Baba Bageshwar Controversial Statement: मथुरा में गरजे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बोले— ‘राम नाम और वंदे मातरम से दिक्कत है तो लाहौर चले जाएं’ | सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2024
परिचय
बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर से अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। दिल्ली के छतरपुर से शुरू हुई उनकी सनातन हिंदू एकता पदयात्रा आठवें दिन उत्तर प्रदेश के मथुरा पहुंची, जहां उन्होंने जनसमूह को संबोधित करते हुए कई विवादित और तीखे बयान दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को ‘वंदे मातरम’ या ‘राम नाम’ से परेशानी है, तो वह भारत में रहने के बजाय सीधे लाहौर चला जाए।
उनका यह बयान तेजी से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
मथुरा में बाबा बागेश्वर का तीखा बयान
मथुरा में आयोजित सभा में बाबा बागेश्वर ने कहा—
“जिन्हें राम नाम से दिक्कत है, जिन्हें वंदे मातरम बोलने में परेशानी होती है, उन्हें भारत में रहने पर विचार करना चाहिए। यदि उन्हें इतना ही बुरा लगता है, तो वे लाहौर जा सकते हैं। टिकट के लिए पैसे नहीं हैं तो मैं खुद कर्ज लेकर उनका टिकट कटवा दूंगा।”
यह बयान सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर दो तरह की प्रतिक्रियाएं आईं—
एक ओर समर्थकों ने इसे राष्ट्रभक्ति बताया, तो दूसरी ओर इसका विरोध भी हुआ।
‘हम मुसलमानों के विरोधी नहीं’ – धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
बाबा बागेश्वर ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी धर्म विशेष से नहीं है। उन्होंने कहा—
“मैं मुसलमानों के विरोध में नहीं हूं। मेरा विरोध उन लोगों से है जो राम का अपमान करते हैं, राष्ट्र के विरोध में विचार रखते हैं या देश विरोधी गतिविधियों को समर्थन देते हैं।”
उनका कहना था कि भारत में रहकर भारत का ही विरोध करना ‘कृतघ्नता’ है। उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि कई लोग भारत में रहकर इसकी संस्कृति और परंपराओं पर सवाल उठाते हैं, जबकि ऐसे लोगों को खुद सोचना चाहिए कि उनकी निष्ठा किसके प्रति है।
‘गंगा, गीता और संतों के विरोधियों का डीएनए टेस्ट होना चाहिए’
अपने भाषण में बाबा बागेश्वर ने हिंदू विरोधी मानसिकता पर भी करारा हमला बोला। उन्होंने कहा—
“जैसे शुगर की पुष्टि शुगर टेस्ट से होती है, वैसे ही जो लोग हिंदू धर्म, गीता, गंगा और संतों के विरोध में बोलते हैं, उनका डीएनए टेस्ट होना चाहिए।”
यह बयान भी विवादों में है, क्योंकि कई लोग इसे सांप्रदायिक मानसिकता से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, बाबा बागेश्वर के समर्थकों का कहना है कि उनका इशारा सिर्फ उन लोगों की ओर है जो हिंदू संस्कृति का अपमान करते हैं।
‘वो तुम्हारे चाचा लगते हैं क्या?’ — सभा में व्यंग्य
बयानबाजी के दौरान उन्होंने एक और विवादित टिप्पणी की—
“कुछ लोग भारत में रहते हैं, भारत का खाते हैं, लेकिन गुणगान उन लोगों का करते हैं जो राष्ट्र विरोधी विचार रखते हैं। ऐसे लोग क्या तुम्हारे चाचा लगते हैं?”
यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है और इस पर मीम्स और बहस दोनों चल रही हैं।
7 नवंबर को शुरू हुई पदयात्रा – 16 नवंबर को होगा समापन
बाबा बागेश्वर की ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ का उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट करना बताया जा रहा है। यह यात्रा—
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दिल्ली के छतरपुर स्थित कात्यायनी मंदिर से शुरू हुई
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फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल होते हुए
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मथुरा पहुंची
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और अब 16 नवंबर को वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में इसका समापन होगा।
यात्रा में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां शामिल हो रही हैं। जगह-जगह भक्तों की भारी संख्या देखी जा रही है, जहां बागेश्वर धाम सरकार के दर्शन और आशीर्वाद पाने के लिए लोग उमड़ रहे हैं।
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा का उद्देश्य
बाबा बागेश्वर ने अपनी पदयात्रा के दौरान बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है—
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हिंदू समाज में आस्था और एकता को मजबूत करना
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भारत की सनातनी परंपराओं और संस्कृति को पुनर्जीवित करना
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युवाओं को राष्ट्रभक्ति और धर्म की ओर प्रेरित करना
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समाज में आत्मसम्मान और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी इंटरनेट और आधुनिकता में उलझकर अपनी जड़ों से दूर हो रही है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।
पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब
मथुरा और फरीदाबाद में आयोजित सभाओं में हजारों की भीड़ देखी गई। सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण के दौरान भी लाखों लोग जुड़े। यात्रा के दौरान—
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महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने जोरदार उत्साह दिखाया
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कई जगह फूल वर्षा की गई
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भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन हुआ
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सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए
यात्रा के हर पड़ाव पर भक्तों ने बागेश्वर धाम सरकार का जोरदार स्वागत किया।
बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
बाबा बागेश्वर के बयान पर राजनीति भी गर्मा गई है। कुछ राजनीतिक दलों ने उनके विचारों का समर्थन किया, जबकि कई दलों ने इसे समाज को बांटने वाला बताया। हालांकि, बाबा बागेश्वर अपनी लाइन पर कायम हैं और कहते हैं—
“मैं सनातन धर्म का ‘प्रचारक’ हूं, किसी पार्टी का कार्यकर्ता नहीं।”
उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि जनता को जागरूक करना है।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड बना: #BabaBageshwar #DhirendraShastri
उनके बयान का वीडियो ट्विटर, इंस्टाग्राम और YouTube पर तेजी से वायरल हुआ। उनके समर्थकों ने इस बयान को “धर्म और राष्ट्र के प्रति निष्ठा” बताया, जबकि विरोधियों ने इसे समाज में विभाजन फैलाने वाला करार दिया।
निष्कर्ष
बाबा बागेश्वर का यह बयान कि “वंदे मातरम और राम नाम से दिक्कत हो तो लाहौर चले जाओ”— न सिर्फ विवादों में है, बल्कि राजनीतिक और धार्मिक चर्चाओं के केंद्र में भी आ गया है।
हालांकि, उनके समर्थकों का दावा है कि उनका उद्देश्य राष्ट्रभक्ति और हिंदू एकता को मजबूत करना है।
अब 16 नवंबर को यात्रा के समापन के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि बाबा बागेश्वर आगे कौन-सा संदेश देते हैं।
