मध्यप्रदेश बनेगा हरित ऊर्जा का प्रमुख केंद्र – मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल — मुख्यमंत्री यादव ने बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा कि ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) आज की आवश्यकता है और समेकित ऊर्जा उत्पादन पद्धति के माध्यम से प्रदेश और देश को स्वच्छ, हरित व उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि निजी भागीदारी एवं सहयोग से हम मध्यप्रदेश को हरित ऊर्जा का हब बनाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रिलायंस ग्रीन एनर्जी कंपनी द्वारा भोपाल, इंदौर तथा सतना में नवनिर्मित तीन कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट्स का वर्चुअल उद्घाटन किया।
ऊर्जा उत्पादन में क्रांति
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये अत्याधुनिक CBG प्लांट्स साझेदारी और प्रगति का प्रतीक हैं। ये प्लांट्स कचरे को ऊर्जा में बदलते हैं; कचरा जो पहले समस्या बनता था, वह अब ऊर्जा स्रोत बन रहा है। मध्यप्रदेश की धरती अत्यधिक उपजाऊ है और ये प्लांट्स ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ पराली/नरवाई जलाने जैसी गतिविधियों को भी कम करेंगे। उन्होंने कहा: “हम मध्यप्रदेश में भविष्य की ऊर्जा तैयार कर रहे हैं।”
उल्लेखनीय है कि इन तीन CBG प्लांट्स का वर्ष 2023-24 में भूमिपूजन हुआ था और आज उनका लोकार्पण मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। कम्पनी ने प्रदेश में कुल छह संयंत्र लगाने की योजना बनाई है। इनमें से तीन आज उद्घाटित हुए; बाकी जबलपुर, बालाघाट व सीहोर में निर्माणाधीन हैं। इन छह संयंत्रों में कुल निवेश लगभग ₹700 करोड़ प्रस्तावित है, तथा उनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता वर्ष में लगभग 45 हजार टन है। इन संयंत्रों के संचालन से प्रति वर्ष लगभग 17 हजार टन CO₂ उत्सर्जन में कमी अपेक्षित है – जो सरकार के पर्यावरण-संरक्षण प्रयासों का सशक्त प्रमाण है।
CBG प्लांट का उद्घाटन – भोपाल
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बताया कि भोपाल के आदमपुर छावनी क्षेत्र में रिलायंस द्वारा बना मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा – अत्याधुनिक CBG प्लांट आज उद्घाटित हो रहा है। यह प्लांट केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि “हरित क्रांति 2.0” की शुरुआत है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वेस्ट-टू-वेल्थ” और “एनर्जी फ्रॉम वेस्ट” विज़न का प्रत्यक्ष उदाहरण माना जा रहा है।
भोपाल प्लांट का विवरण इस प्रकार है:
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लगभग ₹130 करोड़ की लागत से 20 एकड़ भू-क्षेत्र में विकसित।
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प्रतिदिन 22.5 टन बायो-गैस उत्पादन क्षमता।
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इसके लिए प्रतिदिन लगभग 260 टन कृषि अवशेष (जैसे पराली व नेपियर घास) का उपयोग।
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इस गैस का उपयोग बायो-CNG के रूप में किया जाएगा जो वाहनों, घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग हेतु उपयुक्त होगा – लगभग 2000 ऑटो-रिक्षा व लघु वाहनों को ईंधन प्राप्त होगा।
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प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 250 से अधिक रोजगार इस परियोजना से सृजित होंगे।

अपशिष्ट से अवसर – वेस्ट-मैनेजमेंट का नया मॉडल
रिलायंस के अधिकारियों ने बताया कि यह CBG संयंत्र ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ तकनीक पर आधारित है और पर्यावरण-अनुकूल ‘व्हाइट कैटेगरी’ मानकों के अनुरूप है। इसमें एनेरोबिक डाइजेशन टेक्नोलॉजी (Anaerobic Digestion Technology) का प्रयोग हुआ है, जिसे GPS Renewables (भारत) व Snow Leopard Projects (जर्मनी) ने विकसित किया है।
इस संयंत्र का उद्देश्य केवल ऊर्जा उत्पादन नहीं बल्कि किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है। अवशेष से उत्पन्न जैविक खाद (‘Fermented Organic Manure’) प्रतिदिन लगभग 90 टन तैयार होगी – जिसे किसानों को प्राकृतिक जैविक खाद के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ेगी, रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी और फसलों की गुणवत्ता सुधरेगी।
अन्य स्थानों पर CBG प्लांट्स – आगे की दिशा
प्रदेश में अन्य योजनाबद्ध CBG संयंत्रों की स्थिति इस प्रकार है:
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भोपाल, इंदौर, सतना – इन तीनों में प्लांट कमीशनिंग स्टेज पर हैं।
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जबलपुर – यह अंतिम चरण में है।
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बालाघाट व सीहोर – निर्माणाधीन हैं।
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पहले चरण में 100 संयंत्रों की स्थापना योजना है, प्रत्येक में लगभग ₹120-120 करोड़ का निवेश अनुमानित है, जिससे 500+ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
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आने वाले वर्षों में रिलायंस कम्पनी द्वारा प्रदेश में कुल 500 CBG प्लांट्स लगाने की योजना है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास एवं आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के नए युग का शुभारंभ हो रहा है। यह परियोजना – कचरे से ऊर्जा, कृषि अवशेष से उत्साह – एक समेकित हरित ऊर्जा मॉडल प्रस्तुत कर रही है। प्रदेश में CBG परियोजनाओं की संख्या तेजी से बढ़ेगी, किसानों व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा, पर्यावरण-उत्सर्जन में कमी आएगी और मध्यप्रदेश धीरे-धीरे हरित ऊर्जा का हब बन जाएगा।
यह कदम न सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि पराली व नरवाई जलाने जैसी पारंपरिक समस्या को हल करने में भी आधारित है। साथ ही किसानों को अवशेष से आमदनी मिलने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार ये परियोजनाएं विकास, पर्यावरण-संरक्षण, ग्रामीण उत्थान एवं ऊर्जा स्वावलंबन को एक साथ आगे ले जा रही हैं।
