कोटा, नवंबर 2025:
कोटा में जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत मंगलमय अवसर आया, जब आर के पुरम स्थित श्री मुनि सुब्रत नाथ त्रिकाल चौबीसी जैन मंदिर में भव्य सिंह द्वार का शिलान्यास सम्पन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में आचार्य 108 प्रज्ञा सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य ने कार्यक्रम को अत्यधिक धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल प्रदान किया।
इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि यह शिलान्यास मंदिर की ऐतिहासिक परंपरा और जैन समाज के सामूहिक प्रयास का प्रतीक है। कार्यक्रम का संचालन पंडित उदय शास्त्री के निर्देशन में हर्षोल्लास और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
शिलान्यास कर्ता:
इस भव्य सिंह द्वार का शिलान्यास करने का सौभाग्य विनोद जैन टोरडी, श्रीमती समिता जैन, अभिषेक जैन और प्रासुक जैन परिवार को प्राप्त हुआ। मंदिर समिति के महामंत्री एवं कोषाध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ने बताया कि प्रातः काल नित्य अभिषेक के पश्चात शांति धारा का आयोजन किया गया और आचार्य प्रज्ञा सागर जी महाराज के सानिध्य में विश्व शांति की मंगलकामनाएँ की गई।
सामाजिक और धार्मिक भागीदारी
इस शुभ अवसर पर सकल जैन समाज के प्रमुख नेता उपस्थित रहे, जिनमें अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बडला, कार्याध्यक्ष जे. के. जैन, मनोज जायसवाल, विमल जैन नान्ता, दीपक जैन, मुकेश जैन, पंकज जैन, राजेंद्र गोधा, चंद्रेश जैन, पदम जैन, हरक चंद जैन, विमल जैन (दरा), राजेंद्र श्रीमाल शामिल थे।
मंदिर समिति के प्रचार प्रसार मंत्री पारस जैन “पार्श्वमणि”, पत्रकार उपाध्यक्ष लोकेश बरमूडा ने बताया कि धर्मसभा के दौरान चित्र अनावरण, मंगल दीप प्रज्वलन और शास्त्र भेट जैसी मांगलिक क्रियाएं सम्पन्न की गई। धर्मसभा का संचालन पंडित रविंद्र जैन और पारस जैन ने सफलतापूर्वक किया।
आचार्य 108 प्रज्ञा सागर जी महाराज का उपदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य प्रज्ञा सागर जी महाराज ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग केवल उपदेश देते हैं, लेकिन उपचार नहीं करते। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन में उपदेश की नहीं बल्कि उपचार की आवश्यकता है।
आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि जैसी व्यक्ति की सोच होती है, वैसी उसकी दृष्टि और सृष्टि होती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को हमेशा अपनी सोच सकारात्मक रखनी चाहिए, क्योंकि सोच और विचार का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने उदाहरण देकर कहा:
“आज मानव की स्थिति ऐसी है, गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास। जहां देखी तवा परात वही गुजरी रात।”
इसका आशय यह है कि लोग जीवन में सतत अनुशासन और आध्यात्मिक दृष्टि के बिना भटक जाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि देव, शास्त्र और गुरु के प्रति जीवन में सच्ची श्रद्धा, भक्ति और समर्पण ही सम्यक दृष्टि का मार्ग है।
धर्म, शिक्षा और पर्यावरण का संगम
दोपहर में आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज ससंघ विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां विद्यार्थियों को धार्मिक उपदेश और जीवन मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इस अवसर पर वृक्षारोपण भी किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा की भावना को दर्शाता है।
सायकल आनंद यात्रा के बाद भक्तामर पाठ, मंगल आरति और संगीत के साथ धार्मिक कार्यक्रम का समापन हुआ।
आगामी कार्यक्रम और सामाजिक संदेश
मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि आगामी 13 नवंबर को सुबह 6:30 बजे आचार्य प्रज्ञा सागर जी महाराज ससंघ जगपुर, विमल जैन के फार्म हाउस के लिए बिहार प्रस्थान करेंगे। यह यात्रा भी धार्मिक और सामाजिक उद्देश्य के लिए आयोजित की जाएगी।
आचार्य श्री ने अंत में सभी उपस्थित लोगों से सद्भाव, मैत्री भाव और करुणा बनाए रखने का संदेश दिया। उनका कहना था कि:
“मैत्री भाव जगत में मेरा सब जीवों से नित्य रहे, दिन दुखी जीवों पर मेरे हृदय से करुणा का स्रोत बहे।”
निष्कर्ष
कोटा में इस भव्य सिंह द्वार का शिलान्यास केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जैन धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक जागरण और समाज सेवा का प्रतीक बन गया। आचार्य 108 प्रज्ञा सागर जी महाराज के उपदेश और मार्गदर्शन से यह कार्यक्रम जीवन में सकारात्मक सोच, भक्ति और समर्पण की प्रेरणा देने वाला साबित हुआ।
यह शिलान्यास और इसके द्वारा दिया गया संदेश जैन धर्म की परंपरा, समाज सेवा और सकारात्मक जीवन दृष्टि को प्रदर्शित करता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।


