रहा है।
महिला मतदाताओं की भागीदारी से मिला देश को समर्थन
बिहार के चुनाव में जनता ने इतिहास रच दिया। बता दे की इस विधानसभा चुनाव में आज तक की सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। इस चुनाव में महिलाओ ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जिससे NDA की सरकार को बहुत फायदा हुआ। NDA ने जिन जिलों में जीत हासिल की वहां के अनेक जिलों में महिला मतदान प्रतिशत पुरुषों से कहीं आगे रहा, और इसका सीधा असर परिणामों पर दिखा।
7 जिलों में महिला मतदान पुरुषों से 14% से अधिक रहा , वही किशनगंज विधान सभा सीट में यह अंतर 19.5% हो गया , मधुबनी में 18.4% और गोपालगंज में 17.72% दर्ज किया गया है।

नीतीश कुमार की सरकार देगी महिलाओ को 10,000 रुपये की सहायता
नीतीश सरकार ने महिलाओ के लिए , जीविका दीदी कार्यक्रम योजना की घोषणा की थी, जिसमे महिलाओ को 10,000 रुपये की सहायता मिलेगी। इसके चलते नीतीश सरकार ने महिलाओ के बीच भरोसा मजबूत किया, जो वोटों में स्पष्ट रूप से झलक गया।
एनडीए का मजबूत जातीय और सामाजिक गठबंधन
एनडीए ने इस चुनाव में एक व्यापक और प्रभावी सामाजिक समीकरण तैयार किया।
परंपरागत सवर्णों के साथ-साथ ओबीसी, ईबीसी, और दलित समुदायों का बड़ा हिस्सा एनडीए के साथ मजबूती से खड़ा रहा। इस व्यापक सोशल गठजोड़ ने महागठबंधन के पारंपरिक मुस्लिम–यादव (M-Y) समीकरण को काफी कमजोर कर दिया।
महागठबंधन की आंतरिक कमजोरियाँ और वोटों का बिखराव
दूसरी ओर, महागठबंधन एकजुटता और स्पष्ट रणनीति के अभाव से जूझता रहा। कई सीटों पर सहयोगी दलों में तालमेल की कमी दिखाई दी , वही महागठबंधन की सरकार उम्मीदवारों को लेकर आंतरिक सहमति करने में भी विफल हो गयी।
इन सबने विपक्ष को नुकसान पहुँचाया।
सीमांचल क्षेत्र में AIMIM की एंट्री ने मुस्लिम वोटों का बंटवारा कर दिया, जिससे महागठबंधन को अपने ही पारंपरिक गढ़ में नुकसान हुआ। यादव वोटों में भी बिखराव देखने को मिला, जिसका लाभ एनडीए को मिला।
