जनजातीय गौरव दिवस पर नागदा शासकीय महाविद्यालय में आयोजित हुआ भव्य कार्यक्रमों का श्रृंखला समारोह
नागदा जं. (निप्र)। मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर शासकीय महाविद्यालय नागदा में 1 नवंबर से 15 नवंबर 2025 तक विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ, स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न यह आयोजन महाविद्यालय स्तर पर जनजातीय इतिहास, संस्कृति और योगदान को याद करने का एक सशक्त प्रयास रहा।
कार्यक्रमों का मार्गदर्शन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पी.बी. रेड्डी द्वारा किया गया। इस दौरान महाविद्यालय परिसर पूरे पखवाड़े तक जनजातीय संस्कृति, भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत गतिविधियों से गुंजायमान रहा।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में छात्रों का उत्साह, कॉलेज में रचनात्मकता का माहौल
पखवाड़ा भर चले कार्यक्रमों में छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। विविध विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें विशेष रूप से—
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निबंध लेखन प्रतियोगिता
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भाषण प्रतियोगिता
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प्रश्नोत्तरी (क्विज) प्रतियोगिता
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रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिता
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चित्रकला एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता
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खेलकूद स्पर्धाएं
इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य छात्रों में जनजातीय नायकों के संघर्ष, स्वाभिमान, सामाजिक जागरूकता और भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में जनजातीय योगदान के प्रति समझ और संवेदना विकसित करना रहा।
विशेष रूप से चित्रकला, रंगोली और पोस्टर प्रतियोगिताओं में छात्रों ने भगवान बिरसा मुंडा, उलगुलान आंदोलन, जंगल अधिकार, जल-जंगल-ज़मीन की अवधारणा, भारत के विभिन्न जनजातीय आंदोलनों तथा स्वदेशी संस्कृति को आधार बनाकर आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं।
समापन समारोह में विद्वानों ने जनजातीय इतिहास और बिरसा मुंडा के संघर्ष पर डाली रोशनी
श्रृंखला के समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. पी.बी. रेड्डी द्वारा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वासुदेव जटावन और डॉ. सुनील प्रसाद उपस्थित रहे।
अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. ओ.पी. परमार और सहायक प्राध्यापक प्रांजल रंजन अवस्थी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से छात्रों को जनजातीय इतिहास से अवगत कराया।
बिरसा मुंडा के उलगुलान आंदोलन का विस्तृत वर्णन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रांजल रंजन अवस्थी ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, उनके प्रेरक व्यक्तित्व और उनके द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक उलगुलान महाविद्रोह पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे बिरसा मुंडा ने
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ब्रिटिश शासन की कठोर वन नीतियों,
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धर्मांतरण के प्रयासों,
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जनजातीय अधिकारों के हनन,
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तथा जंगल-जमीन पर पारंपरिक अधिकारों को छीनने वाली नीतियों के विरुद्ध संगठित संघर्ष किया।
अवस्थी ने छात्रों को यह भी बताया कि बिरसा मुंडा न केवल एक जननायक थे, बल्कि वे भारतीय समाज में स्वाभिमान, आत्मसम्मान, और संस्कृति-संरक्षण के प्रतीक हैं।
डॉ. ओ.पी. परमार ने जनजातीय संस्कृति और विद्रोह की पृष्ठभूमि पर की सारगर्भित प्रस्तुति
दूसरे वक्ता डॉ. ओ.पी. परमार ने भारतीय जनजातीय समुदायों की परंपराओं, संस्कृति, जीवनशैली, लोक कलाओं और संघर्षों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने मुंडा विद्रोह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताते हुए समझाया कि कैसे अंग्रेजों द्वारा भूमि-कब्जे और सामाजिक दमन के विरुद्ध जनजातीय समुदायों ने संगठित प्रतिरोध किया।
परमार ने छात्रों को यह समझाया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम केवल मुख्यधारा के नेताओं से नहीं, बल्कि जनजातीय नायकों के संघर्ष, त्याग और बलिदान से भी आकार पाया है।
प्राचार्य डॉ. पी.बी. रेड्डी ने रंपा विद्रोह और जनजातीय आंदोलन की ऐतिहासिक कड़ियों को जोड़ा
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. रेड्डी ने बिरसा मुंडा के साथ-साथ रंपा विद्रोह की भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि जनजातीय आंदोलनों ने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष को एक नई दिशा दी और भारतीय समाज को यह सिखाया कि अपने अधिकारों के लिए एकजुट होना कितना आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय जनजातीय इतिहास को गहराई से समझने और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
कार्यक्रम संचालन और आभार व्यक्त
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी सचिन तिवारी ने किया।
समापन में आभार सी.एल. डोडिया ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक—
डॉ. के.सी. मिश्रा,
डॉ. शिवशंकर पटेल,
डॉ. रचना खंडेलवाल,
डॉ. एम.एस. मंसूरी,
डॉ. सोनाक्षी सोलंकी,
डॉ. सविता मरमट
तथा समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में जनजातीय संस्कृति, प्रेरक गीत, और देशभक्ति की भावना का वातावरण रहा।
जनजातीय गौरव दिवस: युवाओं में इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूकता का संवर्धन
नागदा शासकीय महाविद्यालय में आयोजित इस पखवाड़ा कार्यक्रम ने जहाँ छात्रों की प्रतिभा को मंच प्रदान किया, वहीं जनजातीय नायकों और उनकी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व जागरूकता भी बढ़ाई।
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष में इस प्रकार के आयोजन नए भारत के युवाओं में आत्मगौरव, सामाजिक समरसता और ऐतिहासिक चेतना का संचार करते हैं।


